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This Article is From Jul 21, 2018

पीएम मोदी ने राहुल गांधी से कहा- हम आपकी आंखों में आंखें कैसे डाल सकते हैं, 20 बड़ी बातें

अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान लगभग डेढ घंटे के अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष द्वारा लगाये गए तमाम आरोपों का बिंदुवार जवाब दिया.

पीएम मोदी ने राहुल गांधी से कहा- हम आपकी आंखों में आंखें कैसे डाल सकते हैं, 20 बड़ी बातें
पीएम मोदी ने अपने भाषण में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की हर बात का जवाब दिया
नई दिल्ली:
  1. राहुल गांधी को प्रधानमंत्री की कुर्सी हथियाने की जल्दी है, इसलिए विपक्ष द्वारा यह प्रस्ताव लाया गया है. बीजेपी को जनता का समर्थन प्राप्त है.
  2. सरकार को बहुमत मिला है, लेकिन विपक्ष इस बात को नहीं समझ रहा है और अपने स्वार्थ के लिए देश पर विश्वास नहीं कर रहा है. सरकार को देश के 125 करोड़ लोगों का आशीर्वाद मिला है. 
  3. पिछले चार साल में देश में एनडीए सरकार के विकास कार्यों के बावजूद ‘‘अहंकार’’ के कारण अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है. सवा सौ करोड़ देशवासियों ने चुना है और ‘‘यहां से कोई न उठा सकता है, न बैठा सकता है.’’  
  4. ‘‘उनका (राहुल गांधी के गले मिलने पर) एक ही मकसद है मोदी हटाओ. मैं हैरान हूं कि सुबह चर्चा शुरू हुई थी, मतदान भी नहीं हुआ था, जय पराजय का फैसला भी नहीं हुआ था लेकिन उन्हें यहां पहुंचने का इतना उत्साह है कि आकर (मुझसे) बोले, उठो उठो.’ यहां कोई न उठा सकता है, न बैठा सकता है. सवा सौ करोड़ देशवासियों ने बैठाया है. सवा सौ करोड़ देशवासी उठा सकते हैं. इतनी जल्दबाजी क्या है.’ 
  5. उनका (राहुल) एक ही मकसद है, मैं ही प्रधानमंत्री बनूंगा. इसके लिए कम से कम अविश्वास प्रस्ताव का बहाना तो न बनाइए.’’ 
  6. ‘‘एक गरीब मां का बेटा, पिछड़ी जाति से आने वाला नरेन्द्र मोदी ऐसा (राहुल गांधी की आंखों से आंखे न मिलने की बात पर) साहस कैसे कर सकता है? देश ने देखा है कि आंखों में आंख डालने पर सुभाष चंद्र बोस के साथ क्या हुआ, चौधरी चरण सिंह के साथ क्या हुआ, जय प्रकाश नारायण के साथ क्या हुआ, मोरारजी देसाई के साथ क्या हुआ, सरदार वल्लभ भाई पटेल के साथ क्या हुआ? 
  7. आंख में आंख डालने वालों को ठोकर मारकर बाहर कर दिया गया. आप तो नामदार है, मैं तो कामगार हूं. हम आपकी आंखों में आंख कैसे डाल सकते हैं.’’ आंखों का खेल पूरे देश ने देखा है. आंखों की बात करके ‘‘आंख की हरकत’’ पूरे देश ने देखी है. आंखों की बात करके सत्य को पूरी तरह से कुचला गया है.  
  8. मैं प्रार्थना करूंगा कि साल 2024 में आपको इतनी शक्ति दे कि आप फिर अविश्वास प्रस्ताव लाएं. मेरी आपको शुभकामनाएं’’ 
  9. उनका (राहुल) एक ही मकसद है कि ‘‘मैं ही प्रधानमंत्री बनूंगा’’. इसके लिए कम से कम अविश्वास प्रस्ताव का बहाना तो न बनाइए.  हम यहां इसलिए हैं कि हमारे पास संख्याबल है. हम यहां इसलिए हैं कि सवा सौ करोड़ देशवासियों का आशीर्वाद हमारे साथ है. अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए देश के मन पर, देशवासियों के आशीर्वाद पर कम से कम अविश्वास न करें.
  10. बिना तुष्टीकरण के, बिना वोट बैंक की राजनीति के हम ‘सबका साथ-सबका विकास’ के मंत्र के साथ राजनीति करते हैं. पिछले चार साल में उस वर्ग के लिए काम किया जिसके पास चमक धमक नहीं थी. अहंकार ही कहता है कि हम खड़े होंगे तो प्रधानमंत्री 15 मिनट तक खड़े नहीं हो पाएंगे. मैं खड़ा भी हूं और चार साल जो काम किये हैं, उस पर अड़ा भी हूं. 
  11. मैं सौदागर और ठेकेदार नहीं हूं. मैं गरीबों एवं युवाओं के सपनों के भागीदार हूं. कांग्रेस जब सत्ता में नहीं होती है तब अस्थिरता और अफवाह फैलाने का काम करती है.  30 साल के बाद पूर्ण बहुमत से बनी सरकार ने पिछले चार साल में जिस गति से काम किया है, उसके काम पर विश्वास जताएं. 
  12. अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान हमें अपनी बात करने का मौका तो मिल ही रहा है, साथ ही देश को देखने को मिल रहा है कि विपक्ष में कैसी नकारात्मकता है, विकास के प्रति कितनी नकारात्मक सोच है.  
  13. कभी तो लगता है कि आज उनके (विपक्षी दलों के) सारे भाषण, उनका व्यवहार अज्ञानवश नहीं है. यह झूठे आत्मविश्वास के कारण भी नहीं. अहंकार इस प्रकार की प्रवृत्ति के लिए खींच लाया. मोदी ने कहा कि विपक्ष को हमारे इतने सारे विकास कार्यों, योजनाओं पर विश्वास नहीं है. 
  14. राफेल सौदा दो जिम्मेदार सरकारों के बीच सौदा है, दो कारोबारी पार्टियों के बीच नहीं. देश की सुरक्षा के मुद्दे पर तो ‘‘यह बचकाना रवैया’’ नहीं अपनाएं.
  15. राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इतने संवेदनशील मुद्दे पर इस तरह की बात करना ठीक नहीं है. नामदार के आगे तो मैं इसके संबंध में प्रार्थना ही कर सकता हूं. 
  16. देश के सेनाध्यक्ष के बारे में बात की जाती है जो ठीक नहीं है. जो देश के लिये मर मिटने को तत्पर होते हैं, उनके बारे में इस तरह की बात करना ठीक नहीं है. 
  17. आप सर्जिकल स्ट्राइक को जुमला स्ट्राइक बता रहे हो. ‘‘ आपको अगर गाली देना है, तो मोदी तैयार है लेकिन देश के जवानों के पराक्रम पर प्रहार नहीं करें. सर्जिकल स्ट्राइक की तुलना जुमला स्ट्राइक से करना देश की सेना का अपमान है.’’ 
  18. हम यहां इसलिए हैं कि हमारे पास संख्याबल है.  हम यहां इसलिए हैं कि सवा सौ करोड़ देशवासियों का आशीर्वाद हमारे साथ है.
  19. सितंबर 2017 से मई 2018 तक नौ महीने में संगठित क्षेत्र में 50 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है. एक साल के लिये यह आंकडा जोड़ें तक यह संख्या 70 लाख होगी.
  20. संगठित और असंगठित क्षेत्र में एक साल में एक करोड़ लोगों से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है और यह एक स्वतंत्र एजेंसी का आंकड़ा है.
इनपुट : एजेंसी से भी
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