
शारदीय नवरात्रि में शक्ति की उपासना की जाती है और सात्विक साधना, नृत्य और उत्सव मनाया जाता है.
Navratri 2205 date : नवरात्रि का पर्व हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है. इसमें 9 दिन का उपवास रखा जाता है और मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा अर्चना की जाती है. आपको बता दें कि यह पर्व साल में 4 बार आता है, लेकिन लोगों की जानकारी में केवल शारदीय और चैत्र नवरात्रि है. जबकि 2 गुप्त नवरात्रि भी होती हैं. जी हां, ऐसे में आज के इस आर्टिकल में हम आपको चैत्र, गुप्त और शारदीय नवरात्रि में क्या अंतर है विस्तार से बताने जा रहे हैं.
इस बार चैत्र नवरात्रि 9 नहीं बल्कि होगी 8 दिन, इसके पीछे है बड़ी ज्योतिषिय वजह
चैत्र, गुप्त और शारदीय नवरात्रि में क्या है अंतर
चैत्र नवरात्रि
- हिन्दू धर्म में चैत्र नवरात्रि से नववर्ष की शुरूआत होती है. वहीं, चैत्र नवरात्रि के अंत में रामनवमी मनाई जाती है. ऐसी मान्यता है चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था. इसलिए हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को राम नवमी का पर्व मनाया जाता है.
- इसके अलावा चैत्र नवरात्रि में साधना और ध्यान का खास महत्व होता है.
- इस नवरात्रि में शक्ति और विष्णु दोनों की पूजा की जाती है. साथ ही चैत्र नवरात्रि से वसंत ऋतु का आगमन होता है.
- चैत्र नवरात्रि का व्रत आध्यात्मिक इच्छाओं की पूर्ति और सिद्धि के लिए किया जाता है.
शारदीय नवरात्रि
- शारदीय नवरात्रि साल के मध्य से शुरू होती है. इसके अलावा शारदीय नवरात्रि के अंत में दुर्गा महानवमी आती है और दूसरे दिन दशहरा या विजयादशमी मनाई जाती है. ऐसी मान्यता है कि दशहरा के दिन मां दुर्गा ने महिषाशुर का वध किया था जबकि भगवान राम ने रावण का. इसलिए यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए मनाया जाता है.
- शारदीय नवरात्रि में शक्ति की उपासना की जाती है और सात्विक साधना, नृत्य और उत्सव मनाया जाता है. यह पर्व सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है. वहीं, शारदीय नवरात्रि से सर्दियां शुरू हो जाती हैं. यह पर्व मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल और गुजरात में मनाया जाता है.
गुप्त नवरात्रि
- शारदीय और चैत्र नवरात्रि में जहां 9 देवियों की पूजा की जाती है वहीं इसमें दस देवियों की पूजा होती है. जिनके नाम इस प्रकार हैं- माता कालिका, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, माता भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, माता त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, माता बगलामुखी, माता मातंगी, माता कमला देवी हैं. यह सामान्य नवरात्रि से भिन्न है क्योंकि इसमें सार्वजनिक ध्यान और पूजा नहीं की जाती है. गुप्त नवरात्रि का तांत्रिक और अघोरी समुदाय में बहुत महत्व है. यह पूजा गुप्त विद्याओं की प्राप्ति के लिए की जाती है. साथ ही गुप्त नवरात्रि गृहस्थ लोगों को रखना निषेध है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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