Vrat Ke Kya Niyam Hote Hain: सनातन पंरपरा में देवी-देवताओं को प्रसन्न करने से लेकर अपनी कामनाओं को पूरा करने के लिए व्रत और उपवास आदि को उत्तम माध्यम बताया गया है. धार्मिक ग्रंथों में तमाम तरह के व्रतों की महिमा का गान करते हुए उसके पुण्यफल की प्राप्ति अलग-अलग प्रकार के नियम बताए गये हैं, जिनका पालन करने पर जहां पुण्य की प्राप्ति होती है तो वहीं उसकी अनदेखी करने पर न सिर्फ व्रत टूटता है बल्कि उसका दोष भी लगता है. किसी भी व्रत को सफल बनाने और ईश्वरीय कृपा पाने के लिए कुछेक सामान्य बातें हैं, जिसे हर व्रत करने वाले व्यक्ति को हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए.

व्रत और उपवास के नियम
- हिंदू मान्यता के अनुसार किसी भी व्रत को प्रारंभ करने से पहले साधक इस बात का संकल्प लेता है कि वह उसे तय अवधि तक नियम-संयम के साथ करेगा.
- व्रत को एक बार प्रारंभ करने के बाद उसे बीच में रोकना या फिर बंद नहीं करना चाहिए क्योंकि जानबूझ कर व्रत को अधूरा छोड़ने पर उसका बड़ा दोष लगता है.
- यदि गलती से कोई व्रत छूट जाए या फिर टूट जाए तो उसका पश्चाताप करते हुए उसकी संख्या को अगले व्रत के माध्यम से पूरा करना चाहिए और उस दिन व्रत के छूटने और टूटने के दोष को दूर करने के लिए देवी-देवता से संबंधित चीजों का दान करना चाहिए. हालांकि मान्यता यह भी है कि अगर कोई व्रत गलती से टूट जाए तो साधक को तीन दिन तक लगातार व्रत करते हुए फलाहार करना चाहिए.

- व्रत को किसी गुरु का आशीर्वाद लेकर शुभ दिन और शुभ मुहूर्त में प्रारंभ करना चाहिए ताकि वह निर्विघ्न रूप से पूरा हो सके.
- साधक को व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान और ध्यान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए. व्रत वाले दिन सूर्योदय के बाद तक सोना नहीं चाहिए. व्रत वाले दिन साधक को दिन में सोने की भी गलती नहीं करनी चाहिए.
- व्रत करने वाले व्यक्ति को तामसिक चीजों का भूलकर भी सेवन नहीं करना चाहिए और न ही व्रत वाले दिन काम, क्रोध और लोभ करना चाहिए. व्रत वाले दिन सात्विक आहार लेना चाहिए और पूरी तरह से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.
- यदि व्रत के दिन कोई स्त्री को पीरियड आ जाए या फिर परिवार में किसी की मृत्यु या जन्म हो जाने के कारण सूतक लग जाए तो उसे रोककर आगे दोबारा से उसे प्रारंभ करना चाहिए. यानि उस दिन किए जाने वाले व्रत दिवस संकल्प की संख्या में नहीं जोड़ना चाहिए.
- व्रत के पूर्ण होने पर उसका विधि-विधान से हवन और उद्यापन करना चाहिए तथा उस दिन अपने गुरु या फिर जो भी आपके बड़े-बुजुर्गों हों, उनका विशेष रूप से आशीर्वाद लेना चाहिए.
सप्ताह के सातों दिन रखे जाते हैं व्रत

हिंदू धर्म में प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी या देवता या फिर ग्रह विशेष के लिए समर्पित होता है. जैसे रविवार का दिन सूर्य देवता और भगवान भैरव के लिए, सोमवार का दिन भगवान शिव और चंद्र देवता, मंगलवार का दिन हनुमान जी और मंगल देवता, बुधवार का दिन गणेश जी और बुध ग्रह, गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति ग्रह, शुक्रवार का दिन देवी दुर्गा और शुक्र ग्रह, शनिवार का दिन शनि देवता के लिए समर्पित है.
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हिंदू धर्म से जुड़े लोग अपनी-अपनी आस्था, विश्वास और मनोकामना के अनुसार व्रत के लिए सप्ताह के सात दिनों में से कोई एक दिन चुनते हैं. कुछ लोग सप्ताह में एक से ज्यादा भी व्रत रखते हैं. रविवार के व्रत से उच्च पद और प्रतिष्ठा, सोमवार के व्रत से सुख-सौभाग्य, मंगलवार के व्रत से बल और पराक्रम, बुधवार के व्रत से बुद्धि और चातुर्य तथा गुरुवार के व्रत से गुडलक, शुक्रवार के व्रत से सौंदर्य और सुख-साधन, शनिवार के व्रत से कारोबार में कुशलता बढ़ती है.
व्रत रखने के क्या लाभ होते हैं?
हिंदू धर्म में व्रत न सिर्फ तन और मन को शुद्ध करते हुए ईश्वर की कृपा दिलाने का माध्यम बनता है, बल्कि यह आपकी अंत:करण की भी शुद्धि करता है. हिंदू मान्यता के अनुसार देवी-देवताओं से जुड़े व्रत को करने से व्यक्ति की संकल्पशक्ति मजबूत होती है. व्रत जहां पाप से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति का माध्यम बनता है, वहीं इसके प्रभाव से व्यक्ति के भीतर सकारात्मकता बढ़ती है. व्रत के पुण्य प्रताप से व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है और वह तमाम तरह के विकारों से मुक्त होता है. व्रत व्यक्ति के मनोबल और आत्मबल को बढ़ाने का जरिया बनता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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