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Varada Chaturthi 2026: आर्थिक तंगी से छुटकारा दिला सकता है गणेश जी का यह स्तोत्र, वरदा विनायक चतुर्थी पर जरूर करें पाठ

Varada Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय देवता माना जाता है. किसी भी शुभ काम की शुरुआत गणेश जी की आराधना से की जाती है. आज का दिन गणेश पूजा के लिए विशेष रूप से खास है. आज यानी 20 मई 2026, बुधवार को वरदा विनायक चतुर्थी का विशेष संयोग बना है.

Varada Chaturthi 2026: आर्थिक तंगी से छुटकारा दिला सकता है गणेश जी का यह स्तोत्र, वरदा विनायक चतुर्थी पर जरूर करें पाठ
Varada Chaturthi 2026: कर्जमुक्ति के लिए करें इस स्तोत्र का पाठ

Varada Chaturthi 2026: आज यानी 20 मई 2026 को वरदा विनायक चतुर्थी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है. वरदा विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के विघ्न दूर होते हैं, व्यक्ति को मानसिक शांति, सफलता और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. इस बार बुधवार का दिन होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि बुधवार भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है.

ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा

  • वरदा विनायक चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और घर के पूजा स्थल की साफ-सफाई करें. 
  • इसके बाद लाल या पीले कपड़े पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें. 
  • पूजा में दूर्वा, लाल फूल, मोदक, केला और गुड़-चना अर्पित करें.
  • घी का दीपक जलाकर भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें. 
  • भगवान गणेश की कथा पढ़ें और आखिर में आरती गाएं.
  • दिनभर व्रत रखने वाले श्रद्धालु शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का समापन कर सकते हैं. 
कर्जमुक्ति के लिए करें इस स्तोत्र का पाठ 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वरदा विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के ऋणमुक्ति स्तोत्र का पाठ भी विशेष फलदायी माना जाता है. कहा जाता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और धन संबंधी बाधाओं से राहत मिलती है. ऐसे में आज वरदा विनायक चतुर्थी पर आप ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं. 

॥ विनियोग ॥

ॐ अस्य श्रीऋणविमोचनमहागणपति-स्तोत्रमन्त्रस्य
शुक्राचार्य ऋषिः ऋणविमोचनमहागणपतिर्देवता
अनुष्टुप् छन्दः ऋणविमोचनमहागणपतिप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः।

॥ स्तोत्र पाठ ॥

ॐ स्मरामि देवदेवेशंवक्रतुण्डं महाबलम्।

षडक्षरं कृपासिन्धुंनमामि ऋणमुक्तये॥

महागणपतिं वन्देमहासेतुं महाबलम्।

एकमेवाद्वितीयं तुनमामि ऋणमुक्तये॥

एकाक्षरं त्वेकदन्तमेकंब्रह्म सनातनम्।

महाविघ्नहरं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥

शुक्लाम्बरं शुक्लवर्णंशुक्लगन्धानुलेपनम्।

सर्वशुक्लमयं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥

रक्ताम्बरं रक्तवर्णंरक्तगन्धानुलेपनम्।

रक्तपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥

कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णंकृष्णगन्धानुलेपनम्।

कृष्णयज्ञोपवीतं चनमामि ऋणमुक्तये॥

पीताम्बरं पीतवर्णपीतगन्धानुलेपनम्।

पीतपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥

सर्वात्मकं सर्ववर्णंसर्वगन्धानुलेपनम्।

सर्वपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥

एतद् ऋणहरं स्तोत्रंत्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।

षण्मासाभ्यन्तरे तस्यऋणच्छेदो न संशयः॥

सहस्रदशकं कृत्वाऋणमुक्तो धनी भवेत्॥

॥ इति रुद्रयामले ऋणमुक्ति श्री गणेशस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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