Hanuman ji puja : उत्तराखंड को देव भूमि कहते हैं. बड़े-बड़े ऋषि महर्षियों ने यहां की पहाड़ियों और जंगलों में तप और यज्ञ किए हैं. यहां तक की हिन्दू धर्म की चार धाम भी उत्तराखंड की ही धरती पर हैं. जहां हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं. बता दें कि देव भूमि पर कदम-कदम पर आपको देवी-देवताओं के छोटे से लेकर बड़े मंदिर देखने को मिल जाएंगे, जिनका इतिहास बेहद रोचक है. ऐसे में देव भूमि में एक गांव ऐसा भी है, जहां हनुमान जी की पूजा नहीं होती, यहां तक कि लोग उनका नाम लेना भी नहीं पसंद करते. जी हां, आपने सही पढ़ा. आज हम उसी गांव के बारे में बात करेंगे और वजह जानेंगे आखिर हनुमान जी से यहां के लोग क्यों नाराज हैं...?
-
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
रुपये की गिरती कीमत पर RBI गवर्नर का बड़ा बयान, कोई फिक्स लेवल नहीं, जानिए क्या है रिजर्व बैंक का एक्शन प्लान -
टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग अनिवार्य? RBI गवर्नर ने NDTV समिट में बताया ये क्यों है जरूरी -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?
Baba Venga ने की भविष्यवाणी, 2025 इन 5 राशियों के लिए साबित होगा लकी! इनमें कहीं आपकी राशि तो नहीं
द्रोणागिरी गांव में नहीं होती बजरंगबली की पूजा
उत्तराखंड के चमोली जिले में पहाड़ी के बीच बसा गांव द्रोणागिरी में हनुमान जी की पूजा यहां के लोग नहीं करते हैं. यह परंपरा सदियों से चली आ रही है.
दरअसल, रामायण के दौरान जब रावण के पुत्र मेघनाद ने ब्रह्म अस्त्र बाण का प्रयोग कर लक्ष्मण जी को मूर्छित कर दिया था. तब मर्यादा पुरषोत्तम श्रीराम का रो-रोकर बुरा हाल हो जाता है. ऐसे में विभीषण के कहने पर हनुमान जी लंका से सुसैन वैद्य को लेकर लाते हैं, जो कि लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी लाने की बात कहते हैं. जिसके बाद अंजनी पुत्र रात्रि में ही संजीवनी बूटी लाने के लिए निकल पड़ते हैं. यह बूटी द्रोणागिरी में होती है. लेकिन वहां जाने के बाद हनुमान जी को संजीवनी बूटी की पहचान नहीं होती है, तब वह पूरा पर्वत ही उठा लाते हैं.
यहां के लोगों का कहना है कि संजीवनी बूटी हनुमान जी ने बिना ग्राम देवी की अनुमति के पहाड़ का टुकड़ा लेकर चले गए थे जिससे गांव वाले बहुत नाराज हो गए और उनसे सारे नाते तोड़ लिए.
भगवान राम की होती है पूजा
हालांकि रामनवमी के दौरान द्रोणागिरी गांव में भगवान राम की पूजा पूरे श्रद्धा भाव के साथ की जाती है, लेकिन हनुमान जी का नाम तक लेना लोग पसंद नहीं करते हैं.
जून माह में होता द्रोणागिरी उत्सव
आपको बता दें कि यहां के लोग द्रोणागिरी को देवता की तरह पूजते हैं. हर साल जून माह में द्रोणागिरी पर्वत की विशेष पूजा अर्चना करते हैं. इस उत्सव में शामिल होने के लिए दूर-दूर से आते हैं.
कैसे पहुंचे द्रोणागिरी
आप सबसे पहले हरिद्वार, देहरादून या ऋषिकेश पहुंचे फिर वहां से आप जोशीमठ के लिए बस या टैक्सी कर सकते हैं. फिर आप जुम्मा गांव तक जाने के लिए टैक्सी या जीप ले लीजिए. इसके बाद वहां से आप 8 किलो मीटर की ट्रैकिंग करके द्रोणागिरी गांव तक पहुंच सकते हैं.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं