Somnath Amrit Mahotsav kumbhabhishekam Significance: सोमनाथ को 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंग में पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है, जो कि गुजरात के गिर में स्थित है. आज सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने पर वहां पर भव्य रूप में ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव' मनाया जा रहा है. लाखों-करोड़ों शिव भक्तों से जुड़े इस पावन धाम पर पूजा करने के लिए स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पंहुचे हैं। सोमनाथ अमृत महोत्सव की सबसे खास बात यहां पर किया जाने वाला कुंभाभिषेक है, जो यहां पर पहली बार किया गया. सोमनाथ मंदिर में की जाने वाली पूजा के इतिहास में यह पहली बार है जब यहां 90 मीटर ऊंचे शिखर पर पवित्र कुंभाभिषेक किया गया.
क्यों किया जाता है कुंभाभिषेक?
हिंदू मान्यता के अनुसार कुंभाभिषेक अनुष्ठान कुंभाभिषेकम् की पूजा अमूमन हर 10 से 12 वर्ष में किसी देवालय या फिर कहें तीर्थ स्थान की शुद्धिकरण के लिए की जाती है. इसके जरिए किसी भी पावन तीर्थ या देवालय की पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा को पुनर्जीवित किया जाता है. इसे शुभ मुहूर्त में विशेष पूजा, यज्ञ और मंत्रोच्चार किया जाता है. इसका समापन मंदिर के शिखर पर कुंभ के पवित्र जल डालने के साथ होता है. इसे सुखद संयोग ही कहा जाएगा कि आज 11 मई को सोमनाथ मंदिर में किए जाने वाले कुंभाभिषेक के लिए 11 तीर्थों का जल प्रयोग किया गया है.
सोमनाथ मंदिर का आकार ही नहीं नाम भी बदला है

मुगल आक्रांताओं द्वारा सोमनाथ मंदिर को बार-बार तोड़े जाने और उसके बाद पुननिर्माण होने पर न सिर्फ उसका आकार बल्कि उसका नाम भी बदला है. पौराणिक मान्यता के अनुसार जिस पावन ज्योतिर्लिंग को हम सोमनाथ के नाम से पूजते हैं वह सृष्टि के बदलते ही प्राणनाथ के नाम से पूजा जाएगा. इस पावन ज्योतिर्लिंग को अब तक मृत्युंजय, कालाग्निरुद्र, अमृतेश, अनामय, कृत्तिवास और भैरवनाथ नाम से पूजा जा चुका है.
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व

हिंदू धर्म में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. मान्यता है कि यहां पर स्थित शिवलिंग की पूजा एवं रुद्राभिषेक करने पर व्यक्ति के सभी पाप और दोष दूर हो जाते हैं और उस पर हमेशा शिवकृपा बरसती है. शिव के इस प्रथम ज्योतिर्लिंग का संबंध चंद्र देवता से है. ऐसे में जिन लोगों की कुंडली में चंद्र दोष होता है, उनके लिए सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का दर्शन और पूजन अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना गया है.
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