Surya Grahan: साल 2026 में एक सूर्य और एक चंद्र ग्रहण लग चुके हैं और 2 अभी बाकी हैं. सूर्य ग्रहण 2026 और चंद्र ग्रहण 2026 दोनों ही बेहद खास है. यही कारण है कि खगोलीय घटनाओं के लिहाज से 2026 बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन 2027 बहुत खास माना जा रहा है. क्योंकि सूर्य ग्रहण 2027 अपनी लंबी अवधि के कारण खास बेहद चर्चा में है और इसे सदी का ग्रहण कहा जा रहा है. वैज्ञानिकों के अनुसार, 21वीं सदी में इतना लंबा सूर्य ग्रहण बहुत कम देखने को मिलता है. 2027 सूर्य ग्रहण का पूरी दुनिया इंतजार कर रही है. चलिए आपको बताते है 2026 सूर्य ग्रहण के साथ-साथ 2027 का सूर्य ग्रहण अभी से क्यों चर्चा में बना हुआ है और क्यों खास है?
2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण कब है? (Second Surya Grahan 2026)
2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त, बुधवार को दिखाई देगा. ग्रहण का समय आपकी जगह के अनुसार अलग‑अलग हो सकता है. 12 अगस्त, 2026 का यह सूर्य ग्रहण कई घंटों तक चलेगा, लेकिन पूरा अंधकार यानी पूर्ण ग्रहण केवल कुछ ही मिनटों के लिए दिखाई देगा, वो भी केवल उन जगहों पर जहां यह नजर आएगा. 2026 में लगने वाला प्रमुख सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात से शुरू होकर 13 अगस्त की सुबह तक रहेगा, लेकिन भारत में यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, क्योंकि उस समय भारत में रात होगी. इसलिए, धार्मिक रूप से सूतक के नियम लागू नहीं होंगे. यह मुख्य रूप से रूस, आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा.
सूर्य ग्रहण 2027 (Surya Grahan 2027)
2027 में लगने वाला सूर्य ग्रहण बहुत खास माना जा रहा है. 2 अगस्त, 2027 को लगने वाला सूर्य ग्रहण इस सदी की सबसे दुर्लभ खगोलीय घटनाओं में से एक माना जा रहा है. इस दिन चंद्रमा लगभग 6 मिनट 22 सेकंड तक सूर्य को पूरी तरह ढक लेगा, जिससे दिन में ही अंधेरा छा जाएगा. वैज्ञानिकों के अनुसार, 21वीं सदी में इतना लंबा सूर्य ग्रहण बहुत कम देखने को मिलता है.
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2027 के सूर्य ग्रहण की खासियतइस ग्रहण की पूर्णता (Totality) लगभग 6 मिनट 23 सेकंड तक रहेगी. आमतौर पर पूर्ण सूर्य ग्रहण केवल 2-3 मिनट का ही होता है, लेकिन इस बार चंद्रमा सूर्य को बहुत लंबे समय तक पूरी तरह ढक लेगा. ग्रहण के दौरान चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य एक सीधी रेखा में होंगे, जिससे कई क्षेत्रों में दिन में ही रात जैसा अंधेरा छा जाएगा. यह 21वीं सदी का अब तक का सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह 1991 के बाद से जमीन से दिखाई देने वाला सबसे लंबा ग्रहण है और अगले कई दशकों तक इतनी लंबी अवधि का ग्रहण फिर नहीं दिखेगा. यह पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के देशों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा. भारत में यह केवल एक आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse) के रूप में दिखेगा.
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