Hindu Bathing Rituals: हिंदू धर्म में स्नान का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. तन और मन की शुद्धि के लिए इसे शास्त्रों में एक अनिवार्य कार्य बताया गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति शुद्ध जल से स्नान किए बगैर धर्म-कर्म करता है, वह निष्फल जाता है. बगैर स्नान किए गये धार्मिक कार्य का पुण्यफल राक्षस ग्रहण कर लेते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि स्नान से पहले और बाद में क्या नहीं करना चाहिए? आइए हिंदू धर्म में स्नान को लेकर बताए गये नियमों को विस्तार से जानते हैं.
स्नान का सही समय
मुनि स्नान : भोर में यानि प्रात:काल 4 से 5 बजे के बीच परमपिता परमेश्वर का चिंतन-मनन करते हुए जो स्नान किया जाता है, उसे ब्रह्म स्नान कहा जाता है.
देव स्नान : हिंदू मान्यता के अनुसार प्रात:काल 5 से 6 बजे के बीच विभिन्न पवित्र जल तीर्थ का ध्यान या फिर उनके मंत्र का जप करते हुए स्नान किया जाता है तो वह देव स्नान कहलाता है.

मानव स्नान: यह सामान्य स्नान है जो अक्सर प्रात:काल 6 से 8 बजे के बीच किया जाता है.
राक्षसी/दानव स्नान : हिंदू मान्यता के अनुसार सूर्योदय के दो घंटे बाद जब व्यक्ति खाने-पीने के बाद स्नान करता है तो वह राक्षसी या दानव स्नान कहलाता है.
स्नान का सही तरीका
- हिंदू मान्यता के अनुसार स्नान करने से पहले जल में कुछ न कुछ चीज जरूर मिलाना चाहिए. जैसे हल्दी, रोली, चंदन, गुलाब जल, गंगाजल इत्यादि.
- स्नान के समय हमेशा अपना मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिए.
- हिंदू मान्यता के अनुसार कभी भी खड़े होकर स्नान नहीं करना चाहिए और न ही कभी सिर पर सीधे ठंडा पानी डालना चाहिए. नहाते समय हमेशा पहले पैर में फिर पिंडलियों में फिर कमर और कंधे से होते हुए सिर पर पानी डालें.

- हिंदू मान्यता के अनुसार कभी भी पूर्ण रूप से नग्न होकर स्नान नहीं करना चाहिए. मान्यता है कि निर्वस्त्र होकर स्नान से पितृदोष लगता है. साथ ही साथ इससे वरुण देवता का अपमान भी होता है.
- हिंदू मान्यता के अनुसार गंगा जैसी पवित्र नदी या फिर किसी पवित्र सरोवर में बगैर स्नान किए हुए नहाने के लिए न जाएं क्योंकि इन नदियों को देवी माना गया है. इसी प्रकार गंगा स्नान करते समय उसमें कुल्ला न करें और न ही उसमें कपड़े धोएं.
- स्नान करते समय नीचे दिये गये मंत्र का हमेशा मन में या फिर बोलकर जप करना चाहिए.
- 'गंगा च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती, नर्मदे सिंधु कावेरी जलेस्मिन संनिधिम कुरु.'
तब जरूर करना चाहिए स्नान

हिंदू मान्यता के अनुसार किसी भी देवी या देवता की पूजा अथवा धार्मिक-मांगलिक कार्य को करने से पहले स्नान बेहद जरूरी होता है क्योंकि देवतागण बगैर स्नान के की गई पूजा को स्वीकार नहीं करते हैं. इसी प्रकार किसी भी देवालय में प्रवेश करने, यज्ञ एवं हवन करने, भोजन पकाने और खाना खाने से पहले स्नान करना अत्यंत ही जरूरी माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार शादी-विवाह, तिलक, मुंडन, नामकरण, उपनयन आदि मांगलिक कार्यों से पहले स्नान करना बहुत जरूरी माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार चंद्रग्रहण या सूर्यग्रहण के समाप्त होने के बाद स्नान जरूर करना चाहिए. इसी प्रकार बुरा सपना देखने, स्त्रीसंग करने, उल्टी होने के बाद, हजामत बनवाने के बाद या फिर श्मसान भूमि से आने के बाद व्यक्ति को स्नान जरूर करना चाहिए.
भूलकर भी न करें ये काम
- हिंदू मान्यता के अनुसार भोजन के तुरंत बाद स्नान नहीं करना चाहिए.
- स्नान करने के बाद हमेशा स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए. कभी भूलकर भी गंदे कपड़े दोबारा न पहनें.
- स्नान किए बगैर किचन या मंदिर आदि में प्रवेश न करें और न ही देवी-देवताओं की मूर्ति-चित्र और तुलसी आदि पवित्र पौधों को स्पर्श करें.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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