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Shaniwar ke Upay: शनिवार को करें इस स्तोत्र का पाठ, दूर होंगे साढ़ेसाती-ढैय्या के अशुभ प्रभाव

शनिवार को शनिदेव की पूजा के साथ-साथ दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से साढ़ेसाती और ढैय्या का अशुभ प्रभाव दूर होता है.

Shaniwar ke Upay: शनिवार को करें इस स्तोत्र का पाठ, दूर होंगे साढ़ेसाती-ढैय्या के अशुभ प्रभाव
शनिदेव के उपाय
Photo Credit: NDTV

हिन्दू धर्म में शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित माना जाता है. इस दिन शनिदेव की पूजा करने से कष्ट, भय और शत्रुओं से छुटकारा मिलता है. साथ ही सुख-शांति भी बनी रहती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार को शनिदेव की पूजा के साथ-साथ दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है. माना जाता है कि इस पाठ को साढ़ेसाती और ढैय्या से गुजर रहे लोगों को करना चाहिए, क्योंकि इससे अशुभ प्रभाव कम होने लगते हैं और शनिदेव अपनी कृपा बनाए रखते हैं. यहां पढ़ें दशरथकृत शनि स्तोत्र...

दशरथकृत शनि स्तोत्र | Dashrath krit shani stotra

नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठ निभाय च।
नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम:।।

नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च।
नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते।।

नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम:।
नमो दीर्घाय शुष्काय कालदंष्ट्र नमोऽस्तु ते।।

नमस्ते कोटराक्षाय दुर्नरीक्ष्याय वै नम:।
नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने।।

नमस्ते सर्वभक्षाय बलीमुख नमोऽस्तु ते।
सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करेऽभयदाय च।।

अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तु ते।
नमो मन्दगते तुभ्यं निस्त्रिंशाय नमोऽस्तुते।।

तपसा दग्ध-देहाय नित्यं योगरताय च।
नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम:।।

ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज-सूनवे।
तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्।।

देवासुरमनुष्याश्च सिद्ध-विद्याधरोरगा:।
त्वया विलोकिता: सर्वे नाशं यान्ति समूलत:।।

प्रसाद कुरु मे सौरे वारदो भव भास्करे।
एवं स्तुतस्तदा सौरिर्ग्रहराजो महाबल:।।

इस मंत्र का भी करें जाप

  • ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।
  • ॐ शं शनैश्चराय नमः
  • ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
  • ॐ शन्नो देविर्भिष्ठयः आपो भवन्तु पीतये। सय्योंरभीस्रवन्तुनः।।

शनि देव की आरती

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी।।
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।

श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुज धारी। नीलांबर धार नाथ गज की आसवारी।।
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।

क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी। मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी।।
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।

मोदक मिष्टान पान चढ़त है सुपारी। लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी।।
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।

देव दनुज ऋषि मुनि सुमरित हर नारी। विश्वनाथ धरत ध्यान शरण है तुम्हारी।।
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।

जय शनि देव महाराज की।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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