आज 19 सितंबर को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है. ऐसे में भक्त श्री जी की भक्ति में लीन है. हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन राधा रानी का जन्म हुआ था. राधा अष्टमी के दिन भक्त विधि-विधान के साथ राधा रानी की पूजा-अर्चना करते हैं और उनके नाम का उपवास रखते हैं. वहीं, पूजा का समापन आरती के साथ किया जाता है. ऐसे में अगर आप भी आज राधा अष्टमी की पूजा करने वाले हैं, तो पूजा के बाद यहां से पढ़कर राधा रानी की आरती गा सकते हैं-
राधा रानी की आरती
आरती राधाजी की कीजै
कृष्ण संग जो कर निवासा, कृष्ण करे जिन पर विश्वासा
आरती वृषभानु लली की कीजै। आरती राधाजी की कीजै।
कृष्णचन्द्र की करी सहाई, मुंह में आनि रूप दिखाई
उस शक्ति की आरती कीजै। आरती राधाजी की कीजै।
नंद पुत्र से प्रीति बढ़ाई, यमुना तट पर रास रचाई
आरती रास रसाई की कीजै। आरती राधाजी की कीजै।
प्रेम राह जिनसे बतलाई, निर्गुण भक्ति नहीं अपनाई
आरती राधाजी की कीजै। आरती राधाजी की कीजै।
दुनिया की जो रक्षा करती, भक्तजनों के दुख सब हरती
आरती दुःख हरणीजी की कीजै। आरती राधाजी की कीजै।
दुनिया की जो जननी कहावे, निज पुत्रों की धीर बंधावे
आरती जगत माता की कीजै। आरती राधाजी की कीजै।
निज पुत्रों के काज संवारे, रनवीरा के कष्ट निवारे
आरती विश्वमाता की कीजै। आरती राधाजी की कीजै।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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