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Saraswati Puja: सप्ताह में किस दिन की जाती है मां सरस्वती की पूजा? जानें संपूर्ण विधि और महाउपाय

Saraswati Puja Tips: सनातन परंपरा में मां सरस्वती को ज्ञान, विद्या, वाणी और कला की देवी के रूप में पूजा जाता है. वीणावादिनी कहलाने वाली मां सरस्वती की पूजा आखिर सप्ताह के किस दिन करना ज्यादा शुभ और फलदायी होता है, जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख

Saraswati Puja: सप्ताह में किस दिन की जाती है मां सरस्वती की पूजा? जानें संपूर्ण विधि और महाउपाय
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Saraswati Puja Kis Var Ko Karen: हिंदू धर्म में मां सरस्वती की साधना साधक को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाती है. हंसवाहिनी और वीणाधारिणी के नाम से पूजी जाने वाली माता सरस्वती (Maa Saraswati) के आशीर्वाद से साधक की स्मरण शक्ति तेज होती है और वह अपने विवेक और ज्ञान का प्रयोग करते हुए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मनचाही सफलता प्राप्त करता है. यदि आप चाहते हैं कि मां सरस्वती का आशीर्वाद आप पर या फिर आपकी संतान पर हमेशा बना रहे तो आपको उनकी पूजा के लिए शुभ दिन से लेकर सामग्री और मंत्र आदि के बारे में विस्तार से जरूर जानना चाहिए. 

मां सरस्वती की पूजा किस दिन करना चाहिए?

श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत (Sanskrit) विश्वविद्यालय के पौरोहित विभाग के प्रोफेसर रामराज उपाध्याय के अनुसार विद्या की देवी मां सरस्वती की साधना आप किसी भी दिन या फिर कहें प्रतिदिन कर सकते हैं, लेकिन श्वेत वस्त्र धारण करने वाली श्वेतहंसवाहिनी देवी सरस्वती की साधना और आराधना के लिए सबसे उत्तम दिन शुक्रवार का दिन है. हालांकि बहुत से लोग सरस्वती पूजा के लिए गुरुवार का दिन शुभ मानते हैं क्योंकि देवगुरु बृहस्पति ज्ञान के प्रतीक माने जाते हैं.

प्रोफेसर उपाध्याय के अनुसार हिंदू मान्यता के अनुसार गुरुवार और शुक्रवार दोनों ही दिन शुभ दिन में आते हैं, इसलिए इन दोनों ही दिनों में यदि कोई अपनी मान्यता या लोक परंपरा के अनुसार देवी सरस्वती की साधना करता है तो निश्चित रूप से उसका पुण्यफल और विद्या की देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है. 

मां सरस्वती की पूजा कैसे करनी चाहिए?

विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा करने के लिए साधक को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए. इसके बाद पीले या सफेद वस्त्र पहनकर माता के चित्र या मूर्ति पर शुद्ध जल छिड़कना चाहिए. अगर आप यह पूजा घर पर कर रहे हैं तो उनके सामने वाद्य यंत्र और कापी-किताब भी रखकर उसकी पूजा रोली, चंदन, धूप, दीप, पुष्प, वस्त्र आदि अर्पित करते हुए करें.

हिंदू मान्यता के अनुसार मां सरस्वती को पूजा के दौरान केसर का तिलक अवश्य लगाएं. विधि-विधान से पूजन करने के बाद मां सरस्वती की प्रार्थना, चालीसा और स्तोत्र श्रद्धा और विश्वास के साथ पाठ करें. हिंदू मान्यता के अनुसार परीक्षा-प्रतियोगिता की तैयारी में जुटे छात्रों को देवी सरस्वती की कृपा पाने के लिए मां सरस्वती की पूजा के साथ अपनी कॉपी-किताब, पेन, लैपटॉप आदि की पूजा भी करनी चाहिए. 

मां सरस्वती की पूजा का मंत्र

सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि,
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा.

सरस्वती महाभागे विद्ये कमललोचने,
विद्यारूपे विशालाक्षी विद्यां देहि नमोस्तुते.

मां सरस्वती का जप मंत्र 

मां सरस्वती को शीघ्र प्रसन्न करने के लिए साधक को पूजा में प्रतिदिन 'ॐ ह्रीं सरस्वत्यै नमः' मंत्र का अधिक से अधिक जप करना चाहिए. मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ जपे गये इस मंत्र के शुभ प्रभाव से मां सरस्वती जल्द ही अपनी कृपा बरसाती हैं. 

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मां सरस्वती की प्रार्थना 

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता.
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना.
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता.
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

लेखक के बारे में
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मधुकर मिश्र
Consulting Editor
प्रिंट, इलेक्‍ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में बीते दो दशक से ज्‍यादा धर्म-अध्‍यात्‍म की पत्रकारिता करते हुए देश के चारों कुंभ की कवरेज का अनुभव. संत, सत्... और पढ़ें
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