हिंदू धर्म में प्रत्येक चतुर्थी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. यह तिथि भगवान गणेश की पूजा और व्रत के लिए समर्पित होती है. मान्यता है कि चतुर्थी के दिन गणपति बप्पा की श्रद्धापूर्वक आराधना करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. जून माह में पड़ने वाली चतुर्थी को प्रद्युम्न चतुर्थी के नाम से जाना जाता है. 'प्रद्युम्न' का अर्थ अत्यंत तेजस्वी और ऊर्जा से भरपूर होता है. माना जाता है कि इस दिन भगवान गणेश की आराधना करने से व्यक्ति के अंदर सकारात्मक सोच बढ़ती है और क्रोध, भ्रम तथा नकारात्मक भावनाओं पर नियंत्रण पाने की शक्ति मिलती है. हालांकि, इस बार प्रद्युम्न चतुर्थी की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में आइए जानते हैं प्रद्युम्न चतुर्थी 2026 की सही तिथि क्या है, साथ ही जानेंगे पूजा का शुभ समय क्या रहेगा.
कब है प्रद्युम्न चतुर्थी 2026?
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष प्रद्युम्न चतुर्थी तिथि का आरंभ 17 जून की रात 9 बजकर 38 मिनट से होगा. इसका समापन 18 जून की शाम 6 बजकर 58 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए प्रद्युम्न चतुर्थी का व्रत 18 जून, गुरुवार को रखा जाएगा.
पूजा के प्रमुख शुभ मुहूर्त- प्रद्युम्न चतुर्थी पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:03 बजे से 4:43 बजे तक रहेगा.
- मध्याह्न पूजा मुहूर्त सुबह 10:58 बजे से दोपहर 1:46 बजे तक रहेगा.
- विजय मुहूर्त दोपहर 2:42 बजे से 2:38 बजे तक रहेगा.
- गोधूलि मुहूर्त शाम 7:20 बजे से 7:40 बजे तक रहेगा.
- निशिता मुहूर्त रात 12:02 बजे से 12:42 बजे तक रहेगा.
- सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 5:23 बजे से 11:32 बजे तक रहेगा और
- गुरु पुष्य योग सुबह 5:23 बजे से 11:32 बजे तक रहेगा.
- प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें.
- इसके बाद मंदिर में लाल या पीला व्रत बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और दीपक जलाएं.
- भगवान गणेश को लाल चंदन का तिलक लगाएं, अक्षत अर्पित करें और उनकी प्रिय दूर्वा जरूर चढ़ाएं.
- इसके बाद मोदक, लड्डू या अन्य मिठाइयों का भोग लगाएं.
- पूजा के दौरान श्रद्धापूर्वक 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें और व्रत कथा का पाठ करें.
- अंत में कपूर या दीपक से गणेश जी की आरती उतारें और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करें.
धार्मिक विश्वास है कि प्रद्युम्न चतुर्थी पर विधि-विधान से पूजा करने वाले भक्तों पर भगवान गणेश की विशेष कृपा बनी रहती है. इससे जीवन के विघ्न दूर होते हैं, मानसिक शांति प्राप्त होती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का आगमन होता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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