26 साल बाद आज पुरी जगन्नाथ मंदिर में होगा ‘नागार्जुन बेशा’ अनुष्ठान

ओडिशा के पुरी जगन्नाथ मंदिर में आज भगवान जगन्नाथ और भाई-बहनों का ‘नागार्जुन बेशा’ होगा. यह अनुष्ठान 26 वर्षों के बाद हो रहा है और कोविड-19 महामारी के कारण यह समारोह केवल सेवक और मंदिर के अधिकारियों की उपस्थिति में किया जाएगा.

26 साल बाद आज पुरी जगन्नाथ मंदिर में होगा ‘नागार्जुन बेशा’ अनुष्ठान

26 साल बाद आज पुरी जगन्नाथ मंदिर में होगा ‘नागार्जुन बेशा’ अनुष्ठान

ओडिशा :

ओडिशा के पुरी जगन्नाथ मंदिर (Puri Jagannath Temple) में आज भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) और भाई-बहनों का ‘नागार्जुन बेशा' (Nagarjuna Besha) होगा. यह अनुष्ठान 26 वर्षों के बाद हो रहा है और कोविड-19 (Covid-19) महामारी के कारण यह समारोह केवल सेवक और मंदिर के अधिकारियों की उपस्थिति में किया जाएगा. इस अवसर पर देवताओं को योद्धाओं की तरह तैयार किया जाता है. यह अनुष्ठान इससे पहले वर्ष 1994 में आयोजित किया गया था.'नागार्जुन बेशा' की तैयारियों की शुरुआत करने के लिए 'बेशा अनुकुला' समारोह सोमवार को पुरी श्रीमंदिर में आयोजित किया गया.

भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन के लिए गहने और कपड़े डिजाइन करने का जिम्मा तैयार करने वाले सर्वसिटर कारीगर बालाराम खूंटिया ने कहा, यह पहला मौका है जब मैं नागार्जुन बेशा के लिए पोशाक डिजाइन कर रहा हूं. मैं बहुत छोटा था पिछली बार बेशा 1994 में मनाया गया था और इसलिए पोशाक डिजाइन नहीं कर सका. उनका परिवार लंबी अवधि से यह सेवा प्रदान कर रहा है. अब उनके पास भगवान के इस दुर्लभ बेशा की तैयारी शुरू करने के लिए अंग्यामला (दिव्य मंजूरी) के अधिकार हैं.

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बता दें कि नागार्जुन बेशा भगवान विष्णु के क्षत्रिय अवतार परशुराम द्वारा सहस्त्रार्जुन की हत्या के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. इसलिए इस अवसर पर देवता नागा योद्धा के रूप में तैयार होते हैं, जो तीर, धनुष, हाला (हल), हेलमेट, चक्र (पहिया) और मुसला (गदा) सहित स्वर्ण अस्त्रों से परिपूर्ण होते हैं. यह त्योहार कार्तिक के हिंदू महीने के दौरान कभी-कभी मनाया जाता है जब पंचुका (कार्तिक महीने के आखिरी पांच दिन) को छह दिनों के रूप में मनाया जाता है. इस वर्ष, अश्विन (प्रवेश मास) के बाद एक अतिरिक्त महीने के कारण, पवित्र त्रिमूर्ति का विशेष पर्व 27 नवंबर को पंचुका के छठे दिन आयोजित किया जा रहा है.

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