आज सावन का पहला मंगला गौरी व्रत रखा जा रहा है. ये व्रत सावन के हर मंगलवार को रखा जाता है. इस दिन मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा करने का विधान है. ये व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखती हैं. साथ ही ये व्रत मां पार्वती को समर्पित माना जाता है और उनके आशीर्वाद से सौभाग्य की प्राप्ति होती है. इसी कड़ी में आज हम आपको पहले मंगला गौरी व्रत का पूजा मुहूर्त, विधि और महत्व बताने जा रहे हैं.
मंगला गौरी व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त
आज मंगला गौरी व्रत पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:20 बजे से 5:02 बजे तक रहेगा. वहीं, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक है, जबकि सामान्य पूजा का समय सुबह 9:06 बजे से दोपहर 2:08 बजे तक है. इस अवधि में आप पूजा कर सकते हैं.
भद्रा और पंचक का संयोग
आज मंगला गौरी व्रत पर भद्रा और पंचक का भी संयोग रहेगा. ज्योतिष गणना के अनुसार भद्रा आज रात 10:03 बजे से शुरू होकर कल सुबह 5:45 बजे तक रहेगी. वहीं चोर पंचक सुबह 5:44 बजे से रात 9:54 बजे तक रहेगा.
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
- व्रत को रखने के लिए आप सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर साफ वस्त्रों को धारण करें.
- इसके बाद मंदिर या पूजा स्थल की साफ-सफाई करें.
- एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर कलश स्थापना करें और आम के पत्ते और नारियल रखें.
- इसके बाद मां गौरी की स्थापना कर उन्हें हल्दी, कुमकुम, चूड़ी, बिंदी, वस्त्र और सुहाग की सामग्री चढ़ाएं.
- फिर व्रत का संकल्प लें और घी का दीपक जलाएं.
- इसके बाद में मां गौरी की व्रत कथा सुनें और मां पार्वती की आरती करें.
- पूजन के बाद माता को 16 प्रकार की वस्तुएं चढ़ाएं.
मंगला गौरी व्रत का महत्व
मंगला गौरी व्रत सावन के हर मंगलवार को रखा जाता है. यह व्रत विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से सुहागिन महिलाओं को भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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