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This Article is From Jan 16, 2019

Kumbh Mela 2019: अयोध्‍या में बने राम मंदिर इसलिए प्रयागराज में रोज जल रहे हैं 33 हजार दीए

साधुओं का कहना है कि वे इस महीने 11 लाख दीए जलाएंगे और राम मंदिर के तत्काल निर्माण के लिए प्रार्थना करेंगे. इन लोगों का विश्वास है कि चार मार्च को कुंभ मेले की समाप्ति के बाद राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा.

Kumbh Mela 2019: अयोध्‍या में बने राम मंदिर इसलिए प्रयागराज में रोज जल रहे हैं 33 हजार दीए
Kumbh 2019: कुंभ मेले में संत दीए जलाकर भव्‍य राम मंदिर की मनोकामना कर रहे हैं
प्रयागराज:

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कुंभ शुरू हो चुका है. साधु-संत, नेता और आम लोग दुनिया भर के कोने-कोने से संगम में डुबकी लगाने के लिए पहुंच रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ साधुओं का एक समूह अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद क्षेत्र में भव्य राम मंदिर के जल्द से जल्द निर्माण के लिए रोजाना 33 हजार दीए जला रहा है.

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साधुओं का कहना है कि वे इस महीने 11 लाख दीए जलाएंगे और राम मंदिर के तत्काल निर्माण के लिए प्रार्थना करेंगे. इन लोगों का विश्वास है कि चार मार्च को कुंभ मेले की समाप्ति के बाद राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा.

इसके अलावा, यहां कुंभ मेले में आ रहे श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए लगाए गए कई होर्डिग्स में भी विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण का आह्वान किया गया है.

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में  रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी. सुप्रीम कोर्ट की पीठ अयोध्या विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 13 अपीलों पर सुनवाई कर रहा है. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड़ के इस विवादित स्थल को इस विवाद के तीनों पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और  राम लला के बीच बांटने का आदेश दिया था.

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इस मामले में पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई से इनकार कर दिया था. उस दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने कहा था कि उसने पहले ही अपीलों को जनवरी में उचित पीठ के पास सूचीबद्ध कर दिया है. अखिल भारतीय हिंदू महासभा की ओर से उपस्थित अधिवक्ता बरुण कुमार के मामले पर शीघ्र सुनवाई करने के अनुरोध को खारिज करते हुए पीठ ने कहा था कि हमने आदेश पहले ही दे दिया है. अपील पर जनवरी में सुनवाई होगी.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा था कि अदालत की अपनी प्राथमिकताएं हैं. उचित पीठ ही जनवरी में तय करेगी कि इसकी सुनवाई जनवरी, फरवरी में हो या उसके बाद. ध्यान हो कि इससे पहले पिछले साल 27 सितंबर को तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की बेंच ने 2-1 के बहुमत से फैसला दिया था कि 1994 के संविधान पीठ के फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत नहीं है, जिसमें कहा गया था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है.
 

VIDEO: रोशनी में जगमगाई कुंभ नगरी

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