Allora caves : एलोरा की गुफाओ में कई बौद्ध, जैन और हिंदू स्मारक शामिल हैं, लेकिन यहां पर स्थित कैलाश मंदिर पर्यटकों के बीच ज्यादा मशहूर है. इस मंदिर की खासियत है कि इसे एक ही चट्टान को तराशकर बनाया गया है. कारीगरों ने इसे 200,000 टन चट्टान को हटाकर इस विशाल शिव मंदिर का निर्माण किया है, जो कि भारत की सबसे बड़ी वास्तुकला उपलब्धियों में से एक है. इस मंदिर में किसी भी प्रकार का सीमेंट, सरिया का इस्तेमाल नहीं किया गया है, जो कि इस मंदिर को विशेष बनाती है. इसके अलावा और क्या खासियत है कैलाशा मंदिर की जानते हैं आगे आर्टिकल में...
-
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
बिकिनी सीन करने में कृति सेनन को क्यों लगे 12 साल? बोलीं- 6-7 साल पहले ऐसा नहीं कर पातीं -
AI एक्ट्रेस टिली नॉरवुड को पसंद है ये बॉलीवुड फिल्म, कृति सेनन के सामने सुनाया फेमस डायलॉग -
‘AI एक्टर्स इंसानी एक्टर्स की जगह नहीं ले सकते’, बोलीं एलाइन वैन डेर वेल्डन -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
नो इंडियंस अलाउड से मेयर तक का सफर, NDTV समिट में रोहतक से लंदन गई मां-बेटे की जोड़ी ने बताई अपनी जर्नी -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके? -
NDTV World Summit 2026: हॉकी चैंपियन नेहा गोयल का बड़ा खुलासा! दर्द में भी जीत का जश्न -
Ashwini Vaishnaw के ऑफिस में कुर्सी के पीछे क्यों लगी है कील? NDTV World Summit में खोला राज
कैलाशा मंदिर की क्या है खासियत
औरंगाबाद में हैकैलाश मंदिर महाराष्ट्र के एलोरा गुफाओं में स्थित है, जो औरंगाबाद से लगभग 30 किलोमीटर दूर है. आपको बता दें कि एलोरा की गुफाएं यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल हैं. जिसका निर्माण लगभग 8 वीं सदी में हुआ था, यानी यह 1200 साल पुराना है. इतिहासकारों के अनुमान के अनुसार इसके निर्माण में 18 वर्ष लगे.
200,000 टन चट्टान गई थी हटाई
इस मंदिर को बनाने के लिए 200,000 टन चट्टान का खनन हाथ के औजारों से किया गया था, जो कि अचंभित करने वाला है.

Photo Credit: novatr.com
ऊपर से नीचे की तरफ हुआ है मंदिर का निर्माण
यही नहीं जब भी हम किसी इमारत का निर्माण करते हैं, तो नीचे से ऊपर की ओर करते हैं. लेकिन इस मंदिर का निर्माण ऊपर से नीचे की ओर किया गया है. जो कि अद्भुत है.
रामायण और महाभारत की कलाकृतियां गई हैं उकेरी
आपको बता दें कि कैलाश मंदिर सिर्फ एक भारत की उत्कृष्ट वास्तुकला का प्रतीक नहीं है, बल्कि आध्यात्मिकता को भी दर्शाता है. इस मंदिर में आपको रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों की कलाकृतियां उकेरी मिलेंगी.

Photo Credit: novatr.com
बासाल्ट चट्टान से बना है
इस मंदिर का निर्माण राष्ट्रकूट वंश के राजा कृष्ण प्रथम(757-783) ने कराया था. यह मंदिर बासाल्ट चट्टान से बना है, जो कि बहुत कठोर होती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं