विज्ञापन

हजारीबाग की रामनवमी में ऐसी क्या खास बात है कि विदेश से लेकर संसद तक होती है चर्चा

झारखंड के हजारीबाग का यह जुलूस अपनी भव्यता और अनुशासन के लिए देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध है. इतना ही नहीं, इस ऐतिहासिक जुलूस की चर्चा देश की संसद तक में हो चुकी है.

हजारीबाग की रामनवमी में ऐसी क्या खास बात है कि विदेश से लेकर संसद तक होती है चर्चा
Ram Navami 2026: झारखंड के हजारीबाग में रामनवमी के विश्व विख्यात जुलूस की शुरुआत किसने की?

Hazaribagh Ram Navami 2026: हजारीबाग का ऐतिहासिक रामनवमी जुलूस आज सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का विश्वस्तरीय प्रतीक बन चुका है. करीब 100 साल से भी अधिक पुरानी इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 1918 में हुई थी, जो आज अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुकी है. बताया जाता है कि इस जुलूस की नींव गुरु सहाय ठाकुर ने रखी थी. उन्होंने अपने पांच साथियों के साथ जुलूस निकाला था. यही परंपरा धीरे-धीरे हर वर्ष आयोजित होने लगी और आज एक विशाल आयोजन का रूप ले चुकी है.

हजारीबाग का यह जुलूस अपनी भव्यता और अनुशासन के लिए देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध है. इतना ही नहीं, इस ऐतिहासिक जुलूस की चर्चा देश की संसद तक में हो चुकी है. आजादी से पहले शुरू हुई इस परंपरा ने 1947 में एक नया रूप लिया, जब रामनवमी जुलूस को राम जन्मोत्सव के साथ-साथ विजय उत्सव के रूप में भी मनाया गया. समय के साथ समाज के कई प्रमुख लोगों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया. 1960 में महासमिति का गठन किया गया, जिसने आयोजन को व्यवस्थित और व्यापक स्वरूप दिया.

Latest and Breaking News on NDTV

1970 में पहली बार ताशा पार्टी को शामिल किया गया, जिसके बाद यह परंपरा जुलूस का अभिन्न हिस्सा बन गई. कोलकाता और पश्चिम बंगाल से ताशा वादक यहां आने लगे. वर्तमान में इस जुलूस में करीब 150 से ज्यादा अखाड़े भाग लेते हैं, जिनमें से लगभग 100 से अधिक अखाड़े सिर्फ हजारीबाग शहर के हैं. यह जुलूस लगभग 10 किलोमीटर लंबे निर्धारित मार्ग झंडा चौक, बड़ा अखाड़ा, महावीर स्थान, ग्वाल टोली होते हुए जामा मस्जिद रोड तक निकाला जाता है.

Latest and Breaking News on NDTV

हजारीबाग की रामनवमी देश भर में अपनी अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, जहां मुख्य जुलूस नवमी के बजाय दशमी को निकलता है. लगातार तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में 4 से 5 लाख श्रद्धालु शामिल होते हैं. लगभग 48 घंटे तक लगातार चलने वाला यह जुलूस जय श्रीराम के उद्घोष से पूरे शहर को भक्तिमय बना देता है. इसमें युवाओं द्वारा पारंपरिक हथियारों और लाठी-डंडों के साथ शक्ति प्रदर्शन और कलाबाजी भी दिखाई जाती है, जो इसकी विशेष पहचान है.

Latest and Breaking News on NDTV

हालांकि, इस लंबे इतिहास में कुछ मौकों पर सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया है. शांति समिति और सद्भावना मंच के माध्यम से आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.

आज हजारीबाग का रामनवमी जुलूस न सिर्फ एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह सामाजिक एकता, परंपरा और सांस्कृतिक गौरव का जीवंत उदाहरण बन चुका है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com