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हिंदू धर्म में पुरुषों के लिए कान छिदवाने के क्या नियम हैं? ज्योतिषाचार्य से जानें कौन सा कान छिदवाना चाहिए

Kaan Chidwane Ke Niyam: ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित बताते हैं, कर्णवेध संस्कार के लिए सोमवार, गुरुवार और शुक्रवार को सबसे शुभ माना गया है. इन दिनों में यह संस्कार करने से इसका सकारात्मक प्रभाव अधिक मिलता है.

हिंदू धर्म में पुरुषों के लिए कान छिदवाने के क्या नियम हैं? ज्योतिषाचार्य से जानें कौन सा कान छिदवाना चाहिए
Kaan Chidwane Ke Niyam: पुरुषों को कौन सा कान छिदवाना चाहिए?

Kaan Chidwane Ke Niyam: हिंदू धर्म में हर संस्कार का अपना विशेष महत्व होता है. इन्हीं में से एक है कर्णवेध संस्कार यानी कान छेदन. ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित बताते हैं, कान छेदन सनातन धर्म के 16 प्रमुख संस्कारों में 9वां संस्कार माना जाता है. यह केवल एक परंपरा नहीं बल्कि स्वास्थ्य, आध्यात्मिक विकास और ऊर्जा संतुलन से जुड़ा महत्वपूर्ण संस्कार है. मान्यता है कि इस संस्कार से व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता बेहतर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है.

कब किया जाता है यह संस्कार?

ज्योतिषाचार्य बताते हैं, यह संस्कार आमतौर पर बच्चे के जन्म के 10वें, 12वें या 16वें दिन किया जाता है. हालांकि, कुछ खास परिस्थितियों में यह विवाह से पहले भी किया जाता है.

कौन सा दिन होता है शुभ?

कर्णवेध संस्कार के लिए सोमवार, गुरुवार और शुक्रवार को सबसे शुभ माना गया है. इन दिनों में यह संस्कार करने से इसका सकारात्मक प्रभाव अधिक मिलता है.

पुरुषों को कौन सा कान छिदवाना चाहिए?

ज्योतिष के अनुसार, पुरुषों को सबसे पहले दाहिना कान छिदवाना चाहिए. यह परंपरा और ऊर्जा संतुलन के लिहाज से सही माना जाता है. हालांकि, कई परंपराओं में दोनों कान छिदवाने की भी सलाह दी जाती है, जिससे शरीर में ऊर्जा का संतुलन बेहतर बना रहता है.

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किन लोगों के लिए है अच्छा?

डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित बताते हैं, कर्णवेध संस्कार राहु और केतु के अशुभ प्रभावों को कम करने में सहायक माना जाता है. यह संस्कार व्यक्ति के मानसिक और आध्यात्मिक विकास को मजबूत करता है. ऐसा माना जाता है कि इससे बुद्धि, स्वास्थ्य और आत्मिक शक्ति में वृद्धि होती है.

ज्योतिषाचार्य कहते हैं कर्णवेध संस्कार सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाने का एक माध्यम है. सही समय, सही विधि और परंपराओं का पालन करते हुए यह संस्कार किया जाए, तो इसका लाभ जीवनभर मिलता है.
 

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