Dhobia ashram Hardoi significance : इन दिनों उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के पिहानी क्षेत्र में स्थित धोबिया आश्रम पर्यटकों के बीच प्रमुख आकर्षण केद्र के रूप में उभर रहा है. यह आश्रम ऋषि धौम्य की तपोभूमि माना जाता है. यहां के शिवलिंग से प्राकृतिक रूप से लगातार जलधारा निकलती है. धोबिया आश्रम जंगलों के बीच में स्थित है, जिसके कारण यह अपने अंदर प्राकृतिक सुंदरता को समेटे हुए. यही कारण है इस जगह पर ग्रीष्म ऋतु में खासतौर से पर्यटकों की भीड़ लगती है.
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आपको बता दें कि जमीन से निकलने वाले प्राकृतिक जल के साथ-साथ शिवलिंग के शीर्ष से निकलने वाले रहस्यमयी जल के कारण यह जगह आध्यात्मिक रूप से श्रद्धा का केंद्र बनी हुआ है. इसे हरदोई जिला प्रशासन के प्रयासों के चलते पर्यटन स्थल भी घोषित किया जा चुका है. धोबिया आश्रम हरदोई जिले से करीब 35 किलोमीटर दूर है, जहां पर कार या बाइक से 1 घंटे में आसानी से पहुंचा जा सकता है.
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कहां मिलती है जलधारा
यहां पर 24 घंटे बहने वाली जलधारा गोमती नदी में जाकर मिलती है. धोबिया आश्रम में स्थापित शिवलिंग का उल्लेख कई पुराणों में भी मिलता है. कहा जाता है यहां का शिवलिंग पांडव द्वार पूजित है. जैसा की हमने आपको शुरूआत में ही बताया है कि यह धौम्य ऋषि की तपोभूमि है, जो 84 हजार ऋषियों की तपस्या में शामिल ऋषि हैं. इन्हें पांडवों के कुल गुरु पुरोहित भी माना जाता है.

धोबिया आश्रम, हरदोई, उत्तर प्रदेश
Photo Credit: instagram/ajay_____.7
क्या है जलधारा के पीछे धार्मिक मान्यता
कहा जाता है महाभारत काल में अर्जुन को बाण लगने के बाद जब कर्ण अंतिम सांस ले रहे थे, तब भगवान कृष्ण उनकी परीक्षा लेने के लिए ब्राह्मण का रूप धारण करके उनसे दान मांगने के लिए पहुंचे. दानवीर कर्ण ने अपने दांत से सोना निकालकर दान किया था, लेकिन भगवान उसे अशुद्ध बताकर लेने से मना कर दिया. जिसके बाद कर्ण ने बाण भेदकर जल स्त्रोत निकाला था. तभी से यहां पर जलधारा बह रही है. यहां के मनोरम दृष्य को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. सभी को यहां की रहस्यमयी जलधारा बहुत आकर्षित करती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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