Devshayani Ekadashi 2026 LIVE Updates: पंचांग के अनुसार पूरे साल में कुल 24 एकादशी की तिथियां होती हैं. सभी एकादशी का अपने आप में खास महत्व होता है. आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को बेहद खास माना जाता है. इस दिन देवशयनी एकादशी मनाई जाती है. साथ ही इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत भी हो जाती है, जिसमें किसी भी मांगलिक कार्य की मनाही होती है. आज यानी 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी मनाई जा रही है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्री हरि की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है. साथ ही कष्टों से भी छुटकारा मिलता है. आज हम आपको देवशयनी एकादशी से जुड़ी सभी जानकारी देने जा रहे हैं.
देवशयनी एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा समेत सभी जरूरी जानकारी जानने के लिए जुड़े रहिए NDTV के साथ...
Devshayani Ekadashi 2026 LIVE: चातुर्मास हुआ शुरू, जानिए इसमें क्या करें
चातुर्मास में रोज भगवान विष्णु की पूजा करें, तुलसी को जल अर्पित करें और दीपदान करें. अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र और अन्य जरूरी चीजों का दान करना भी शुभ माना गया है. श्रीहरि के मंत्रों का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने की भी सलाह दी जाती है.
Devshayani Ekadashi 2026 Daan: देवशयनी एकादशी पर क्या दान करें?
देवशयनी एकादशी पर अन्न का दान करना शुभ माना जाता है. इसके साथ ही आप किसी जरूरमंद को पीले रंग के कपड़े भी दान दे सकते हैं. माना जाता है कि ऐसा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं.
Devshayani Ekadashi 2026 LIVE: भगवान विष्णु के मंत्र
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
- ॐ नारायणाय विद्यहे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
- ॐ विष्णवे नमः
- ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।
- श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
Devshayani Ekadashi 2026 LIVE: देवशयनी एकादशी का महत्व
अषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को (देवशयनी एकादशी) होती है. माना जाता है कि इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं. इस दौरान विवाह, मुंडन, और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए. इसी के साथ ही 'चतुर्मास' की शुरुआत होती है.
Devshayani Ekadashi 2026 Vrat Katha: यहां पढ़ें देवशयनी एकादशी की व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी का क्या महत्व है और इस व्रत की विधि क्या है. तब भगवान श्रीकृष्ण ने बताया कि इस एकादशी को पद्मा या देवशयनी एकादशी कहा जाता है. उन्होंने बताया कि यह कथा स्वयं ब्रह्माजी ने नारद मुनि को सुनाई थी. इस व्रत को करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति के पापों का नाश होता है.
बहुत समय पहले सूर्यवंश में राजा मांधाता नाम के एक न्यायप्रिय और धर्मपरायण राजा राज करते थे. उनकी प्रजा सुखी थी और राज्य में कभी किसी चीज की कमी नहीं थी. लेकिन एक समय ऐसा आया जब लगातार तीन साल तक वर्षा नहीं हुई. पूरे राज्य में भयंकर अकाल पड़ गया. खेत सूख गए, अन्न की कमी हो गई और लोगों का जीवन कठिन हो गया.
प्रजा की परेशानी देखकर राजा मांधाता समाधान की तलाश में वन गए. वहां उनकी मुलाकात महर्षि अंगिरा से हुई. राजा ने उनसे अकाल का कारण और उससे बचने का उपाय पूछा. तब ऋषि ने कहा कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पद्मा यानी देवशयनी एकादशी का विधि-विधान से व्रत करें. उन्होंने बताया कि इस व्रत के प्रभाव से भगवान विष्णु प्रसन्न होंगे और राज्य की सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी.
राजा मांधाता ने ऋषि की बात मानकर अपनी प्रजा, मंत्रियों और सेवकों के साथ श्रद्धा से देवशयनी एकादशी का व्रत किया. भगवान विष्णु की कृपा से जल्द ही अच्छी वर्षा हुई. खेत फिर से लहलहाने लगे और लोगों के जीवन में सुख-समृद्धि लौट आई.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी की यह कथा श्रद्धा से सुनने या पढ़ने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है. ऐसा माना जाता है कि यह व्रत और कथा जीवन के दुखों को दूर करने, पापों का नाश करने और सुख-समृद्धि का मार्ग खोलने वाली है. इसलिए इस दिन पूजा के साथ इस कथा का श्रवण करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है.
Devshayani Ekadashi 2026 LIVE Updates: देवशयनी एकादशी पूजा विधि
- सुबह जल्दी स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें.
- घर के मंदिर को साफ करके गंगाजल से शुद्ध कर लें.
- मंदिर में लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.
- श्रीहरि को पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें.
- एकादशी के दिन भगवान विष्णु को खासकर तुलसी दल अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है.
- इसके बाद श्रद्धा से भोग लगाएं, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें.
- देवशयनी एकादशी की कथा पढ़ें, विष्णु भगवान के मंत्रों का जाप करें.
- अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें.
Devshayani Ekadashi 2026 LIVE Updates: देवशयनी एकादशी का मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 39 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक है. इस अवधि में सभी भक्त श्री हरि की पूजा कर सकते हैं. इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा.
Devshayani Ekadashi 2026 LIVE Updates: देवशयनी एकादशी की तिथि
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह 9 बजकर 13 मिनट पर शुरू हुई. इसका समापन 25 जुलाई को सुबह 11 बजकर 35 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए देवशयनी एकादशी का व्रत आज, 25 जुलाई, शनिवार को रखा जा रहा है.