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Chandra Grahan 2026: चंद्रग्रहण, भद्रा और होली...ग्रहों के इस योग को समझिए

Chandra Grahan 2026: आज का दिन खगोलीय दृष्टि से बेहद खास है. चंद्रग्रहण, भद्रा और होली का अद्भुत संगम...जानें कैसे ये योग आपके जीवन और राशियों पर असर डाल सकता है.

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Chandra Grahan 2026: होली और भद्रा के साथ क्या होगा आपके राशियों का हाल, जानें राशियों पर ग्रहों का प्रभाव

Lunar Eclipse India: 3 मार्च 2026 को ग्रहण, होली और भद्रा तीनों एक साथ पड़ रही हैं. क्या होगा इन तीनो के संयोग का असर? काशी के जाने माने ज्योतिषचार्य आचार्य लोकेश की मानें तो साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लग रहा है. यह ग्रहण लगभग साढ़े तीन घंटे का है. अलग-अलग स्थानिक पंचांगों के अनुसार, ये समय 3 घंटे 26 मिनट से लेकर 3 घंटे 28 मिनट तक है. काशी में यह 6 बजे दृश्य है. ग्रहण के बाद प्रदोष में चौसठ योगिनी दर्शन पूजन की प्राचीन परपंरा है. ग्रहण के दौरान मिथुन, तुला, वृश्चिक और मीन राशियों के लिए यह शुभ है, जबकि शेष आठ राशियों के लिए कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं.

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ग्रहण का समय और विशेषता (Timing & Highlights of Lunar Eclipse)

यह ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि पर अग्नि मंडल में लग रहा है. उस पर भी भद्रा और होलिका के संयोग से नेत्र रोग, अग्निकांड, अर्थव्यवस्था में कमजोरी, चोरी-डकैती और वर्षा में कमी जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं. वहीं, कुछ व्यापारियों और राजाओं के लिए धन में हानि के योग बन रहे हैं, जबकि दाल व्यापारियों को लाभ होने की संभावना है.

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ग्रहण के नियम (Dos and Don'ts During Lunar Eclipse)

चंद्र ग्रहण के नौ घंटे पहले विधवा, संन्यासी, वैष्णव और विरक्तों को भोजन नहीं करना चाहिए. बालक, वृद्ध, गर्भवती, रोगी और पुत्रवान गृहस्थ चार घंटे पूर्व फलाहार ले सकते हैं. ग्रहण के दौरान शयन, शौच और देवमूर्ति को स्पर्श करना निषिद्ध है. इस दौरान गंगा स्नान, दान और जप करना अत्यंत लाभकारी माना गया है.

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Photo Credit: Photo source: Representative/Unsplash

धार्मिक महत्व और सुझाव (Religious Importance and Guidance)

ग्रहण के पश्चात प्रदोष में चौसठ योगिनी दर्शन पूजन की प्राचीन परंपरा है. यह समय घर और मन की शुद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण है. नियमों का पालन करके आप नकारात्मक प्रभावों से बच सकते हैं और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रख सकते हैं. 3 मार्च का यह अनोखा योग न केवल खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद असरदार है. ग्रहण और भद्रा-होली योग का ध्यान रखकर जीवन में संतुलन और सुरक्षा बनाए रखना जरूरी है.

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