
Chaitra Navratri 2025: आदि शक्ति मां दुर्गा की पूजा अर्चना में नवरात्र का बहुत महत्व होता है. वर्ष के दो माह चैत्र और अश्विन माह में यह व्रत व्रत रखा जाता है. भक्त नौ दिन तक नवरात्र का व्रत रखकर माता दुर्गा की पूजा करते हैं. मान्यता है कि इस समय श्रद्धा और भक्ति से मां की अराधना करने वालों की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं. नवरात्र के नौ दिन अलग अलग शक्तियां प्रवाहित होती हैं और इस समय नवग्रहों से संबंधित समस्याओं से भी छुटकारा प्राप्त हो सकता है. वर्ष 2025 में चैत्र नवरात्र 30 मार्च रविवार (Kab Se Hai Chaitra Navratri-2025) से शुरू होगा और कर 6 अप्रैल तक है. नवरात्र में कलश स्थापना (Chaitra Navratri Me Kalash Sthapna) का बहुत महत्व (Chaitra Navratri Me Kalash Sthapna Ka Mahatva ) होता है. ज्योतिष और अंकशास्त्र विशेषज्ञ डॉ. जय मदान ने इंस्टाग्राम jaimaadaanoffical इस बारे में पोस्ट अपलोड किया है. आइए जानते हैं कलश स्थापना से क्या होता है.
कब शुरू होगी चैत्र नवरात्र (Date of Chaitra Navratri 2025)
इस वर्ष चैत्र नवरात्र 30 मार्च रविवार से शुरू हो रहा है. चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 29 मार्च शनिवार को शाम 4 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी और 30 मार्च रविवार को दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगी.
चैत्र नवरात्र 2025 में घट स्थापना का शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat of kalash Sthapna)
नवरात्र के पहले दिन देवी की पूजा की शुरुआत कलश स्थापना की जाती है. इस बार 30 मार्च रविवार को चैत्र नवरात्र शुरू हो रहा है और इसी दिन कलश स्थापना की जाएगी. 30 मार्च को कलश स्थापना के दो मुहूर्त हैं
प्रातः काल कलश स्थापना का मुहूर्त
चैत्र नवरात्र के पहले दिन 30 मार्च को सुबह 6 बजकर 13 मिनट से लेकर 10 बजकर 22 मिनट तक कलश स्थापना की जा सकती है.
दोपहर में कलश स्थापना का मुहूर्त
चैत्र नवरात्र के पहले दिन 30 मार्च दोपहर 12 बजकर 1 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 50 मिनट के बीच अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना की जा सकती है.
कलश स्थापना से प्राप्त होती है नौ ग्रहों की कृपा
ज्योतिष और अंकशास्त्र विशेषज्ञ डॉ. जय मदान के अनुसार नवरात्र में कलश स्थापना से नौ ग्रह आपके लिए अच्छा काम करते हैं. नवरात्र में आने घर में कलश स्थापना करें और इसमें नौ ग्रह के लिए नौ तरह के अनाज डालें. सबसे पहले कलश में गंगाजल डालें और फिर इसमें सूर्य के लिए गेहुं, चंद्रमा के लिए चावल, मंगल के लिए लाल मसूर, गुरु के लिए हल्दी, शुक्र के लिए गाय का घी, बुध के लिए तीन इलाइची, शनि के लिए लौंग, राहु के लिए जौ और केतु काले सफेद तिल डालें. नवरात्रि के नौ दिन इस कलश की पूजा करें और नवमी को हवन पूजन और कन्या जिमाने के बाद इस कलश के जल को पूरे घर में, तिजोरी में, परिजनों के ऊपर छिड़क दें. इससे आपके जीवन पर सकारात्मक बदलाव आएगा.
इन मंत्रों का जाप के साथ करें कलश स्थापना (Mantra of Kalash Sthapna)
ॐ ह्रींग डुंग दुर्गायै नमः
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
मां दुर्गा का आह्वान मंत्र -
ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
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