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Baisakhi 2026: खुशियों और उल्लास से जुड़ी बैशाखी को मनाने से पहले जानें इससे जुड़ी 10 बड़ी बातें

Baisakhi 2026 Significance: बैसाखी का पर्व आज पूरे देश भर में बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. सिखी परंपरा से जुड़ी बैसाखी के साथ आज कौन-कौन से और लोकपर्व मनाए जाते हैं? क्या है बैसाखी का धार्मिक, सांस्कृति और सामाजिक महत्व, जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख.

Baisakhi 2026: खुशियों और उल्लास से जुड़ी बैशाखी को मनाने से पहले जानें इससे जुड़ी 10 बड़ी बातें
Baisakhi 2026: बैसाखी का सांस्कृतिक, सामाजिक एवं धार्मिक महत्व
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Baisakhi ka dharmik mahatva kya hai: मेष संक्रांति के मौके पर आज बैसाखी (Baisakhi) का पर्व बड़ी धूम-धाम से मनाया जा रहा है. वैशाख मास में पड़ने वाला यह सिखी पर्व मुख्य रूप से किसानों से जुड़ा हुआ है. कृषि के साथ लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ यह लोकपर्व अलग-अलग परंपराओं में अलग-अलग नाम और अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है. पंजाब में जहां इस दिन सिखी नव वर्ष प्रारंभ होता है और लोग खुशियां मनाते हैं तो वहीं उत्तर भारत में सतुआन संक्रांति के मौके पर लोग इस दिन जलतीर्थ पर जाकर स्नान-दान करके पुण्यफल अर्जित करते हैं. आइए बैसाखी से जुड़ी 10 बड़ी बातों को विस्तार से जानते हैं.

  1. वैशाख मास में पड़ने वाली बैसाखी पंजाब और हरियाणा की लोक संस्कृति से जुड़ा पावन पर्व है. 
  2. बैसाखी को धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से इसलिए बहुत ज्यादा महत्व माना गया है क्योंकि इसी दिन सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा संप्रदाय की स्थापना की थी. 
  3. बैसाखी वाले दिन सिखी परंपरा से जुड़े लोग गुरुद्वारे में जाकर मत्था टेकते हैं और पवित्र कड़ाह प्रसाद ग्रहण करते हुए लंगर आदि में विशेष सेवा देते हैं. 
  4. बैसाखी का पर्व उन किसानों से जुड़ा है जो अपनी पकी फसल की कटाई में इस दिन खुशियां मनाते हुए अपनी नई फसल की तैयारी करना प्रारंभ कर देता है.
  5. बैसाखी पर्व पर किसान नाच-गाकर परमात्मा और प्रकृति को अच्छी फसल का उपहार देने के लिए आभार प्रकट करता है.
  6. बैसाखी का पर्व हर साल वैशाख मास में अपैल की 14 या 15 तारीख को तब मनाया जाता है जब नवग्रहों के राजा कहलाने वाले सूर्यदेवता मीन से मेष राशि में गोचर करते हैं. 
  7. बैसाखी का पर्व देश के कई हिस्सों नये सौर वर्ष की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है. इस पावन दिन को असम में 'बोहाग बिहू', बंगाल में 'पोइला बैशाख' तो वहीं केरल में 'विशु' नाम से भी जाना जाता है.
  8. उत्तर भारत में मेष संक्रांति के अवसर पर लोग गंगा जैसी पवित्र नदी, सरोवर आदि पर जाकर स्नान-दान और विशेष रूप से सूर्य उपासना करते हैं. 
  9. बैसाखी या फिर कहें मेष संक्रांति के दिन तन और मन से पवित्र होने के बाद सूर्य देवता को अर्घ्य देने और सूर्याष्टकं या फिर आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है. 
  10. वैशाख मास में मनाई जाने वाली बैसाखी के दिन दान का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. यही कारण है कि किसान अपनी खुशहाली की कामना करते हुए जहां अपनी फसल में से कुछ हिस्सा अनाज जरूरतमंद लोगों को दान करता है तो वहीं लोग इस दिन सतुआ, शीतल जल और गुड़ का दान करते हैं. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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