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Baglamukhi Jayanti 2026 Date: 23 या 24 अप्रैल कब है बगलामुखी जयंती? जान लें सही तारीख, मुहूर्त और महत्व

Baglamukhi Jayanti 2026 Kab Hai: वैदिक पंचांग के अनुसार हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बगलामुखी जंयती का पर्व मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां बगलामुखी प्रकट हुई थीं और इनकी पूजा करने से आरोग्य में वृद्धि और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है.

Baglamukhi Jayanti 2026 Date: 23 या 24 अप्रैल कब है बगलामुखी जयंती? जान लें सही तारीख, मुहूर्त और महत्व
बगलामुखी जंयती 2026 कब है?
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Baglamukhi Jayanti 2026 Date: हिन्दू धर्म में बगलामुखी जंयती का पर्व बेहद महत्व रखता है. यह दिन मां बगलामुखी को समर्पित होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां बगलामुखी प्रकट हुई थीं और इनकी पूजा करने से आरोग्य में वृद्धि और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है. साथ ही देवी साधक की मनोकामनाएं भी पूर्ण करती हैं. वैदिक पंचांग के अनुसार हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बगलामुखी जंयती का पर्व मनाया जाता है. आइए जानते हैं इस साल बगलामुखी जंयती कब मनाई जाएगी, क्या है शुभ मुहूर्त और महत्व...

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कब है बगलामुखी जयंती?

वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 23 अप्रैल को रात में 8 बजकर 50 मिनट पर होगी. वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 24 अप्रैल को शाम 7 बजकर 22 मिनट पर होगा. इसके बाद नवमी तिथि की शुरुआत हो जाएगी. ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए बगलामुखी जयंती का पर्व 24 अप्रैल 2026, दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा. 

बगलामुखी जयंती का शुभ मुहूर्त

लाभ चौघड़िया : सुबह 7 बजकर 24 मिनट से 9 बजकर 2 मिनट तक
अमृत चौघड़िया : सुबह 9 बजकर 3 मिनट से 10 बजकर 42 मिनट तक
शुभ चौघड़िया : दोपहर के 12 बजकर 18 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक
प्रदोष काल : शाम को 6 बजकर 6 मिनट से लेकर 7 बजकर 38 मिनट तक

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बगलामुखी जयंती का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां बगलामुखी की पूजा करने से शत्रु और अन्य बाधाओं से मुक्ति मिलती है. साथ ही इस दिन पूजा, हवन और मंत्रोच्चार से घर की नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और बुरी नजर से छुटकारा मिलता है. इसके अलावा मां बगलामुखी की पूजा-अर्चना करने से आरोग्य में वृद्धि होती है.

मां बगलामुखी की आरती

जय जय श्री बगलामुखी माता,आरति करहुँ तुम्हारी ।
पीत वसन तन पर तव सोहै, कुण्डल की छबि न्यारी ॥
कर-कमलों में मुद्गर धारै,अस्तुति करहिं सकल नर-नारी ॥
जय जय श्री बगलामुखी माता..

चम्पक माल गले लहरावे, सुर नर मुनि जय जयति उचारी ॥
त्रिविध ताप मिटि जात सकल सब,भक्ति सदा तव है सुखकारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता..

पालत हरत सृजत तुम जग को,सब जीवन की हो रखवारी ॥
मोह निशा में भ्रमत सकल जन,करहु हृदय महँ, तुम उजियारी ॥
जय जय श्री बगलामुखी माता..

तिमिर नशावहु ज्ञान बढ़ावहु, अम्बे तुमही हो असुरारी ॥
सन्तन को सुख देत सदा ही, सब जन की तुम प्राण पियारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता..

तव चरणन जो ध्यान लगावै, ताको हो सब भव-भयहारी ॥
प्रेम सहित जो करहिं आरती, ते नर मोक्षधाम अधिकारी ॥
जय जय श्री बगलामुखी माता...

बगलामुखी की आरती, पढ़ै सुनै जो कोय ।
विनती कुलपति मिश्र की, सुख-सम्पति सब होय ॥

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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