सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है. जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है और इसका पुण्य कई गुना बढ़ जाता है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष विधान है. साथ ही पितरों के निमित्त तर्पण, दान और पवित्र नदियों में स्नान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है. इस बार सोमवती अमावस्या की तारीख को लेकर लोगों के मन में भ्रम की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में आइए जानते हैं सोमवती अमावस्या 2026 कब है-
सोमवती अमावस्या 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि की शुरुआत 14 जून 2026, रविवार को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट से शुरू होगी और 15 जून 2026, सोमवार को सुबह 8 बजकर 24 मिनट तक रहेगी. हिंदू धर्म में व्रत और पर्व मनाने के लिए उदया तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है. इसलिए सोमवती अमावस्या का व्रत और पूजा 15 जून, सोमवार को की जाएगी.
-
साल भर में जितनी लॉन्चिंग हरिकोटा से नहीं होती, उतना तो कांग्रेस अपने नेता को लॉन्च कर देती है: PM मोदी -
तब बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है... PM मोदी का NDTV वर्ल्ड समिट से दुनिया को संदेश -
PM Modi Speech: Covid-19 का जिक्र कर PM मोदी ने बताई भारत की ताकत! कही ये बातें | NDTV India -
PM Modi Speech: UN को लेकर NDTV World Summit के मंच पर बड़ी बात बोले पीएम मोदी | NDTV India -
'मौजूदा चुनौतियों के सामने संयुक्त राष्ट्र की सीमाएं साफ दिख रही हैं', NDTV World Summit में बोले PM मोदी -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर पहुंचे PM Modi! | Breaking News -
भारत क्या पाकिस्तान से अच्छे संबंध चाहता है? NDTV World Summit में जयशंकर का जवाब -
रील देखने की लत से बचाएगी ये माइक्रो साधना, NDTV World Summit में स्वामी सर्वप्रियानंद ने बताया -
NDTV World Summit 2026 में पहुंचे PM Modi, थोड़ी देर में होगा संबोधन -
कौन सी वेबसीरीज देख रहे विदेश मंत्री S Jaishankar, वर्ल्ड समिट में बताया
सोमवती अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दान करना सबसे उत्तम माना गया है. 15 जून को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 04 मिनट से 4 बजकर 44 मिनट तक रहेगा. वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. आप इस दौरान स्नान, पूजा और दान कर सकते हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है. वहीं, पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है. मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान और जरूरतमंदों को दान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
यह भी पढ़ें- निर्जला एकादशी पर क्या दान करना चाहिए और क्या दान नहीं?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं