Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया हिंदू धर्म का एक अत्यंत शुभ और पवित्र त्यौहार है, जिसे 'आखा तीज' के नाम से भी जाना जाता है. 'अक्षय' शब्द का अर्थ है 'जिसका कभी क्षय यानी नाश न हो'. मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों, दान और पुण्य का फल अनंत और स्थायी होता है. इस साल अक्षय तृतीया 20 अप्रैल यानी रविवार को मनाई जाएगी. अक्षय तृतीया पर दान करने के बहुत महत्व है. इस दिन ग्रहों की शांति के लिए भी दान किया जाता है. चलिए आपको बताते हैं ग्रहों की शांति के लिए क्या दान करना चाहिए?
2026 में अक्षय तृतीया की तिथि और मुहूर्त
- अक्षय तृतीया 2026, 19 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी.
- तृतीया तिथि प्रारंभ- 18 अप्रैल 2026 को शाम 05:31 बजे से
- तृतीया तिथि समाप्त- 19 अप्रैल 2026 को दोपहर 02:12 बजे तक
अक्षय तृतीया पर नवग्रह शांति के लिए दान
सूर्य- गुड़, गेहूं, तांबे के बर्तन, लाल वस्त्र या लाल चंदन
चंद्र- चावल, दूध, चांदी, सफेद वस्त्र, चीनी या मिश्री
मंगल- मसूर की दाल, लाल कपड़ा, गुड़ या शहद
बुध- हरी मूंग की दाल, हरे वस्त्र, या कांसा (कंस) के बर्तन
गुरु- चने की दाल, हल्दी, पीले फल, धार्मिक पुस्तकें या केसर
शुक्र- घी, कपूर, दही, सफेद रेशमी कपड़े या इत्र (परफ्यूम)
शनि- काले तिल, सरसों का तेल, लोहे के बर्तन, काले जूते या छाता
राहु- नारियल, मूली, जौ, या सप्तधान्य (सात प्रकार का अनाज)
केतु- कुत्ता पालना या काले और सफेद कंबल का दान
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अक्षय तृतीया पर कौन सा रंग पहनें- पीला- विष्णु पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ
- सफेद- शीतलता, पवित्रता और शांति के लिए
- लाल- शुभता और सौभाग्य के लिए
अक्षय तृतीया पर पूजा कैसे करें
सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और साफ कपड़े पहनने, भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करें, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें. इसके अलावा मंदिर जाना और धार्मिक ग्रंथ पढ़ना भी अच्छा माना जाता है. इस दिन दान‑पुण्य का विशेष महत्व होता है और माना जाता है कि इसका फल कई गुना बढ़कर मिलता है.
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