- AI निगरानी, नए पार्किंग जोन और सख्त सुरक्षा. रथ यात्रा 2026 के लिए पुरी पूरी तरह तैयार.
- भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा पर दुनिया की नजर, इस बार भीड़ नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती.
- 16 जुलाई से जगन्नाथ रथ यात्रा, पिछले साल की भगदड़ के बाद इस बार सुरक्षा का अभेद्य कवच और अभूतपूर्व इंतजाम.
ओडिशा के पुरी में अगले महीने की 16 तारीख को भगवान श्री जगन्नाथ की रथ यात्रा होनी है. करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा यह महापर्व हर साल देश-विदेश से लाखों भक्तों को आकर्षित करता है. पिछले साल गुण्डिचा मंदिर के पास भगदड़ में तीन श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी. इसकी वजह से प्रशासन और ओडिशा सरकार पर कई सवाल उठे थे. लिहाजा इस बार सरकार ने रथ यात्रा के लिए जीरो एरर रणनीति अपनाई है और हर स्तर पर व्यवस्थाओं को पहले से अधिक मजबूत बनाने का दावा किया है.
रथ यात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने-अपने भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से निकलेंगे और करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित गुण्डिचा मंदिर पहुंचेंगे. नौ दिनों तक गुण्डिचा मंदिर में प्रवास के बाद 24 जुलाई को भगवान की वापसी यात्रा, जिसे बहुदा यात्रा कहा जाता है, निकलेगी. इसके बाद 25 जुलाई को सुनाबेश और 27 जुलाई को नीलाद्री बीजे (रथ यात्रा का अंतिम अनुष्ठान) जैसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान संपन्न होंगे.
तकनीक के सहारे होगी भीड़ पर नजर
इस बार प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करना है. इसके लिए समूचे पुरी शहर में आधुनिक निगरानी तंत्र स्थापित किया जा रहा है. प्रमुख मार्गों, गुण्डिचा मंदिर, बड़ा डांडा और अन्य संवेदनशील इलाकों में बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं. इन कैमरों से मिलने वाली जानकारी को एक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से मॉनिटर किया जाएगा, जहां अधिकारी हर गतिविधि पर रियल टाइम नजर रखेंगे.

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भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष अधिकारी तैनात
श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने चार वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को विशेष रूप से भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी है. पुलिस, प्रशासन और श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन के बीच तालमेल बिठाने को लेकर लगातार बैठकों का दौर चल रहा है, ताकि रथ यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो.
ट्रैफिक जाम से बचाने के लिए नए पार्किंग जोन
रथ यात्रा के दौरान पुरी में भारी ट्रैफिक दबाव देखने को मिलता है. इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने आठ नए पार्किंग जोन चिन्हित किए हैं. साथ ही विशेष ट्रैफिक रूट, बैरिकेडिंग, रोड डिवाइडर और अलग-अलग यातायात जोन तैयार किए जा रहे हैं ताकि श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को कम से कम परेशानी हो.
रेलवे स्टेशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी फोकस
लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए रेलवे स्टेशनों पर अतिरिक्त व्यवस्थाएं की जा रही हैं. वहीं स्वास्थ्य विभाग भी पूरी तरह सतर्क है. आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं, एम्बुलेंस, मेडिकल टीमों और राहत दलों को तैनात किया जाएगा. रात के समय श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हाई-मास्ट लाइटें और अतिरिक्त प्रकाश व्यवस्था भी की जा रही है.

गुण्डिचा मंदिर, पुरी
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गुण्डिचा मंदिर क्षेत्र पर विशेष नजर
पिछले साल की दुर्घटना के बाद इस बार गुण्डिचा मंदिर क्षेत्र को सबसे संवेदनशील माना जा रहा है. प्रशासन ने यहां भीड़ के आवागमन को सुचारु बनाने, अतिक्रमण हटाने और सुरक्षा घेरा मजबूत करने के लिए विशेष योजना तैयार की है. अधिकारियों का मानना है कि रथ यात्रा की सफलता काफी हद तक गुण्डिचा मंदिर क्षेत्र में भीड़ प्रबंधन पर निर्भर करेगी.हर वर्ष लाखों श्रद्धालु भगवान की एक झलक पाने के लिए पुरी पहुंचते हैं. ऐसे में इस बार की रथ यात्रा प्रशासन के लिए भी बड़ी परीक्षा होगी.
सरकार का दावा है कि पिछले वर्षों की कमियों से सीख लेते हुए इस बार सुरक्षा, तकनीक, स्वास्थ्य सेवाओं, ट्रैफिक प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं. अब निगाहें 16 जुलाई पर टिकी हैं, जब भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ भव्य रथों पर सवार होकर गुण्डिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे और पुरी एक बार फिर जय जगन्नाथ के उद्घोष से गूंज उठेगा.
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