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पेपर लीक के गुनहगारों को क्या मिलती है सजा, यहां पढ़ें संसद से पारित कानून की एक-एक बात

NEET UG 2026 रद्द, 22 लाख छात्र प्रभावित. पेपर लीक को लेकर देश में सबसे सख्त कानून लागू है जिसमें 10 साल तक जेल प्रावधान है. जानिए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की पूरी कहानी.

पेपर लीक के गुनहगारों को क्या मिलती है सजा, यहां पढ़ें संसद से पारित कानून की एक-एक बात
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  • NEET UG 2026 परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दी गई. करीब 22 लाख छात्र प्रभावित हुए हैं.
  • केंद्र सरकार ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं और NTA जल्द दोबारा परीक्षा की नई तारीख घोषित करेगा.
  • सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत दोषियों को 10 साल तक जेल की सजा का प्रावधान.
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देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बार फिर विवादों में घिर गई है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी National Testing Agency ने 3 मई 2026 को आयोजित हुई परीक्षा को रद्द कर दिया है. कई राज्यों से पेपर लीक, अनियमितता और परीक्षा में धांधली के इनपुट सामने आए, इसके बाद ही यह कड़ा कदम उठाया गया है. साथ ही केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई जांच के आदेश भी दे दिए हैं.

इस फैसले से देशभर के करीब 22 लाख से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं. लाखों परीक्षार्थियों की महीनों की तैयारी, कोचिंग, मेहनत और उम्मीदें अचानक अनिश्चितता में बदल गई हैं. फिलहाल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी  NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने NDTV से कहा कि सीबीआई जांच की फाइडिंग आने के बाद ही दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी. नई परीक्षा तारीख जल्द आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी. सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि छात्रों को दोबारा फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होगी. पुराने आवेदन ही मान्य रहेंगे.

लेकिन इस पूरे विवाद ने एक बार फिर देश में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर बार बार पेपर लीक कैसे हो जाते हैं. कौन लोग इसमें शामिल होते हैं. क्या इनके खिलाफ कोई सख्त कानून नहीं है. तो आपको बता दें कि भारतीय संसद इन सवालों के जवाब पहले ही दे चुकी है. 

पेपर लीक, नकल माफिया और परीक्षा धांधली पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने 2024 में एक बेहद सख्त कानून लागू किया था. इसका नाम है सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम 2024. इसका मकसद देश की बड़ी परीक्षाओं को पेपर लीक और संगठित नकल गिरोहों से बचाना है. अब सवाल यह है कि इस कानून में आखिर क्या लिखा है? कौन जेल जाएगा? कितनी सजा होगी? क्या नकल करने वाले छात्रों को भी जेल होगी? कौन सी परीक्षाएं इसके दायरे में आती हैं? और सरकार ने इसे इतना सख्त क्यों बनाया?

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आखिर क्यों लाना पड़ा इतना सख्त कानून?

पिछले कुछ सालों के दौरान देश में कई बड़ी परीक्षाएं विवादों में रहीं. कभी भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ, तो कभी प्रवेश परीक्षा पर सवाल उठे. रेलवे भर्ती से लेकर शिक्षक भर्ती, पुलिस भर्ती, NEET, NET और दूसरी परीक्षाओं तक में पेपर लीक की खबरें आती रहीं.

कई मामलों में पता चला कि संगठित गिरोह करोड़ों रुपये लेकर छात्रों तक पेपर पहुंचाते थे. कुछ जगहों पर परीक्षा केंद्रों की मिलीभगत सामने आई. कहीं OMR शीट बदली गई तो कहीं सर्वर हैक करने की कोशिश हुई. इसे रोकने के उद्देश्य से ही केंद्र सरकार ने तय किया कि सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई काफी नहीं है. अब सख्त कानूनी डर जरूरी है. इसी सोच के साथ संसद ने सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम 2024 पारित किया.

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किन परीक्षाओं पर लागू होता है यह कानून?

यह कानून देश की लगभग सभी बड़ी केंद्रीय परीक्षाओं पर लागू होता है. इनमें UPSC, SSC, रेलवे, बैंकिंग, NEET, JEE, CUET, NET और केंद्र सरकार की तरफ से अधिसूचित अन्य सार्वजनिक परीक्षाएं शामिल हैं.  

चलिए अब बताते हैं इस कानून से जुड़ी सभी अहम बातें.

1. पेपर लीक करना सीधा बड़ा अपराध

अगर कोई व्यक्ति परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र या आंसर की लीक करता है तो यह गंभीर अपराध माना जाएगा. सिर्फ लीक करना ही नहीं, लीक कराने में मदद करना भी अपराध है.

2. OMR शीट से छेड़छाड़ भी अपराध

परीक्षा खत्म होने के बाद OMR शीट बदलना, नंबर बढ़ाने के लिए डेटा बदलना या उत्तर पुस्तिका से छेड़छाड़ करना भी कानून के तहत दंडनीय है. (जिन परीक्षाओं में OMR शीट होते हैं या उत्तर पुस्तिका होती हैं, उन पर लागू.)

3. सॉल्वर गैंग पर सीधी कार्रवाई

अगर कोई व्यक्ति परीक्षा के दौरान किसी अभ्यर्थी की जगह पेपर हल करता है या बाहर बैठकर उत्तर भेजता है, तो उसे भी अपराधी माना जाएगा.

4. साइबर अपराध भी शामिल

फर्जी वेबसाइट बनाकर छात्रों को ठगना, नकली परीक्षा पोर्टल तैयार करना या कंप्यूटर सिस्टम हैक करना भी इस कानून के दायरे में आता है.

5. संगठित नकल गिरोह पर सबसे कड़ी मार

अगर कोई सिंडिकेट या गैंग मिलकर परीक्षा में धांधली करता है तो उसे संगठित अपराध माना जाएगा. ऐसे मामलों में सबसे सख्त सजा का प्रावधान है.

6. परीक्षा केंद्र और सर्विस प्रोवाइडर भी नहीं बचेंगे

अगर परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी, टेक्निकल कंपनी या परीक्षा केंद्र की मिलीभगत सामने आती है तो उन पर भी भारी जुर्माना और कार्रवाई होगी.

7. गोपनीय जानकारी लीक करना अपराध

परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी को पैसे या फायदे के लिए साझा करना भी कानून के तहत अपराध माना गया है.

8. परीक्षा प्रक्रिया में बाधा डालना भी अपराध

परीक्षा केंद्र में जबरन घुसना, अधिकारियों को धमकाना या परीक्षा व्यवस्था बिगाड़ना भी कानून के तहत कार्रवाई योग्य है.

9. परीक्षा के नियम तोड़ना भी गंभीर मामला

अगर कोई अधिकारी जानबूझकर सरकार द्वारा तय सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी.

10. छात्र और संगठित अपराधी में फर्क

यह कानून सामान्य परीक्षार्थियों और बड़े नकल गिरोहों में अंतर करता है. साधारण छात्र पर अलग स्थिति हो सकती है, लेकिन पेपर लीक सिंडिकेट से जुड़े लोग सीधे कठोर दंड के दायरे में आएंगे.

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कानून में कौन कौन से अपराध गिनाए गए हैं?

इस कानून की धारा 3, 4, 5 और 6 में विस्तार से अपराधों को परिभाषित किया गया है.

इनमें प्रश्नपत्र लीक करना, आंसर की लीक करना, OMR शीट बदलना, मेरिट लिस्ट से छेड़छाड़, परीक्षा केंद्र की बैठने की व्यवस्था बदलना, परीक्षा तिथि और शिफ्ट में हेरफेर, कंप्यूटर नेटवर्क से छेड़छाड़, फर्जी वेबसाइट बनाना, अभ्यर्थियों को अवैध मदद देना, परीक्षा संचालन में बाधा डालना, अनधिकृत लोगों को परीक्षा परिसर में घुसाना, परीक्षा सामग्री तक अवैध पहुंच बनाना आदि शामिल हैं.

दोष साबित होने पर सजा कितनी होगी?

इस कानून को सख्त बनाने की सबसे बड़ी वजह इसकी सजा है. सरकार ने इसमें जेल और जुर्माने दोनों का बेहद कठोर प्रावधान रखा है.

अगर कोई व्यक्ति पेपर लीक, OMR छेड़छाड़ या परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा जाता है तो उसे कम से कम 3 साल की जेल होगी, जो 5 साल तक बढ़ सकती है. साथ ही उस पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

अगर कोई गिरोह, गैंग या सिंडिकेट परीक्षा धांधली में शामिल पाया जाता है तो. 5 साल से 10 साल तक की जेल. कम से कम 1 करोड़ रुपये का जुर्माना. यह इस कानून का सबसे कठोर हिस्सा माना जाता है.

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वहीं अगर परीक्षा आयोजित करने वाली कंपनी या एजेंसी दोषी पाई जाती है तो. 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना, 4 साल तक परीक्षा कराने पर रोक और परीक्षा का पूरा खर्च भी वसूला जा सकता है.

अगर किसी कंपनी का निदेशक, मैनेजर या अधिकारी अपराध में शामिल पाया जाता है तो उसे 3 से 10 साल तक की जेल होगी. 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना भी देना पड़ सकता है.

वहीं अगर संगठित अपराध साबित हो जाता है, तो आरोपियों की संपत्ति कुर्क और जब्त भी की जा सकती है.

क्या यह कानून गैर जमानती है?

हां. इस कानून के तहत दर्ज अपराध संज्ञेय, गैर जमानती है. यानी पुलिस बगैर किसी वारंट के गिरफ्तारी कर सकती है. इसमें अभियुक्त को आसानी से जमानत नहीं मिलेगी और अपराधियों के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा.

क्या छात्रों को भी जेल होगी?

यह सबसे बड़ा सवाल है जो हर छात्र और परिवार के मन में आता है. कानून मुख्य रूप से संगठित नकल गिरोह, पेपर लीक नेटवर्क और धांधली कराने वालों को निशाना बनाता है. सामान्य छात्र अगर सिर्फ परीक्षा में नकल करते पकड़े जाते हैं तो उनके खिलाफ अलग परीक्षा नियम लागू हो सकते हैं. लेकिन अगर कोई छात्र जानबूझकर पेपर लीक गैंग से जुड़ा पाया जाता है, पैसे देकर पेपर खरीदता है या संगठित धांधली का हिस्सा बनता है, तो उसके खिलाफ भी इसी कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है.

इतना सख्त कानून क्यों लाई सरकार?

पेपर लीक से केवल कोई परीक्षा नहीं रुकती बल्कि लाखों की संख्या में छात्रों के भविष्य पर असर डालती है. एक छात्र सालों मेहनत करता है, परिवार का पैसा उस पर खर्च होता है. ऐसे में पूरा परिवार ऐसे किसी पेपर लीक से मानसिक दबाव झेलता है. देश की आवाम का देश की विभिन्न चुनी गई सरकारों पर भरोसा होता है लिहाजा सरकार उसी भरोसे को कायम रखने के लिए ऐसा सख्त कानून बनाती है.

फिलहाल पूरा ध्यान NEET UG 2026 की दोबारा परीक्षा पर है. NTA जल्द नई तारीखों की घोषणा करेगा और संभव है कि सीबीआई जांच उससे पहले यह पता लगा ले कि पेपर लीक कहां से हुआ, कौन लोग शामिल थे और क्या कोई बड़ा सिंडिकेट इसके पीछे काम कर रहा था.

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