दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल नजीब जंग (फाइल फोटो)
- इस मामले में अंतिम सुनवाई के लिए 15 नवंबर की तारीख तय
- पीठ ने कहा, 'हम प्रतिदिन के आधार पर आदेश नहीं दे सकते'
- हाईकोर्ट ने कहा था कि उपराज्यपाल दिल्ली में प्रशासनिक प्रमुख हैं
नई दिल्ली:
दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार को झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इंकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि उपराज्यपाल प्रशासनिक प्रमुख हैं. जिनकी सभी प्रशासनिक फैसलों के लिए पूर्व रजामंदी की जरूरत है.
हाईकोर्ट के चार अगस्त के फैसले के खिलाफ आप सरकार की सात अपीलों पर केन्द्र से छह हफ्तों में जवाब मांगते हुए शीर्ष अदालत ने उपराज्यपाल नजीब जंग के उस हालिया फैसले पर भी रोक से इंकार किया, जिसमें दिल्ली सरकार के पिछले आदेशों तथा 400 से अधिक फाइलों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था.
सरकारी फाइलों की जांच के उपराज्यपाल के हालिया फैसले का जिक्र होने पर न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी और न्यायमूर्ति एन.वी. रमण की पीठ ने कहा, 'हर दिन कुछ आदेश दिए जाएंगे, हम प्रतिदिन के आधार पर आदेश नहीं दे सकते.'
पीठ ने कहा, 'कोई रोक नहीं. हम इन मामलों में अंतिम सुनवाई के लिए 15 नवंबर की तारीख तय करते हैं.' पीठ ने साथ ही अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी की इन शुरुआती आपत्तियों पर सहमति नहीं जताई कि कई आधारों पर अपीलों को खारिज किया जाना चाहिए.
इसमें से एक आधार यह है कि मुख्य सचिव या सचिव की जगह याचिकाओं का अनुमोदन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया के हलफनामा द्वारा किया गया.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
हाईकोर्ट के चार अगस्त के फैसले के खिलाफ आप सरकार की सात अपीलों पर केन्द्र से छह हफ्तों में जवाब मांगते हुए शीर्ष अदालत ने उपराज्यपाल नजीब जंग के उस हालिया फैसले पर भी रोक से इंकार किया, जिसमें दिल्ली सरकार के पिछले आदेशों तथा 400 से अधिक फाइलों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था.
सरकारी फाइलों की जांच के उपराज्यपाल के हालिया फैसले का जिक्र होने पर न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी और न्यायमूर्ति एन.वी. रमण की पीठ ने कहा, 'हर दिन कुछ आदेश दिए जाएंगे, हम प्रतिदिन के आधार पर आदेश नहीं दे सकते.'
पीठ ने कहा, 'कोई रोक नहीं. हम इन मामलों में अंतिम सुनवाई के लिए 15 नवंबर की तारीख तय करते हैं.' पीठ ने साथ ही अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी की इन शुरुआती आपत्तियों पर सहमति नहीं जताई कि कई आधारों पर अपीलों को खारिज किया जाना चाहिए.
इसमें से एक आधार यह है कि मुख्य सचिव या सचिव की जगह याचिकाओं का अनुमोदन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया के हलफनामा द्वारा किया गया.
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