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This Article is From Dec 14, 2015

शकूरबस्ती मामला : झुग्गी बचाने से ज्यादा फिक्र बसाने की होती तो मासूम की जान ना जाती

शकूरबस्ती मामला : झुग्गी बचाने से ज्यादा फिक्र बसाने की होती तो मासूम की जान ना जाती
नई दिल्ली: शकूरबस्ती की झुग्गी में रविवार रात 1 बजे कड़ाके की ठंड के बीच एक बच्ची का जन्म हुआ, जब परिवार के सिर पर झुग्गी का साया भी नहीं रहा। पर ऐसा हुआ क्यों? दिल्ली सरकार के कैबिनेट मिनिस्टर सत्येंद्र जैन की क्लस्टर कोऑर्डिनेटर मिथलेश पाठक बताती हैं कि हर बार जब भी नोटिस आता था, मंत्री जी इनकी झुग्गी बचा लेते थे, लेकिन इस बार सबकुछ इतनी जल्दी हुआ कि मौका ही नहीं मिला।

सबको पता था कि झुग्गी पर तलवार लटक रही है और स्थानीय विधायक और मंत्री सत्येंद्र जैन ढाल बने खड़े हैं। यही नहीं बिजली का मीटर ले जाने की भी कई कोशिशें हो चुकी थी। लोग कहते हैं कि जब भी बिजली विभाग वाले मीटर खोलने आते थे, हम उनको भगा देते थे। इस बार वो पुलिस बल के साथ थे। पहले बिजली काटी, मीटर खोला और फिर हमारे आशियाने पर बुलडोजर चला।

इसी झुग्गी में रहने वाले प्रमोद ने बताया कि करीब दो महीने पहले भी झुग्गी तोड़ने का नोटिस मिला था। हम जैन साहब के पास गए और हमारी झुग्गी बच गई। झुग्गी हटाने की डेडलाइन बार-बार बढ़ती रही। इस बार भी नोटिस चिपकाया गया, लेकिन कार्रवाई इतनी तेज हुई कि बीच-बचाव का मौका नहीं मिला। करीब तीन किलोमीटर के इलाके में फैले 500 झुग्गियों को लेकर शुक्रवार को कुछेक गिनी चुनी जगहों पर नोटिस चिपकाई गई और फिर शनिवार सुबह ढहाने की कार्रवाई हुई।

जाहिर है उजाड़ने और बचाने की इस आंखमिचौली में इस बार सत्येंद्र जैन मात खा गए और झुग्गी उजड़ गई। अगर दिल्ली सरकार को झुग्गी बचाने से ज्यादा फिक्र लोगों को बसाने की होती तो ना एक मासूम की जान जाती ना ही इतना बवाल मचता और ना ही इस ठिठुरती ठंड में गरमाई सियासत पर हाथ सेंकने का मौका मिलता।

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