- मालवीय नगर के हौज रानी इलाके में फ्लोरिश स्टे होटल में लगी आग में 21 लोगों की जान चली गई.
- चश्मदीद अंजुम ने बताया कि आग और धुएं की वजह से लोग फंसे हुए थे और मदद के लिए चीख रहे थे.
- स्थानीय निवासी रियाज़ुद्दीन मंसूरी और उनके बेटे ने नीचे गद्दे बिछाकर फंसे लोगों की जान बचाई थी.
बुधवार को दक्षिण दिल्ली के भीड़भाड़ वाले मालवीय नगर के हौज रानी इलाके में एक होटल में लगी भीषण आग का नया वीडियो एनडीटीवी के पास आया है. इस घटना की चश्मदीद ने जो एनडीटीवी को बताया वो ना सिर्फ दिल दहलाने वाला है, बल्कि मौत से सामना कराने वाला है. इस आग में नौ भारतीयों और 12 विदेशी नागरिकों सहित 21 लोगों की मौत हो गई. एनडीटीवी को 46 वर्षीय अंजुम ने बताया कि उन्होंने फ्लोरिश स्टे होटल के सामने स्थित अपने घर से इस घटना को अपनी आंखों से देखा.
चश्मदीद अंजुम से जानिए कैसा था वो मंजर

दिल्ली के मालवीय नगर में आग के बाद बिल्डिंग की कुछ ऐसी हो गई हालत.
मालवीय नगर में जब जिंदा बन गए लाश
अंजुम ने एनडीटीवी को अपने घर की खिड़की से शूट किए गए वीडियो दिखाए. वीडियो में होटल के अंदर फंसे मेहमानों की मदद की गुहार के बेबस पल कैद हैं. एक क्लिप में, एक विदेशी महिला को अपने कमरे से निकलते घने काले धुएं के बीच बार-बार मदद के लिए चीखते हुए सुना जा सकता है. वो रो रही है. किसी तरह उस मनहूस आग और धुएं से बचकर जिंदगी के पास जाना चाहती है, लेकिन आग और धुएं उसे निगल लेने को जैसे बेकाबू हुआ जा रहा है. इसी बीच कैमरा होटल के दूसरी तरफ घूमता है. खिड़कियों और रेलिंग पर कई औरतें लाशों की तरह खड़ी हैं. एक पल को देखकर लगता ही नहीं है वो जिंदा हैं. वो इतना भयानक दृश्य है कि दिमाग पर छा जाता है. साफ समझ आता है कि इतनी ऊंचाई से कूदने की हिम्मत उन औरतों में नहीं बची. वो किसी तरह दम साधे बस सांस ले रही हैं. तभी फिर कैमरे में एक अफ्रीकी महिला अपनी जान बचाने के लिए सीवेज पाइप से नीचे उतरने की कोशिश कर रही है, जबकि कमरे के अंदर मौजूद एक व्यक्ति उसे गिरने से बचाने के लिए पकड़े हुए है. हौज रानी में कई सालों से रह रही अंजुम ने कहा कि उन्होंने जो देखा, उससे देखकर वह खुद कई पलों तक सन्न रह गईं.
तभी फरिश्ता बनकर आए कुछ इंसान
वीडियो में दिखाया गया है कि इमारत में धुआं भर जाने पर कई विदेशी नागरिक खिड़कियों से किसी भी तरह बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं. कुछ बाहर निकल गए हैं. नीचे खड़े निवासी अंदर फंसे लोगों से कूदने की मिन्नतें कर रहे हैं, मगर वो हौसला नहीं जुटा पा रहे. इमरजेंसी मदद का दूर-दूर तक कुछ पता नहीं है. तभी रियाज़ुद्दीन मंसूरी और उनके बेटे अरमान जैसे फरिश्तों ने जलती हुई इमारत के नीचे लगभग 20 से 22 गद्दे बिछा दिए ताकि ऊपरी मंजिलों से कूदने में डर रहे लोगों को हौसला मिल सके कि वो कूदकर अपनी जान बचा लेंगे.

दिल्ली के मालवीय नगर में आग के बाद गली में कुछ ऐसा खौफनाक नजारा दिखा.
वीडियो में एक और फरिश्ता दिखता है, जो सीढ़ी चढ़कर इमारत के अंदर फंसी एक बूढ़ी महिला तक पहुंचता है. उन्हें सीढ़ी पर चढ़ाता है और सुरक्षित नीचे उतारने लगता है. महिला के खौफ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वो जमीन से चंद कदमों की दूरी पर आकर अपना धैर्य छोड़ देती हैं और नीचे फिसलकर गिर खड़े लोगों पर गिर जाती हैं. जाहिर है उन्हें गंभीर चोट आई होगी, लेकिन फिर भी वो उन बदनसीबों से ज्यादा सौभाग्यशाली रहीं, जो जलकर या धुएं में दम घुटने से अपनी जान गवां बैठे. वीडियो में आग की लपटें इमारत में तेजी से फैलती हुई, बिजली के तारों में आग लगती हुई और घना धुआं आसमान में उठता हुआ दिखाई दे रहा है.
अब भी 28 लोग अस्पताल में भर्ती
मालवीय नगर के होटल में ठहरे हुए कई लोग मैक्स सहित आस-पास के अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीजों के अटेंडेंट थे. वो तो आए थे कि अपनों का इलाज करा पाएं. उन्हें क्या पता था कि मौत उनका खुद इस होटल में इंतजार कर रही है. मैक्स अस्पताल से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, इस घटना के कारण 13 विदेशी नागरिकों सहित 15 मरीज अभी भी भर्ती हैं. छह मरीजों को वेंटिलेटर पर रखा गया है, जबकि नौ का इलाज आईसीयू और अस्पताल के वार्डों में चल रहा है.
अंजुम की दी हुई वीडियो देखें
'हमें बचा लो, हमें बचा लो...'
— NDTV India (@ndtvindia) June 5, 2026
मालवीय नगर अग्निकांड का एक और वीडियो आया सामने#MalviyaNagar pic.twitter.com/Wk9u1fqI8W
क्यों लगी थी आग और इतनी क्यों हुई भयानक
सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट होने का संदेह है. हालांकि पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि आग सिलेंडर विस्फोट के कारण लगी होगी. जांचकर्ताओं ने यह भी पाया है कि होटल अनिवार्य अग्नि सुरक्षा अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के बिना चल रहा था. एनडीटीवी को मिले दस्तावेजों से पता चलता है कि फ्लोरिश स्टे को बेड-एंड-ब्रेकफास्ट कैटगरी के तहत केवल छह कमरे (पहली और दूसरी मंजिल पर तीन-तीन) किराए पर देने की अनुमति थी. हालांकि, तहखाने सहित कुल 25 कमरे बना लिए गए थे. प्रारंभिक जांच में सुरक्षा संबंधी गंभीर खामियां भी सामने आई हैं. इमारत में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही रास्ता था, जिससे निकासी मुश्किल हो गई थी. जांचकर्ताओं ने पाया कि कई खिड़कियां सीलबंद थीं और मुख्य प्रवेश द्वार सेंसर से ऑपरेट होता था, जिससे आग के दौरान बचाव कार्य और भी जटिल हो गया था.
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