- दिल्ली में होटल फ्लोरिश इन में हुए भीषण अग्निकांड में गुरुग्राम के विवेक अग्रवाल और परिवार के छह सदस्य मारे गए
- आग बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर से शुरू हुई, जहरीले धुएं और संकरी गलियों के कारण बचाव कार्य में बाधा आई
- होटल में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन था, खिड़कियां कम और केवल एक संकरा रास्ता मौजूद था, जिससे बचाव मुश्किल हुआ
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित हौजरानी इलाके से एक बेहद दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है. बुधवार सुबह यहां के होटल फ्लोरिश इन में हुए भीषण अग्निकांड ने गुरुग्राम के एक हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह से तबाह कर दिया है. गुरुग्राम के सेक्टर-46 निवासी विवेक अग्रवाल, उनकी पत्नी, दो मासूम बच्चों और दो करीबी रिश्तेदारों (मौसा-मौसी) की इस हादसे में झुलसने और दम घुटने से दर्दनाक मौत हो गई. (साहिल मनवाना की रिपोर्ट)
पिता का हालचाल जानने दिल्ली आया था परिवार
जानकारी के अनुसार, विवेक अग्रवाल के पिता गंभीर रूप से बीमार हैं और दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है. पिता की सेहत का हालचाल जानने के लिए विवेक अपनी पत्नी और दोनों बच्चों के साथ दिल्ली आए थे. वहीं, विवेक के मौसा-मौसी भी बुजुर्ग का हालचाल जानने के लिए दिल्ली पहुंचे थे. सुबह अस्पताल में रुकने के बाद यह पूरा परिवार नाश्ता करने के लिए पास ही स्थित होटल फ्लोरिश इन के रेस्टोरेंट में गया था, लेकिन किसे पता था कि यह उनकी आखिरी सुबह साबित होगी.
बेसमेंट से उठी लपटें और बन गया डेथ ट्रैप
फायर चीफ ने बताया कि हौजरानी की बेहद तंग गलियों में बने इस पांच मंजिला होटल के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर से आग की शुरुआत हुई थी. देखते ही देखते आग और जहरीला धुआं ऊपर की मंजिलों तक फैल गया. इस इमारत में सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ी हुई थीं. पूरी पांच मंजिला इमारत में खिड़कियों का भारी अभाव था. आने-जाने के लिए केवल एक ही संकरा रास्ता था. हैरानी की बात यह है कि बंद शटर वाले बेसमेंट में भी लोग रह रहे थे, जिसका शटर काटकर दमकल कर्मियों को अंदर घुसना पड़ा.
शेफ ने बताई आंखों देखी: इलेक्ट्रिक चूल्हे में धमाके से भड़की आग
इस होटल के ग्राउंड फ्लोर पर चलने वाले रेस्टोरेंट के शेफ केसर नेगी ने एनडीटीवी (NDTV) से बात करते हुए इस खौफनाक मंजर की कहानी बयां की. नेगी ने बताया कि वह खुद किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर निकले. उन्होंने देखा कि जैसे ही रेस्टोरेंट का इलेक्ट्रिक चूल्हा चालू किया गया, वैसे ही एक जोरदार धमाका हुआ और चंद सेकंड में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया. हालांकि, पुलिस और फायर विभाग अभी जांच के बाद ही आधिकारिक तौर पर आग के कारणों की पुष्टि करेगा.
विदेशी नागरिक और मरीजों के अटेंडेंट बने शिकार
इस 25 कमरों वाले होटल में हादसे के वक्त 50 से ज्यादा लोग मौजूद थे, जिनमें से ज्यादातर विदेशी नागरिक थे जो दिल्ली के बड़े अस्पतालों में अपना इलाज कराने भारत आए थे. मरने वाले ज्यादातर लोग अस्पतालों में भर्ती मरीजों के तीमारदार थे, जो रात को रुकने या सुबह नाश्ते के लिए यहां आए थे. जब आग लगी, तब अधिकांश लोग सो रहे थे, जिसके कारण उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला. पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की आगे की तफ्तीश जारी है. विवेक अग्रवाल के इस पूरे परिवार के चले जाने से गुरुग्राम से लेकर दिल्ली तक हर कोई स्तब्ध है.
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