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This Article is From Nov 01, 2025

यमुना की सफाई पर दिल्ली में 'सियासी भूचाल' : AAP का दावा- 'सभी 37 STP फेल', BJP ने 'आप' शासन पर साधा निशाना

भारद्वाज ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के निरीक्षण पर आधारित RTI निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा कि अक्षरधाम, कोंडली, ओखला, केशोपुर जैसे सभी प्रमुख STP विफल रहे हैं. उन्होंने बताया कि केंद्र ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की रिपोर्टों में कथित अनियमितताओं के बाद CPCB को स्वतंत्र परीक्षण का आदेश दिया था.

यमुना की सफाई पर दिल्ली में 'सियासी भूचाल' : AAP का दावा- 'सभी 37 STP फेल', BJP ने 'आप' शासन पर साधा निशाना
  • दिल्ली के सभी 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निरीक्षण परीक्षणों में विफल पाए गए हैं.
  • आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर यमुना की सफाई के झूठे दावे करने और लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है.
  • भाजपा ने केजरीवाल सरकार को यमुना की सफाई में विफलता का जिम्मेदार ठहराया है.
नई दिल्ली:

यमुना की सफाई को लेकर दिल्ली की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घमासान छिड़ गया. आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि दिल्ली के सभी 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) निरीक्षण परीक्षणों में विफल हो गए हैं और भाजपा के 'स्वच्छ यमुना' के दावों को महज 'प्रचार का हथकंडा' बताया. पलटवार करते हुए, भाजपा ने इन विफलताओं के लिए अरविंद केजरीवाल सरकार के एक दशक लंबे शासन को जिम्मेदार ठहराया.

AAP का बड़ा हमला: 'स्वच्छ यमुना' का दावा झूठा, RTI में खुली पोल

AAP मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भाजपा पर यमुना की सफ़ाई के झूठे वादों से लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया. सौरभ भारद्वाज ने कहा, "उन्होंने डींगें हाँकीं कि अरविंद केजरीवाल दस साल में यमुना को साफ़ नहीं कर पाए, जबकि उन्होंने इसे सिर्फ़ आठ महीनों में कर दिखाया. उनके झूठे 'यमुना साफ़' तमाशे की हक़ीक़त पूरी दुनिया को पता चल चुकी है. सबसे चौंकाने वाली बात तो RTI से मिली जानकारी है, जिससे पता चलता है कि दिल्ली के सभी 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निरीक्षण में फेल हो गए हैं."

'37 में से 36 STP में मानव अपशिष्ट की मात्रा कई सौ गुना अधिक'
भारद्वाज ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के निरीक्षण पर आधारित RTI निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा कि अक्षरधाम, कोंडली, ओखला, केशोपुर जैसे सभी प्रमुख STP विफल रहे हैं. उन्होंने बताया कि केंद्र ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की रिपोर्टों में कथित अनियमितताओं के बाद CPCB को स्वतंत्र परीक्षण का आदेश दिया था.

सबसे चिंताजनक खुलासा: CPCB की जाँच से पता चला कि 37 में से 36 संयंत्रों में, उपचारित जल में फेकल कोलीफॉर्म (मानव अपशिष्ट) का स्तर अनुमेय सीमा से कई सौ गुना अधिक था. उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "इनमें से हर एक STP परीक्षण में विफल रहा. यह एक गंभीर मामला है."

BJP का पलटवार: 'विफलताओं के लिए 10 साल की केजरीवाल सरकार ज़िम्मेदार'
AAP के आरोपों पर तत्काल पलटवार करते हुए दिल्ली भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि AAP अपने ही रिकॉर्ड से दोष हटा रही है. प्रवीण शंकर कपूर ने कहा, "अगर 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में कोई कमी है, तो इसकी ज़िम्मेदारी अरविंद केजरीवाल की 10 साल की सरकार की है, न कि 8 महीने पुरानी भाजपा सरकार की."

कपूर ने AAP सरकार पर बिना किसी नतीजे के हज़ारों करोड़ रुपये खर्च करने का आरोप लगाया और सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की एक रिपोर्ट का हवाला दिया. कपूर ने भारद्वाज से उस CSE रिपोर्ट पर जवाब माँगा, जिसमें कथित तौर पर कहा गया है कि 2015 से 2022 के बीच यमुना की सफ़ाई के नाम पर ₹6,856 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद, केजरीवाल सरकार नदी को साफ़ करने में विफल रही.

अब दिल्ली की सियासत के केंद्र में यमुना का प्रदूषण
कपूर ने दावा किया कि भाजपा सरकार ने सिर्फ़ आठ महीनों में नजफ़गढ़ और शाहदरा नालों (जो यमुना के 84% प्रदूषण के लिए ज़िम्मेदार हैं) पर लगे STP में गुणात्मक सुधार शुरू किया है. दोनों प्रमुख दलों के बीच कटाक्षों और आरोपों के बीच, यमुना का प्रदूषण और इसकी सफ़ाई में विफलता के लिए किसे दोषी ठहराया जाए, यह मुद्दा एक बार फिर दिल्ली की राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है.

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