
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल अनिल बैजल को चिट्ठी लिखी है. जिसमें उन्होंने साफ़ और कड़े शब्दों में एलजी से मांग की है कि 'सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अक्षरशः लागू करें. गृह मंत्रालय को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की व्याख्या करने का कोई हक नहीं है. अगर आपको कोई शंका है तो सफ़ाई लेने ले लिए तुरंत सुप्रीम कोर्ट जाइये लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं करें'. केजरीवाल ने अपनी चिट्ठी में एलजी से कहा कि आप सुप्रीम कोर्ट के आदेश का ये हिस्सा तो मानते हो जिसमें कहा गया है एलजी कि अनुमति लेना जरूरी नहीं है, लेकिन उसी आदेश का वो हिस्सा नहीं मानते जिसमें लिखा है कि केंद्र सरकार के अधिकार केवल तीन विषयों तक सीमित हैं. वहां आपको कोर्ट के आदेश में से एक लाइन 'मामले सुप्रीम कोर्ट की उपयुक्त बेच के सामने रखें जाएं'. केजरीवाल ने एलजी से कहा कि कोई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बारे में ये कैसे कह सकता है कि वो सुप्रीम कोर्ट का आदेश सेलेक्टिव तरीके से लागू करेगा?.
केंद्र और एलजी अजीब तरीके से फैसले की व्याख्या कर रहे हैं, संशय दूर करने के लिये सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिये : अरविंद केजरीवाल
ख़त में केजरीवाल ने 5 मुद्दे गिनवाए हैं-जैसे सलाह, मंत्री परिषद का फैसला, कौन है दिल्ली सरकार, एलजी के पास फ़ाइल जाना जैसे 4 मुद्दों पर एलजी और केंद्र सरकार सहमत हैं, लेकिन आरक्षित विषय जैसे मुद्दे पर एलजी और केंद्र सरकार सहमत नहीं हैं. असल मे उपराज्यपाल और गृह मंत्रालय के मुताबिक दिल्ली सर्विसेज विभाग अभी भी आरक्षित विषय है. जिसपर दिल्ली सरकार का अधिकार नहीं है. क्योंकि 21 मई 2015 के नोटिफिकेशन में सर्विसेज आरक्षित विषय घोषित है और सुप्रीम कोर्ट ने उन नोटिफिकेशन के बारे में कुछ नहीं कहा है. एलजी के मुताबिक 9 मुद्दों पर अभी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है, जिसमे सर्विसेज भी एक है, लेकिन सीएम केजरीवाल और उनकी सरकार के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने साफ लिखा है कि केवल तीन विषय दिल्ली सरकार के दायरे में नही और वो हैं भूमि, पुलिस और कानून-व्यवस्था. यानी सर्विसेज स्पष्ट रूप से दिल्ली की चुनी हुई सरकार का विषय है जिसको एलजी या केंद्र सरकार उनको देने को तैयार नहीं हैं.
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