
नई दिल्ली:
दिल्ली में अब तक सात हजार से ज्यादा दुकानें सील हो चुकी हैं. लाजपत नगर में जब सीलिंग की कार्रवाई हुई थी तब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 31 मार्च को अनशन करने का ऐलान किया था. अब व्यापारी इस बात से नाराज हैं कि उनकी दुकानें लगातार सील हो रही है लेकिन सरकारें कुछ नहीं कर रही है.
लाजपत नगर बाजार के चेयरमैन के हाथ में कटोरा है तो किसी ने ककड़ी की दुकान लगा ली है. व्यापारी चार सौ से पांच सौ रुपए के कपड़े पचास से सौ रुपए में बेच रहे हैं. खरीददार भी ये मौका गंवाना नहीं चाहते हैं. दुकानदार कहते हैं जब दुकान सील हो गई तो वो सड़क पर ही सामान बेचेंगे.
लाजपत नगर के सूट मार्केट की चार सौ से ज्यादा दुकामें सील हो चुकी है. बीते 8 मार्च को इस जगह पर आकर अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया था कि सीलिंग अगर नहीं रुकी तो वे 31 मार्च को धरना देंगे. उनके इस घोषणा के बाद यहां मंच भी लगा दिया गया, एलईडी भी लगा दी गई लेकिन धरना देने कोई नहीं आया.
हालांकि अरविंद केजरीवाल ने अनशन न करने के पीछे सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का हवाला दिया है. लेकिन सीलिंग से बचने के लिए दुकानदार नेताओं के घर से लेकर सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्यों तक से मिल चुके हैं लेकिन सीलिंग से बंद हो चुके ताले की चाभी अब तक किसी के पास नहीं है. अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की 2 अप्रैल से चलने वाली दिन प्रति दिन सुनवाई पर लगी है.
लाजपत नगर बाजार के चेयरमैन के हाथ में कटोरा है तो किसी ने ककड़ी की दुकान लगा ली है. व्यापारी चार सौ से पांच सौ रुपए के कपड़े पचास से सौ रुपए में बेच रहे हैं. खरीददार भी ये मौका गंवाना नहीं चाहते हैं. दुकानदार कहते हैं जब दुकान सील हो गई तो वो सड़क पर ही सामान बेचेंगे.
लाजपत नगर के सूट मार्केट की चार सौ से ज्यादा दुकामें सील हो चुकी है. बीते 8 मार्च को इस जगह पर आकर अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया था कि सीलिंग अगर नहीं रुकी तो वे 31 मार्च को धरना देंगे. उनके इस घोषणा के बाद यहां मंच भी लगा दिया गया, एलईडी भी लगा दी गई लेकिन धरना देने कोई नहीं आया.
हालांकि अरविंद केजरीवाल ने अनशन न करने के पीछे सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का हवाला दिया है. लेकिन सीलिंग से बचने के लिए दुकानदार नेताओं के घर से लेकर सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्यों तक से मिल चुके हैं लेकिन सीलिंग से बंद हो चुके ताले की चाभी अब तक किसी के पास नहीं है. अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की 2 अप्रैल से चलने वाली दिन प्रति दिन सुनवाई पर लगी है.
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