नई दिल्ली:
मंदी की मार व्यापारियों के अलावा भगवान को भी झेलनी पड़ रही है. दिल्ली के सदर बाज़ार का कुतुब रोड बाज़ार भगवान की तस्वीरों और मूर्तियों का सबसे बड़ा बाज़ार है. व्यापारियों का कहना है कि गणेश, लक्ष्मी से लेकर दुर्गा माता तक की पूछ कम हो गई है. भगवान की हज़ारों तस्वीरों और मूर्तियों के साथ होने के बावजूद 15 साल से भगवान की थोक में तस्वीरें और मूर्तियां बेचने वाले संदेश सन्नाटे में बैठे हैं. बताते हैं कि हर साल अष्टमी के दिन उनकी दुकान में पैर रखने की जगह नहीं होती थी, लेकिन जीएसटी और नोटबंदी की मार ऐसी पड़ी कि गणेश भगवान से लेकर भोलेनाथ ख़रीदारों के इंतज़ार में बैठे हैं. संदेश के मुताबिक देश भर के व्यापारी आते थे, पर इस बार 20 फीसदी व्यापारी ही आ रहे हैं क्योंकि व्यापारी जीएसटी को लेकर परेशान हैं.
त्योहार के समय पूरे बाज़ार में पैर रखने की जगह नहीं होती थी. भगवान की तस्वीरें फ़ोटोग्राफ़िक काग़ज़ पर बनती हैं जिस पर 18 फीसदी जीएसटी है, जिस वजह से भगवान की तस्वीरों के बढ़े दामों की वजह से भक्तों ने अपने भगवान से दूरी बना ली है. पिछले साल करवा चौथ की एक तस्वीर की क़ीमत 30 रुपये थी जो इस साल बढ़कर 35 रुपये हो गई है. ग्राहक ख़ुद भी अपनी समस्याएं खुल कर बता रहे हैं.
VIDEO: त्योहार पर मंदी की मार, भगवान को ग्राहकों का इंतजार
ग्वालियर से करन थोक में दिवाली के लिए गणेश लक्ष्मी की तस्वीरें ख़रीदने आए हैं. उनका कहना है कि जीएसटी की वजह से बजट कम है इसलिए हर साल के उलट कुछ चुनिंदा तस्वीरें ही ले जाएंगे क्योंकि अभी जीएसटी भरी है और लोगों के बीच भी त्योहारों को लेकर कम उत्साह है. एक बात तो साफ़ है कि मंदी की मार आम आदमी और व्यापारियों के साथ ही भगवान को भी झेलनी पड़ रही है.
VIDEO: रावण के पुतले पर भी जीएसटी की मार
त्योहार के समय पूरे बाज़ार में पैर रखने की जगह नहीं होती थी. भगवान की तस्वीरें फ़ोटोग्राफ़िक काग़ज़ पर बनती हैं जिस पर 18 फीसदी जीएसटी है, जिस वजह से भगवान की तस्वीरों के बढ़े दामों की वजह से भक्तों ने अपने भगवान से दूरी बना ली है. पिछले साल करवा चौथ की एक तस्वीर की क़ीमत 30 रुपये थी जो इस साल बढ़कर 35 रुपये हो गई है. ग्राहक ख़ुद भी अपनी समस्याएं खुल कर बता रहे हैं.
VIDEO: त्योहार पर मंदी की मार, भगवान को ग्राहकों का इंतजार
ग्वालियर से करन थोक में दिवाली के लिए गणेश लक्ष्मी की तस्वीरें ख़रीदने आए हैं. उनका कहना है कि जीएसटी की वजह से बजट कम है इसलिए हर साल के उलट कुछ चुनिंदा तस्वीरें ही ले जाएंगे क्योंकि अभी जीएसटी भरी है और लोगों के बीच भी त्योहारों को लेकर कम उत्साह है. एक बात तो साफ़ है कि मंदी की मार आम आदमी और व्यापारियों के साथ ही भगवान को भी झेलनी पड़ रही है.
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