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स्वतंत्र भारद्वाज की पल-पल निगरानी करेगी पुलिस, एक गलती पर वापस जाना होगा जेल; जानें अदालत की सख्त शर्तें

स्वतंत्र भारद्वाज को जमानत देने के बाद कोर्ट ने सख्त शर्तें लगाते हुए उसके आचरण पर नजर रखने और जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है.

स्वतंत्र भारद्वाज को जमानत देने के बाद कोर्ट ने उस पर सख्त शर्तें लगाई है.

जंतर मंतर पर निशु आजाद के पिता से मारपीट करने के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को कई शर्तों के साथ अदालत ने दो सप्ताह की अंतरिम बेल दी है. कोर्ट का कहना है कि इस अवधि में उसके व्यवहार को परखा जाएगा और यदि सब सही रहता है तो ही उसे नियमित जमानत देने पर विचार किया जाएगा. अदालत ने कहा है कि नियमित जमानत देने से पहले अंतरिम जमानत देकर आरोपी के कंडक्ट को देखना चाहती है. हालांकि कोर्ट ने अंतरिम जमानत के साथ बेहद सख्त शर्तें लगाई हैं. आरोपी पर इस मामले से जुड़े किसी भी तथ्य, अपनी सफाई, शिकायतकर्ता या उसके परिवार को लेकर किसी भी तरह की बात करने से रोक लगाई गई है.

मीडिया और सोशल मीडिया पर बोलने से रोक

अदालत ने उसे आदेश दिया है कि वह सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक या प्रिंट मीडिया अथवा किसी अन्य सार्वजनिक मंच पर बयान, पोस्ट, वीडियो, पॉडकास्ट, इंटरव्यू या रील जारी न करे. कोर्ट ने कहा कि जमानत अदालत के भरोसे की अभिव्यक्ति है, इसे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाने वाली ट्रॉफी नहीं बनाया जा सकता. अदालत ने हाल ही की उस खबर का भी उल्लेख किया जिसमें हत्या के एक आरोपी द्वारा जमानत मिलने के बाद विजय जुलूस निकाले जाने की बात सामने आई थी. कोर्ट ने कहा कि आरोपी 10 दिन से कुछ अधिक समय से हिरासत में है और उसकी कस्टोडियल पूछताछ पूरी हो चुकी है.

नाबालिग बेटी की सुरक्षा पर जोर

बेंच ने कि आरोपी पर जिन मामलों में केस दर्ज हुआ है, उनमें अधिकतम सजा 7 साल की ही है. अदालत की प्रमुख चिंता शिकायतकर्ता और उसकी नाबालिग बेटी की सुरक्षा को लेकर है, जिसे कड़ी शर्तों के जरिए सुनिश्चित किया जा सकता है. अदालत ने आरोपी को शिकायतकर्ता, उसकी नाबालिग बेटी, परिवार के सदस्यों या किसी अभियोजन गवाह से सीधे या परोक्ष रूप से संपर्क करने से भी रोक दिया है. वह किसी को धमका, प्रभावित या प्रलोभित नहीं कर सकेगा. आरोपी को जांच में सहयोग करना होगा और जरूरत पड़ने पर जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा.

6 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

इसके अलावा अब इस केस की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी. इस दौरान नियमित सुनवाई की मांग पर विचार किया जाएगा. उस दिन नियमित जमानत या अंतरिम जमानत बढ़ाने के सवाल पर विचार किया जाएगा. जांच अधिकारी को तब तक आरोपी के आचरण और जमानत की शर्तों के पालन को लेकर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है.

यही नहीं बेंच ने जांच अधिकारी से कहा कि 23 जून को हुए विवाद के सबूत निकाले जाएं.  विशेष अदालत ने जांच एजेंसी को 23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से संबंधित CCTV फुटेज, पुलिस द्वारा बनाई गई वीडियो रिकॉर्डिंग, तस्वीरें और अन्य निगरानी सामग्री जुटाने का निर्देश दिया है.

सोशल मीडिया डेटा जुटाने के निर्देश

इसके अलावा आरोपी के मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड और टावर लोकेशन हासिल करने को कहा गया है. संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से अकाउंट और सब्सक्राइबर की जानकारी, अपलोड लॉग, IP एड्रेस और मूल फाइलें लेने तथा रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं. कोर्ट ने पेन ड्राइव, पॉडकास्ट और दोनों पक्षों की ओर से पेश वीडियो को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने को भी कहा है. इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि सामग्री वास्तविक है या उसमें किसी तरह की छेड़छाड़ अथवा कृत्रिम तरीके से बदलाव किया गया है.

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