Delhi News: अगर आप भी अक्सर कमर्शियल गाड़ियों से दिल्ली आते-जाते हैं, तो बॉर्डर के भारी ट्रैफिक जाम और लंबी लाइनों से आपको जल्द ही छुटकारा मिलने वाला है. दिल्ली नगर निगम (MCD) ने शहर के सभी 154 एंट्री पॉइंट्स को पूरी तरह से बैरियर-फ्री (Barrier-Free) बनाने की तैयारी कर ली है. इसका सीधा सा मतलब है कि अब आपको टोल चुकाने के लिए अपनी गाड़ी रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी. नेशनल हाईवे पर चलने वाले फास्टैग (FASTag) की तरह ही अब दिल्ली बॉर्डर पर भी चलती गाड़ी से अपने आप टैक्स कट जाएगा.
कैसे काम करेगा यह नया हाई-टेक सिस्टम?
MCD दिल्ली के बॉर्डर्स पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम लागू करने जा रहा है. मौजूदा रुको और पैसे दो (Stop-And-Pay) व्यवस्था को हटाकर इसे पूरी तरह ऑटोमैटिक बनाया जाएगा. मौजूदा टोल प्लाजा से लगभग 200 मीटर की दूरी पर खास कैमरे और सेंसर लगाए जाएंगे. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), RFID रीडर, राडार और हाई-डेफिनिशन ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरों का इस्तेमाल होगा. आपकी गाड़ी जैसे ही वहां से गुजरेगी, सिस्टम बिना गाड़ी रुके ही टैक्स काट लेगा.
क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
गाजीपुर, रजोकरी, बदरपुर और गुरुग्राम-दिल्ली बॉर्डर पर रोज हजारों कमर्शियल गाड़ियों की भीड़ लगती है. बार-बार गाड़ी रोकने और स्टार्ट करने से होने वाली तेल की बर्बादी रुकेगी. साथ ही, जाम में फंसी गाड़ियों के धुएं से होने वाले प्रदूषण में भारी कमी आएगी. MCD के मुताबिक, यह पूरी कवायद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत की जा रही है ताकि दिल्ली की हवा को साफ रखा जा सके. आंकड़े बताते हैं कि बीते एक साल (अप्रैल 2024 से मार्च 2025) में ही दिल्ली में 4 करोड़ से ज्यादा कमर्शियल गाड़ियां दाखिल हुईं. ऐसे में ट्रैफिक को स्मूद बनाने के लिए यह कदम बेहद जरूरी था.
टोल चोरी करने वालों की खैर नहीं!
अगर किसी गाड़ी में एक्टिव RFID टैग नहीं है और वह बिना पैसे चुकाए बॉर्डर पार करने की कोशिश करता है, तो वह बच नहीं पाएगा. वहां लगे हाई-डेफिनिशन कैमरे तुरंत गाड़ी का नंबर स्कैन कर लेंगे. इसके बाद ऐसे वाहन मालिकों पर दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 और टोल टैक्स बाय-लॉज, 2007 के तहत सीधे जुर्माना लगाया जाएगा.
कब तक लागू होगी यह सुविधा?
इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने के लिए MCD ने 5 जून को टेंडर जारी कर दिया है. जो भी कंपनी यह टेंडर जीतेगी, उसे अगले 5 सालों तक इस नए सिस्टम को डिजाइन करने, चलाने और मेंटेन करने की जिम्मेदारी दी जाएगी. MCD को इस नए और पारदर्शी सिस्टम से हर साल करीब 910 करोड़ रुपये के टोल राजस्व की उम्मीद है.
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