दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने मैक्स अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने के दिल्ली सरकार के फैसले का विरोध किया है.
- 22 हफ़्ते के जिंदा नवजात को मृत बताकर सौंपने का मामला
- कहा- बेहद प्रीमेच्योर था बच्चा, जिसका जिंदा रहना नामुमकिन था
- सरकार ने एक हजार परिवारों को भूखा मरने पर मजबूर कर दिया
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नई दिल्ली:
दिल्ली के शालीमार बाग के मैक्स हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द किए जाने के दिल्ली सरकार के फैसले का दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (DMA) ने कड़ा विरोध किया है. एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि दिल्ली के मैक्स अस्पताल के रद्द लाइसेंस को वापस लिया जाए और अगर ऐसा नहीं हुआ तो पूरी दिल्ली की मेडिकल व्यवस्था को ठप कर देंगे.
22 हफ़्ते के जिंदा नवजात को मृत बताकर माता-पिता को सौंपने के मामले में दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन मैक्स अस्पताल और डॉक्टरों के पक्ष में आकर खड़ा हो गया है. दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने सरकार को चेतावनी दी है कि आने वाले सोमवार या मंगलवार से दिल्ली में पूरी तरह मेडिकल व्यवस्था ठप कर दी जाएगी. डॉक्टर इस माहौल में घुटा हुआ महसूस कर रहे हैं. एसोसिएशन ने कहा है कि वह बच्चा बेहद प्रीमेच्योर था, उसका जिंदा रहना बहुत मुश्किल था. 20 से 22 हफ्ते का बच्चा था, जिसका बचना नामुमकिन था. हमारा कोर्ट 20 हफ्ते के बच्चे के एबॉर्शन की इजाजत देता है. कुछ स्थितियों में 24 हफ्ते भी हो जाता है.
यह भी पढ़ें : कुछ डॉक्टरों की लापरवाही पर अस्पताल को ही बंद कर देने से क्या हासिल?
एसोसिएशन ने कहा है कि मैक्स अस्पताल में क्या सिर्फ दो ही डॉक्टर काम करते थे? सरकार ने पॉपुलरिस्ट स्टेटमेंट के चलते 1000 परिवारों को भूखा मरने पर मजबूर कर दिया. हम सरकार के लाइसेंस रद्द करने के कदम का पुरजोर विरोध करते हैं. डाक्टरों की संस्था ने यह भी कहा है कि सारे सरकारी अस्पतालों के लाइसेंस भी रद्द हों क्योंकि वहां कोई सुविधा नहीं है.
VIDEO : लाइसेंस रद्द, मरीजों की भर्ती बंद
गौरतलब है कि जिंदा बच्चे को मृत बताने के मामले को दिल्ली सरकार ने काफी गंभीरता से लेते हुए अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया है. स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि हॉस्पिटल द्वारा नवजात को मृत बताए जाने की घटना को एकदम नहीं स्वीकारा जा सकता.
22 हफ़्ते के जिंदा नवजात को मृत बताकर माता-पिता को सौंपने के मामले में दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन मैक्स अस्पताल और डॉक्टरों के पक्ष में आकर खड़ा हो गया है. दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने सरकार को चेतावनी दी है कि आने वाले सोमवार या मंगलवार से दिल्ली में पूरी तरह मेडिकल व्यवस्था ठप कर दी जाएगी. डॉक्टर इस माहौल में घुटा हुआ महसूस कर रहे हैं. एसोसिएशन ने कहा है कि वह बच्चा बेहद प्रीमेच्योर था, उसका जिंदा रहना बहुत मुश्किल था. 20 से 22 हफ्ते का बच्चा था, जिसका बचना नामुमकिन था. हमारा कोर्ट 20 हफ्ते के बच्चे के एबॉर्शन की इजाजत देता है. कुछ स्थितियों में 24 हफ्ते भी हो जाता है.
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एसोसिएशन ने कहा है कि मैक्स अस्पताल में क्या सिर्फ दो ही डॉक्टर काम करते थे? सरकार ने पॉपुलरिस्ट स्टेटमेंट के चलते 1000 परिवारों को भूखा मरने पर मजबूर कर दिया. हम सरकार के लाइसेंस रद्द करने के कदम का पुरजोर विरोध करते हैं. डाक्टरों की संस्था ने यह भी कहा है कि सारे सरकारी अस्पतालों के लाइसेंस भी रद्द हों क्योंकि वहां कोई सुविधा नहीं है.
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गौरतलब है कि जिंदा बच्चे को मृत बताने के मामले को दिल्ली सरकार ने काफी गंभीरता से लेते हुए अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया है. स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि हॉस्पिटल द्वारा नवजात को मृत बताए जाने की घटना को एकदम नहीं स्वीकारा जा सकता.
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