- IIT दिल्ली के छात्र ऋषिकेश ने कैंपस में छठी मंजिल से कूदकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली
- मृतक छात्र के क्लासमेट्स ने एडमिनिस्ट्रेशन पर उसको परेशान करने का आरोप लगाया है
- प्रदर्शनकारी छात्र डीन और एसोसिएट डीन के इस्तीफे, निष्पक्ष जांच और परिवार के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं
"मैं ऋषिकेश को पर्सनली जानता था. पिछले दस दिनों में शायद मैंने कुछ महसूस ही नहीं किया है. हम प्रोटेस्ट में आते हैं, मांग करते हैं, चिल्ला रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है. एडमिनिस्ट्रेशन बातें कर रहा है लेकिन कई चीजें बहुत सिंपल हैं, अगर वो चाहें तो हमारी मांगें पूरी की जा सकती हैं. हम पहले दिन से प्रोटेस्ट में हैं. बच्चों में काफी गुस्सा है. मैं तब तक बैठा रहूंगा, जब तक मांगें नहीं पूरी हो जाती हैं और मेरे साथ बहुत ऐसे लोग हैं, जो ऐसा करेंगे. मैं इस प्रोटेस्ट का हिस्सा इसलिए हूं कि अगर इस तरह का एडमिनिस्ट्रेशन रहेगा और यही दिक्कत किसी और बच्चे को आती है, तब भी यही होगा."
आईआईटी दिल्ली में कथित तौर पर सुसाइड करने वाले छात्र ऋषिकेश के क्लासमेट ने ये बातें बहुत ही इमोशनल लहजे में कहीं. ऋषिकेश एमएससी फिजिक्स के छात्र थे. 29 अगस्त को खबर मिली कि आत्महत्या से उनकी मौत हो गई है. इसके बाद से संस्थान में प्रोटेस्ट हो रहा है. प्रदर्शनकारी छात्रों ने एडमिनिस्ट्रेशन पर कई तरह के आरोप लगाए हैं. इसके साथ ही, उनकी कई मांगें भी हैं.

ऋषिकेश दर-दर भटकता रहा
मृतक छात्र ऋषिकेश के क्लासमेट ने नाम ना छापने की शर्त पर एनडीटीवी से बात करते हुए बताया, "फिजिक्स डिपार्टमेंट की तरफ से ऋषिकेश को पूरा सपोर्ट मिला. एचओडी ने हर तरह से मदद की, उन्होंने सेमेस्टर ड्रॉप की भी छूट दे दी थी. लेकिन अलग-अलग विभागों ने ऋषिकेश को बहुत ज्यादा परेशान किया. वो दर-दर भटकता रहा और आखिकार जो कुछ हुआ, वो सबके सामने है."
ऋषिकेश के क्लासमेट कहते हैं, "जब ऋषिकेश हॉस्पिटल से ठीक होकर आए तो हमारी बात हुई थी. यह उनसे मेरी आखिरी बातचीत थी. उन्होंने कहा था- अर्रे भाई, कुछ नहीं है, मुझे ड्रॉप मिल जाए, तो मैं सारे पेपर्स निकाल लूंगा. सब कुछ आराम से हो जाएगा."

क्या है पूरा मामला?
आईआईटी दिल्ली के एमएससी फिजिक्स के छात्र ऋषिकेश (31) ने कथित तौर पर कैंपस में ही एक इमारत की छठी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली. इसके बाद से ही कैंपस में प्रोटेस्ट हो रहा है. फिजिक्स डिपार्टमेंट के छात्र का कहना है कि पिछले तीस महीने में आठ आत्महत्याएं हुई हैं, इसलिए छात्रों में ज्यादा गुस्सा है. स्टूडेंट्स का कहना है कि अगर कोई ठोस उपाय न किया गया, तो अन्य छात्रों के साथ भी इसी तरह के मामले सामने आएंगे.
छात्रों की क्या मांगें हैं?
प्रदर्शनकारी छात्र डीन और एसोसिएट डीन के इस्तीफे के साथ-साथ मामले की निष्पक्ष जांच और परिवार के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं. बीटेक के एक छात्र ने नाम ना छातने की शर्त पर कहा, "हमारी मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, डीन का इस्तीफा हो और एक करोड़ का कंपेंशेसन दिया जाए."

'एक करोड़ खुद के लिए नहीं चाहिए...'
छात्र ने कहा, "हमने एक करोड़ के कंपेंशेसन की मांग की है. उनकी (मृतक छात्र) मां का कहना है कि मुझे एक करोड़ खुद के लिए नहीं चाहिए. मैं चाहती हूं कि उसी पैसे से स्टूटडेंट्स के लिए कैंपस में हॉस्टल बनाया जाए."
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि प्रोटेस्ट को दबाने की पूरी कोशिश हो रही है लेकिन इस प्रदर्शन में हर कोर्स से संबंधित स्टूडेंट्स जुड़े हैं. जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होती, हम प्रोटेस्ट करते रहेंगे.
स्टूडेंट्स के नाम डायरेक्टर का मेल
28 अगस्त को प्रोटेस्ट का पांचवा दिन था. इस दिन IIT के सभी छात्रों को टैग करते हुए डायरेक्टर की तरफ से एक ईमेल आया, जिसमें 27 अगस्त की रात को हुए प्रोटेस्ट और नारों का जिक्र था.
छात्रों को भेजे गए ईमेल में डायरेक्टर ने कहा, "रात के वक्त प्रदर्शन काफी बढ़ गया था. कुछ प्रदर्शनकारी कैंपस के रिहायशी इलाकों तक पहुंच गए. उन्होंने फैकल्टी में प्रदर्शन किया. अपशब्दों और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया. इससे फैकल्टी के सदस्यों और उनके परिवारों की सुरक्षा और निजता प्रभावित हुई है. ऐसा करने वाले छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी."
इस ईमेल में कैंपस में शांति बनाए रखने की अपील करते हुए यह भी कहा गया कि छात्र प्रतिनिधियों और अन्य छात्रों से चर्चा के बाद कुछ तय कदमों पर काम शुरू हो चुका है. छात्रों के साथ बातचीत जारी है.

'एक भी गलत शब्द का इस्तेमाल नहीं हुआ'
ईमेल में कही गई बातों पर हमने छात्रों से बात की. बीटेक के एक छात्र का कहना है, "हम वही बच्चे हैं, जिनको संस्थान बोलता है कि ये हमारे होनहार बच्चे हैं, ऑल इंडिया रैंक होल्डर्स हैं. अब उन्हीं बच्चों पर ऐसे आरोप लगा रहे हैं. हमने कोई गाली नहीं दी हैं. प्रोटेस्ट के वक्त एक भी गलत शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया. हमने बस ये नारे लगाए- प्रोफेसर्स बाहर आओ, हमारा साथ दो. इसमें क्या गाली है."
'कुछ प्रोफेसर्स सपोर्ट के लिए बाहर आए...'
छात्रों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि हम किसी भी बिल्डिंग में नहींं घुसे. इमारतों के बाहर थे. हमने वहां पर सिर्फ नारे लगाए. और हमारा मकसद यही है कि हमें इग्नोर न किया जाए. हमारे सपोर्ट के लिए कुछ प्रोफेसर निकल कर बाहर भी आए थे और हमने उनके ताली भी बजाई.
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि छुट्टी और वीकेंड की वजह से प्रोटेस्ट में स्टूडेंट्स कम आए. हम सोमवार को बड़ी तादाद में इकट्ठा होकर प्रोटेस्ट करेंगे. जब तक हमारी मांगे नहीं मानी जाएंगी, हम प्रोटेस्ट करते रहेंगे.

मृतक ऋषिकेश के साथ क्या हुआ था?
एमएससी फिजिक्स डिपार्टमेंट के छात्र और मृतक छात्र के क्लासमेट ने बताया, "मैं ऋषिकेश को पर्सनली जानता था. वो बहुत अच्छा लड़का था. पहले सेमेस्टर में वह क्लास रीप्रजेंटेटिव था क्योंकि वह सबको बहुत पसंद था. उसका सेकेंड सेमेस्टर पूरा नहीं हो पाया था क्योंकि उसकी पर्सनल लाइफ में कुछ समस्याएं आईं, उसके पिता का निधन हुआ. और भी कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ा. इसके बाद ऋषिकेश मानसिक तौर पर स्टेबल नहीं था. ऋषिकेश हॉस्पिटल गया, उसका इलाज हुआ और अस्पताल से उसको सर्टिफिकेट मिला कि अब वह मेंटली और फिजिकली पूरी तरह से ठीक है."
वे आगे बताते हैं, "जब ऋषिकेश वापस कैंपस आया, तो उसे हॉस्टल देने से मना कर दिया गया. यहां पर कुछ अपार्टमेंट ऐसे हैं, जो स्पेशल मामलों में दिए जाते हैं, उसे वह भी नहीं दिए गए. वह जगह-जगह ठोकर खाता रहा. पूरे एडमिनिस्ट्रेशन ने उसे परेशान किया. वो एक ड्रॉप लेना चाहता था."
'आपसे एक बच्चा नहीं संभलता...'
बेहद गमगीन लहजे में मृतक छात्र के क्लासमेट कहते हैं, "ऋषिकेश की मां के सामने स्टूडेंट वेलफेयर की एसोसिएट डीन प्रोफेसर (ADSW) श्रीदेवी उपाध्याउला ने गलत बातें कहीं. उन्होंने कहा कि आपसे आपका एक बच्चा नहीं संभाला जा रहा है, हम इतने ज्यादा बच्चे संभालते हैं. सुसाइड के बाद भी वो नहीं रुकीं. उन्होंने कहा कि ऋषिकेश का इलाज नहीं किया जा सकता था. जबकि उसे हॉस्पिटल से सर्टिफिकेट मिल चुका था."
छात्रों का कहना है कि हमारी सोसायटी में मेंटल हेल्थ को लेकर कई तरह की बातें की जाती हैं, कोई खुल कर बात नहीं करना चाहता है. लेकिन यह तो आईआईटी दिल्ली है, अगर यहां पर इन सब चीजों का खयाल नहीं रखा जाएगा, तो क्या होगा.
'अब भी कई बच्चों की मेंटल हेल्थ ठीक नहीं...'
प्रदर्शनकारी छात्र कहते हैं, "पिछले 10-15 साल में एडमिनिस्ट्रेशन ने कई प्रोटेकॉल्स बनाए लेकिन जमीन पर काम नहीं होता है. अगर सब कुछ अच्छे से काम कर रहा होता तो सुसाइड नहीं होते और बच्चे खुश होते. संस्थान में अब भी कई बच्चों की मेंटल हेल्थ ठीक नहीं है. बनाए गए प्रोटोकॉल्स पर अच्छे से काम नहीं हो रहा है. प्रोफेसर्स को भी और ज्यादा इंटरएक्टिव होने की जररूत है."
ये भी पढे़ं-IITs में पिछले पांच सालों में कितने छात्रों की हुई मौत? दिल्ली केस के बीच देख लीजिए आंकड़े
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं