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IITs में पिछले पांच सालों में कितने छात्रों की हुई मौत? दिल्ली केस के बीच देख लीजिए आंकड़े

आईआईटी दिल्ली में छात्र खुदकुशी के बाद कैंपस में गुस्सा है. कुछ महीने पहले भी यहां एक छात्र ने जान दे दी थी. आंकड़ों के अनुसार, पिछले 5 सालों में देश के इन टॉप इंस्टीट्यूट में ऐसे केस काफी ज्यादा बढ़ गए हैं. इसके आंकड़े काफी डराने वाले हैं.

IITs में पिछले पांच सालों में कितने छात्रों की हुई मौत? दिल्ली केस के बीच देख लीजिए आंकड़े
IIT में खुदकुशी के मामले

IIT Student Suicide Data: आईआईटी दिल्ली के कैंपस में बिहार के बेगूसराय के छात्र ऋषिकेश कुमार के खुदकुशी मामले ने एक बार फिर देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग संस्थानों की अंदरूनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एमएससी फिजिक्स के छात्र ऋषिकेश ने 22 अगस्त को लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल से कूदकर जान दे दी. हॉस्टल न मिलना, प्रोजेक्ट रुकना और प्रशासनिक स्तर पर सपोर्ट की कमी जैसे कई आरोप सामने आने के बाद साथी छात्र सड़कों पर उतर आए हैं. ये घटना कोई अकेली नहीं है. इससे पहले मार्च 2026 में भी आईआईटी दिल्ली में बीटेक फर्स्ट ईयर के छात्र ने जान दी थी. पिछले 5 सालों के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं, जो बताते हैं कि देश के टॉप संस्थानों में पढ़ने वाले होनहार छात्र भारी मानसिक तनाव और सिस्टम की बेरुखी से जूझ रहे हैं. 

आईआईटी दिल्ली में छात्रों का फूटा गुस्सा

ऋषिकेश की मौत के बाद कैंपस में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है. छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार कर जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों डीन, एसोसिएट डीन और फिजिक्स एचओडी के इस्तीफे और पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग की है. बढ़ते विरोध को देखते हुए आईआईटी दिल्ली प्रशासन ने 5 सदस्यीय बाहरी जांच समिति बनाई है, जिसे दो हफ्ते में अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है.

IIT कैंपस में पिछले 5 सालों में कितने छात्रों की मौत

ग्लोबल आईआईटी एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप (Global IIT Alumni Support Group) के आंकड़ों के मुताबिक, देश के अलग-अलग आईआईटी कैंपस में 5 सालों (2021 से 2025) के दौरान कम से कम 65 छात्रों ने अपनी जान दी. इनमें से 30 आत्महत्याएं अकेले पिछले 2 सालों में दर्ज की गई हैं. आईआईटी दिल्ली में इन 5 सालों में 8 छात्रों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं.

सबसे ज्यादा केस किस IIT में सामने आए

2021-2025 डेटा में IIT खड़गपुर 11 मामलों के साथ सबसे ऊपर है. इसके बाद IIT कानपुर और IIT मद्रास में 9-9 मामले और IIT दिल्ली में 8 मामले बताए गए हैं. आईआईटी कानपुर को लेकर जनवरी 2026 में खास चिंता सामने आई थी. एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ पिछले दो सालों में वहां 8 मामले सामने आए थे और 2021-2025 की पांच साल में कुल संख्या 9 बताई गई. ये देश के सभी 23 IITs में उस दौरान के सबसे ज्यादा आंकड़ों में से एक है.

आखिर क्यों टूट रहे हैं देश के सबसे तेज दिमाग

1. प्रशासन की अनदेखी और फैमिली प्रेशर

छात्र संगठनों, पूर्व छात्रों और जानकारों के अनुसार इन मामलों को सिर्फ पढ़ाई का तनाव कहकर खारिज नहीं किया जा सकता. हॉस्टल अलॉटमेंट में दिक्कतें, नियमों की सख्ती और छात्रों की बेसिक समस्याओं को समय पर न सुलझाना छात्रों को कैंपस से अलग-थलग कर देता है. हमेशा नंबर वन रहने वाले छात्रों पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करने का जबरदस्त फैमिली और सोशल प्रेशर रहता है.

2. काउंसलिंग सिस्टम की नाकामी

कागजों पर काउंसलिंग सेल और मानसिक स्वास्थ्य कमेटियां मौजूद हैं, लेकिन जब तक छात्र गंभीर संकट में नहीं पहुंच जाता, तब तक संस्थान की तरफ से कोई सक्रिय मदद नहीं मिलती. कई छात्र लैंग्वेज, बैकग्राउंड और सामाजिक भेदभाव के कारण खुद को क्लास और कैंपस में अकेला महसूस करने लगते हैं.

क्या कहते हैं NCRB के आंकड़े

NCRB के आंकड़े बताते हैं कि देश में हर दिन औसतन करीब 36 छात्र खुदकुशी करते हैं. देश के टॉप इंस्टीट्यूट होने के नाते आईआईटी प्रशासन और सरकार को सिर्फ जांच कमेटियां बनाने से आगे बढ़कर छात्रों के मेंटल हेल्थ, हॉस्टल प्रबंधन और दोस्ताना माहौल तैयार करने पर ठोस कदम उठाने होंगे.

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