दिल्ली के मास्टर प्लान 2047 पर पहली राजनीतिक चर्चा हो गई है. दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के साथ सांसदों और विधायकों ने नए मास्टर प्लान के अहम प्रावधानों पर चर्चा की. जनप्रतिनिधियों ने अपने विस्तृत सुझाव देने के लिए 15 दिन का समय मांगा है. 1 सितंबर को हुई बैठक में तीन लोकसभा सांसदों और दिल्ली विधानसभा के 33 सदस्यों ने हिस्सा लिया. बैठक में लैंड पूलिंग, ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD), हाई-डेंसिटी कॉरिडोर (HDC), लैंड डेवलपमेंट एरिया (LDA) और अनधिकृत कॉलोनियों से जुड़े प्रावधानों पर चर्चा हुई.
DDA ने जनप्रतिनिधियों को मास्टर प्लान के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी. हालांकि, DDA की ओर से यह नहीं बताया गया है कि सांसदों या विधायकों ने किसी खास प्रावधान में बदलाव की मांग की है. वे अब 15 दिन में अपने विस्तृत सुझाव लिखित रूप में देंगे.
40 लाख नए घरों का लक्ष्य
मास्टर प्लान 2047 में 2047 तक करीब 40 लाख अतिरिक्त घरों की परिकल्पना की गई है. इसमें नए विकास के साथ पुराने इलाकों के पुनर्विकास, लैंड पूलिंग और ट्रांजिट कॉरिडोर के आसपास आवास पर जोर है.
ट्रांजिट कॉरिडोर के आसपास करीब 18 लाख किफायती घरों का प्रावधान किया गया है. ऐसे में लैंड पूलिंग और हाई-डेंसिटी डेवलपमेंट दिल्ली के भविष्य के आवास से सीधे जुड़े मुद्दे हैं. लैंड पूलिंग के जरिए बड़े भूखंडों को एक साथ लाकर योजनाबद्ध विकास का रास्ता तैयार किया जाता है. इसके तहत आवास के साथ सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के विकास की योजना होती है.
मेट्रो रूट के आसपास ज्यादा विकास
मास्टर प्लान में TOD और हाई-डेंसिटी कॉरिडोर के जरिए प्रमुख सार्वजनिक परिवहन मार्गों के आसपास ज्यादा घनत्व वाला विकास प्रस्तावित है. इसका मकसद घर, दफ्तर और दूसरी सुविधाओं को सार्वजनिक परिवहन के करीब लाना है. योजना में पुराने ग्रुप हाउसिंग और आवासीय इलाकों के पुनर्विकास के प्रावधान भी हैं.
यमुना, कॉलोनियों पर भी आगे चर्चा
अनधिकृत कॉलोनियों के अलावा आगे की बैठकों में यमुना और ब्लू-ग्रीन जोन, कम घनत्व वाले इलाके, हेरिटेज संरक्षण, मिश्रित उपयोग वाले क्षेत्र, झुग्गी पुनर्विकास, ट्रैफिक डी-कंजेशन और शिक्षा एवं मेडिकल हब जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. DDA अगले तीन महीनों में करीब 20 बैठकें करने की योजना बना रहा है. इनमें सरकारी एजेंसियों, परिवहन संस्थाओं, आर्किटेक्ट और टाउन प्लानर, ग्रुप हाउसिंग प्रतिनिधियों, किसानों और जमीन मालिकों तथा बाजार संगठनों से चर्चा होगी.
फिलहाल पहली बैठक के बाद अगला कदम सांसदों और विधायकों के 15 दिन के भीतर लिखित सुझाव देना है. इन्हीं सुझावों से यह संकेत मिलेगा कि मास्टर प्लान 2047 को लागू करने के दौरान किन मुद्दों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा.
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