दिव्यांग अधिकारी ऋषिराज भाटी को डीडीए ने ज्वाइन करने के एक घंटे बाद ही हटा दिया था.
- जिम्मा संभालने के एक घंटे के भीतर पद से हटा दिया था
- विकलांग होने के कारण पद के योग्य न होने की दलील दी थी
- डॉ ऋषिराज भाटी ने कहा- किसी भी सूरत में डीडीए नहीं जाऊंगा
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नई दिल्ली:
विकलांग अधिकारी को अपमानित करने के बाद डीडीए ने यू-टर्न ले लिया है. जिस अधिकारी को पहले अपमानित किया, अब उनका स्वागत कर रहा है. डीडीए में पहले एक विकलांग जनसंपर्क अधिकारी को नियुक्त किया गया उसके बाद जब उसने जिम्मा संभाला तो उसको एक घंटे के भीतर पद से हटा दिया गया. अब जब मीडिया में खबर चली तो डीडीए ने अपने फैसले पर यू-टर्न ले लिया है.
डॉ ऋषिराज भाटी को डीडीए ने यह दलील देकर जनसंपर्क निदेशक के पद से केवल एक घंटे में हटा दिया कि वे विकलांग हैं. उनको अब डीडीए ने चिठ्ठी लिखी है. डीडीए ने कहा है कि 'अगर डीडीए की कार्रवाई से आपकी भावनाएं आहत हैं तो हमें खेद है. हालांकि यह गैर इरादतन और आपसी सहमति से हुआ था. जनसंपर्क निदेशक के पद की जिम्मेदारी निभाने के लिए अगर आप खुद को उपयुक्त मानते हैं तो 15 दिन के भीतर ज्वाइन करें, आपका स्वागत है.'
ऋषिराज भाटी को पद से हटाते हुए डीडीए ने दलील थी कि 'डीडीए में डायरेक्टर (जनसंपर्क) का पद स्वभावतः फील्ड वर्क वाला होता है जिसमें अधिकारी को डीडीए की विभिन्न साइटों पर मौजूद होना होता है, जैसे डीडीए पार्क, तोड़फोड़ वाली साइट, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बायो डाइवर्सिटी पार्क वगैरह. इसमें अफसर की बड़े पैमाने पर बाहर की ड्यूटी होती है जिसमें शारीरिक काम भी होता है. इस पद के साथ जुड़ी जिम्मेदारी को देखते हुए ऋषिराज भाटी को परेशानी हो सकती है और यह डीडीए के हित में भी नहीं होगा. इसलिए ऋषिराज भाटी को तुरंत उनके पिछले विभाग दिल्ली ट्रांसको में वापस भेजा जा रहा है.'
एनडीटीवी इंडिया ने जब डॉ ऋषिराज भाटी से बात कर डीडीए के जवाब पर उनकी प्रतिक्रिया ली तो वे बोले 'मैं अब किसी भी सूरत में डीडीए नहीं जाऊंगा, बात पद की नहीं मेरे सम्मान की है जिसको इन लोगों ने ठेस पहुंचाई है.'
डीडीए ने दिव्यांग अधिकारी को किया अपमानित, नियुक्ति के एक घंटे बाद हटाया
सवाल यह है कि जब डॉ ऋषिराज भाटी पहले जनसंपर्क निदेशक के पद के लिए उपयुक्त नहीं थे तो उनको नियुक्त क्यों किया गया? नियुक्त करने के बाद उपयुक्त नहीं हैं यह अचानक कैसे हुआ? और जब दो दिन पहले तक वे इस पद के लिए उपयुक्त नहीं थे तो अब कैसे हो गए हैं?
डॉ ऋषिराज भाटी को डीडीए ने यह दलील देकर जनसंपर्क निदेशक के पद से केवल एक घंटे में हटा दिया कि वे विकलांग हैं. उनको अब डीडीए ने चिठ्ठी लिखी है. डीडीए ने कहा है कि 'अगर डीडीए की कार्रवाई से आपकी भावनाएं आहत हैं तो हमें खेद है. हालांकि यह गैर इरादतन और आपसी सहमति से हुआ था. जनसंपर्क निदेशक के पद की जिम्मेदारी निभाने के लिए अगर आप खुद को उपयुक्त मानते हैं तो 15 दिन के भीतर ज्वाइन करें, आपका स्वागत है.'
ऋषिराज भाटी को पद से हटाते हुए डीडीए ने दलील थी कि 'डीडीए में डायरेक्टर (जनसंपर्क) का पद स्वभावतः फील्ड वर्क वाला होता है जिसमें अधिकारी को डीडीए की विभिन्न साइटों पर मौजूद होना होता है, जैसे डीडीए पार्क, तोड़फोड़ वाली साइट, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बायो डाइवर्सिटी पार्क वगैरह. इसमें अफसर की बड़े पैमाने पर बाहर की ड्यूटी होती है जिसमें शारीरिक काम भी होता है. इस पद के साथ जुड़ी जिम्मेदारी को देखते हुए ऋषिराज भाटी को परेशानी हो सकती है और यह डीडीए के हित में भी नहीं होगा. इसलिए ऋषिराज भाटी को तुरंत उनके पिछले विभाग दिल्ली ट्रांसको में वापस भेजा जा रहा है.'
एनडीटीवी इंडिया ने जब डॉ ऋषिराज भाटी से बात कर डीडीए के जवाब पर उनकी प्रतिक्रिया ली तो वे बोले 'मैं अब किसी भी सूरत में डीडीए नहीं जाऊंगा, बात पद की नहीं मेरे सम्मान की है जिसको इन लोगों ने ठेस पहुंचाई है.'
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सवाल यह है कि जब डॉ ऋषिराज भाटी पहले जनसंपर्क निदेशक के पद के लिए उपयुक्त नहीं थे तो उनको नियुक्त क्यों किया गया? नियुक्त करने के बाद उपयुक्त नहीं हैं यह अचानक कैसे हुआ? और जब दो दिन पहले तक वे इस पद के लिए उपयुक्त नहीं थे तो अब कैसे हो गए हैं?
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