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This Article is From Apr 05, 2017

केजरीवाल को झेलनी पड़ेंगी पेशी पर पेशी, मानहानि के केसों की लंबी लिस्ट..

केजरीवाल को झेलनी पड़ेंगी पेशी पर पेशी, मानहानि के केसों की लंबी लिस्ट..
अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मानहानि के कई मामले दर्ज हैं जिन पर सुनवाई होनी है.
नई दिल्ली: दिल्ली के पटियाला हाउस में अरविंद केजरीवाल की तारीख पर तारीख पड़ती जाती रह सकती है. क्योंकि इस अदालत में आम आदमी पार्टी के संजोयक अरविंद केजरीवाल के ख़िलाफ़ कई मामले चल रहे हैं. ये सारे मामले मानहानि के हैं. अगर सिर्फ वीआइपी मामलों की बात करें तो अरुण जेटली के अलावा मानहानि का एक केस नितिन गडकरी ने भी कर रखा है.

इसके अलावा पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल के बेटे अमित सिब्बल ने इसी अदालत में केजरीवाल पर मानहानि का केस किया है. शीला दीक्षित के निजी सचिव रहे पवन खेड़ा ने भी केजरीवाल को प्रतिवादी बना रखा है. डीडीसीए के चेतन चौहान ने भी केजरीवाल पर एक मुकदमा किया है और बीजेपी सांसद रमेश विधूड़ी ने भी केजरीवाल पर एक केस कर रखा है, जिसकी अगली तारीख़ 27 मई को है. इस दिन मुख्यमंत्री को सबूत पेश करने हैं.

रमेश विधूड़ी के वकील करण सिंह का कहना है कि "मुख्यमंत्री ने कहा था कि रमेश विधूड़ी के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले चल रहे हैं इसको लेकर विधूड़ी ने मामला दर्ज करा दिया. मुख्यमंत्री के पक्ष के लिए नोटिस जारी हो गया है, अगली तारीख पर गवाही दर्ज होगी."

अरुण जेटली के मामले में तो जिस तरह दिल्ली सरकार ने नियमों पर ताक पर रख राम जेठमालनी को केजरीवाल का वकील बनाया उससे कानूनी हलकों में हलचल है.  एनडीटीवी इंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली सरकार ने कागजी कर्रवाई तब शुरू की जब जेठमलानी ने उन्हें बिल भेजा. उप मुख्यमंत्री ने दिल्ली के कानून मंत्रालय को लिखा कि जेठमलानी का बिल चुकाया जाए. कानून मंत्रालय ने पूछा कि भुगतान किस मद में हो. तब मनीष सिसोदिया ने फाइल प्रशासनिक मंत्रालय को भेज दी और कहा कि उप राज्यपाल को भेजने की जरूरत नहीं. जब उन्होंने भी बिल नहीं चुकाया तो आधी अधूरी फाइल उप राज्यपाल को भेज दी गई.

वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी ने एनडीटीवी इंडिया से कहा " जब मुख्यमंत्री ने काफी गंभीर आरोप लगाए. कहा कि DDCA मामले में सेक्स सलीज है. उन्हें आरोप लगाने से पहले सोचना चाहिए था कि पैसे कौन देगा. अब जनता से पूछने से क्या होगा."

दिलचस्प यह है कि जेठमलानी जिस पेशी के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री से तीन लाख लेते रहे हैं, उसके लिए दिल्ली सरकार से 22 लाख मांग रहे हैं. वैसे दलील ये दी जा रही है कि जेठमलानी पंजाब सरकार के पैनल पर हैं, दिल्ली सरकार के नहीं.  मामले की गंभीरता समझते हुए दिल्ली के उप राज्यपाल अनिल बैजल ने सोलिसिटर जनरल से राय मांगी है.
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