दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल.
- दिल्ली के बवाना में 23 अगस्त को होने वाले उप चुनाव
- केजरीवाल ने अपनी सरकार के ढाई साल के काम गिनाए.
- पिछले कुछ समय से आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता कुछ कम हो रही है
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नई दिल्ली:
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार को बने दो साल से कुछ ज्यादा समय हो गया है. दिल्ली के बवाना में 23 अगस्त को होने वाले उप चुनाव से पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि दिल्ली के ग्रामीण इलाके के लिए जितना काम उनकी सरकार ने किया है, उतना किसी दूसरी सरकार ने नहीं किया. केजरीवाल ने बवाना में एक रैली को संबोधित करते हुए अपनी सरकार के ढाई साल के काम गिनाए.
परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत का हवाला देते हुए केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने मंत्री पद के लिए गहलोत को चुना, ताकि ग्रामीण इलाके से जुड़े मुद्दों को और प्रभावी ढंग से निपटाया जा सके. गहलोत नजफगढ़ से विधायक हैं.
यह भी पढ़ें : बीजेपी को झटका : बवाना के पूर्व विधायक ने भाजपा छोड़ी, उपचुनाव से पहले AAP में शामिल होंगे
बता दें कि पिछले कुछ समय से आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता कुछ कम हो रही है. इससे लगातार मिल रही हारों पर आम आदमी पार्टी ने अब सारा ध्यान दिल्ली पर केंद्रित करने का फैसला लिया है. कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा थम गई है और पंजाब विधानसभा चुनाव में फीके प्रदर्शन के बाद उसने गुजरात तथा हिमाचल प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनाव न लड़ने का फैसला किया है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी दिल्ली में एक बार फिर खुद को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है. उन्होंने राज्य में पर्याप्त संगठनात्मक क्षमता के अभाव का हवाला दिया.
VIDEO: सीवर में मौत के बाद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पीड़ितों से मिले
पार्टी ने गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव न लड़ने का फैसला आधिकारिक करने से पहले राज्य के नेताओं के एक वर्ग को हाल ही में समझाया है जो विधानसभा चुनाव लड़ने के पक्ष में थे. जून में राज्य के नेताओं ने पार्टी नेतृत्व को संगठनात्मक क्षमता के बारे में बताया था लेकिन तब चुनाव लड़ने को लेकर असमंजस की स्थिति थी.
परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत का हवाला देते हुए केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने मंत्री पद के लिए गहलोत को चुना, ताकि ग्रामीण इलाके से जुड़े मुद्दों को और प्रभावी ढंग से निपटाया जा सके. गहलोत नजफगढ़ से विधायक हैं.
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बता दें कि पिछले कुछ समय से आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता कुछ कम हो रही है. इससे लगातार मिल रही हारों पर आम आदमी पार्टी ने अब सारा ध्यान दिल्ली पर केंद्रित करने का फैसला लिया है. कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा थम गई है और पंजाब विधानसभा चुनाव में फीके प्रदर्शन के बाद उसने गुजरात तथा हिमाचल प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनाव न लड़ने का फैसला किया है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी दिल्ली में एक बार फिर खुद को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है. उन्होंने राज्य में पर्याप्त संगठनात्मक क्षमता के अभाव का हवाला दिया.
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पार्टी ने गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव न लड़ने का फैसला आधिकारिक करने से पहले राज्य के नेताओं के एक वर्ग को हाल ही में समझाया है जो विधानसभा चुनाव लड़ने के पक्ष में थे. जून में राज्य के नेताओं ने पार्टी नेतृत्व को संगठनात्मक क्षमता के बारे में बताया था लेकिन तब चुनाव लड़ने को लेकर असमंजस की स्थिति थी.
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