अरविंद केजरीवाल की फाइल फोटो
- विधानसभा समिति ने किया तलब
- कोर्ट में आदेश पर रोक लगाने की मांग को लेकर पहुंचे अंशु प्रकाश
- सीएम से माफी मांगने की बात पर अड़े हैं अधिकारी
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नई दिल्ली:
आम आदमी पार्टी और दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश की लड़ाई अब अदालत पहुंच गई है. दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर करके दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की है जिसमे मुख्य सचिव अंशु प्रकाश समेत दो और IAS अफसरों को सोमवार 5 मार्च को दोपहर 3 बजे समिति के समक्ष पेश होने को कहा गया है. दरअसल पिछले महीने 21 फरवरी को दिल्ली विधानसभा की प्रश्न एवं संदर्भ समिति की बैठक थी जिसमे मुख्य सचिव मुख्य सचिव अंशु प्रकाश, रजिस्ट्रार और कॉपरेटिव सोसाइटी जे बी सिंह और पूर्व रजिस्ट्रार ऑफ कॉपरेटिव सोसाइटी शूरबीर सिंह को बुलाया गया था. लेकिन तीनों IAS अधिकारियों में से ना कोई बैठक में आया ना ही कोई सूचना दी .
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इसके बाद ये मामला विशेषाधिकार समिति को भेज दिया गया और 1 मार्च को विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने मुख्य सचिव अंशु प्रकाश समेत तीनों IAS अधिकारियों को तलब किया. आपको बता दें कि दिल्ली विधानसभा की प्रश्न और संदर्भ समिति की बैठक दिल्ली नागरिक सहकारी बैंक में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में कार्रवाई और जवाबदेही तय करने के लिए की गई थी. बीते दिनों मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ हुई मारपीट के बाद अधिकारियों ने फैसला किया है कि वो अब किसी मंत्री या विधायक के साथ तब तक बैठक नही करेंगे जब तक केजरीवाल माफ़ी नही मांगते.
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इसी दौरान दिल्ली विधानसभा की प्रश्न और संदर्भ समिति ने एक बयान जारी कर कहा कि दिल्ली के मुख्य सचिव विधानसभा समिति की कार्यवाही में भाग ना लेने के लिए झूठ का सहारा ले रहे हैं. समिति के मुताबिक यह समिति दिल्ली नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड में कम से कम 100 करोड़ रुपये के एक घोटाले के संबंध में मार्च 2017 के बाद से इस मामले की जांच कर रही है. और दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर की गई अपनी नई याचिका में, दिल्ली सरकार के वर्तमान मुख्य सचिव, श्री अंशु प्रकाश ने तथ्यों को बिगाड़ने का प्रयास किया है.
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गौरतलब है कि समिति के सामने गैर-उपस्थिति के लिए उन्हें विशेषाधिकार नोटिस भेजा गया था जिसे वो कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं. समिति के अनुसार उनकी कार्यवाही के संबंध में दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर अपने हलफनामे में अंशु प्रकाश की ओर से झूठ बोला गया, जिसे लेकर प्रश्न और संदर्भ समिति अपनी आपत्ति जता रही है. समिति ने अंशु प्रकाश को चुनौती देते हुए कहा कि अगर अंशु प्रकाश सही हैं तो उन्हें अपने हलफ़नामे में दी गई बातों पर अड़े रहना चाहिए.
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साथ ही वह अपने हलफनामे की सामग्री में कोई बदलाव ना करें, क्योंकि जो बातें उन्होंने अपने हलफनामे में लिखीं हैं वो एक शपथ के अंतर्गत कोरा झूठ बोला गया है.
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इसके बाद ये मामला विशेषाधिकार समिति को भेज दिया गया और 1 मार्च को विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने मुख्य सचिव अंशु प्रकाश समेत तीनों IAS अधिकारियों को तलब किया. आपको बता दें कि दिल्ली विधानसभा की प्रश्न और संदर्भ समिति की बैठक दिल्ली नागरिक सहकारी बैंक में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में कार्रवाई और जवाबदेही तय करने के लिए की गई थी. बीते दिनों मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ हुई मारपीट के बाद अधिकारियों ने फैसला किया है कि वो अब किसी मंत्री या विधायक के साथ तब तक बैठक नही करेंगे जब तक केजरीवाल माफ़ी नही मांगते.
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गौरतलब है कि समिति के सामने गैर-उपस्थिति के लिए उन्हें विशेषाधिकार नोटिस भेजा गया था जिसे वो कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं. समिति के अनुसार उनकी कार्यवाही के संबंध में दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर अपने हलफनामे में अंशु प्रकाश की ओर से झूठ बोला गया, जिसे लेकर प्रश्न और संदर्भ समिति अपनी आपत्ति जता रही है. समिति ने अंशु प्रकाश को चुनौती देते हुए कहा कि अगर अंशु प्रकाश सही हैं तो उन्हें अपने हलफ़नामे में दी गई बातों पर अड़े रहना चाहिए.
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साथ ही वह अपने हलफनामे की सामग्री में कोई बदलाव ना करें, क्योंकि जो बातें उन्होंने अपने हलफनामे में लिखीं हैं वो एक शपथ के अंतर्गत कोरा झूठ बोला गया है.
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