प्रतीकात्मक फोटो.
- झांसी-ग्वालियर मार्ग पर वाहन में ले जाई जा रही थीं मूर्तियां
- दो प्राचीन मूर्तियां और एक पेंटिंग बरामद की गई
- मूर्तियां और कलाकृति किसी स्थान से चुराए जाने का संदेह
भोपाल:
मध्यप्रदेश के विशेष कार्य बल (एसटीएफ ) ने झांसी-ग्वालियर मार्ग पर दो बेशकीमती मूर्तियों और एक कलाकृति के साथ दो तस्करों को पकड़ने में सफलता पाई है. दोनों आरोपियों के भारतीय जनता पार्टी से करीबी रिश्ते बताए जाते हैं.
एसटीएफ की ओर से गुरुवार को बताया गया है, "बुधवार की रात मुखबिर की सूचना पर एसटीएफ भोपाल के दल ने झांसी-ग्वालियर मार्ग के चिरुला नाके पर पुरातत्व महत्व की दो मूर्तियों और कलाकृति के साथ प्रवीण अग्रवाल और राजेंद्र राजपूत को पकड़ा, वे जायलो वाहन से ग्वालियर की तरफ जा रहे थे."
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एसटीएफ के मुताबिक, "एक मूर्ति काले रंग की धातु की भगवान पार्श्वनाथ की पद्मासन की मुद्रा में है. इसका वजन 5.291 किलोग्राम है, ऊंचाई 20.5 सेंटीमीटर है. वहीं दूसरी मूर्ति रंगीन धातु की खड़ी स्थिति में है. इस मूर्ति की आंखें सफेद, माथे पर त्रिपुंड, चार हाथ, दो हाथ में गदा व दो में फूल हैं. इस मूर्ति का वजन 4.756 किलो ग्राम है और ऊंचाई 35 सेंटीमीटर है."
एसटीएफ ने बताया, "प्रवीण के पास से एक बेशकीमती कलाकृति बरामद की गई, यह कलाकृति घुड़सवार की है. इसकी लंबाई 38.2 और चौड़ाई 31.1 सेंटीमीटर है. इस पेंटिंग के पीछे लिखी इबारत में तारीख 1 मई, 1931 दर्ज है." एसटीएफ ने आशंका जताई है, "यह मूर्तियां और कलाकृति किसी स्थान से चुराई गई हैं, और पकड़े गए दोनों आरोपी इन्हें अंतरराष्ट्रीय तस्करों को बेचने की फिराक में थे. इनका अन्य मूर्ति चोर गिरोह से नाता होने की आशंका है."
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सूत्रों का दावा है कि मूर्ति और कलाकृति की तस्करी के आरोप में पकड़े गए दोनों आरोपियों का भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से रिश्ता है. साथ ही एक तो भाजपा के नेता का करीबी रिश्तेदार भी है. एसटीएफ ने एक भाजपा नेता को भी पकड़ा था, मगर उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के नेताओं के दबाव में उसे भोपाल के रास्ते में ही छोड़ दिया.
( इनपुट आईएएनएस से)
एसटीएफ की ओर से गुरुवार को बताया गया है, "बुधवार की रात मुखबिर की सूचना पर एसटीएफ भोपाल के दल ने झांसी-ग्वालियर मार्ग के चिरुला नाके पर पुरातत्व महत्व की दो मूर्तियों और कलाकृति के साथ प्रवीण अग्रवाल और राजेंद्र राजपूत को पकड़ा, वे जायलो वाहन से ग्वालियर की तरफ जा रहे थे."
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एसटीएफ के मुताबिक, "एक मूर्ति काले रंग की धातु की भगवान पार्श्वनाथ की पद्मासन की मुद्रा में है. इसका वजन 5.291 किलोग्राम है, ऊंचाई 20.5 सेंटीमीटर है. वहीं दूसरी मूर्ति रंगीन धातु की खड़ी स्थिति में है. इस मूर्ति की आंखें सफेद, माथे पर त्रिपुंड, चार हाथ, दो हाथ में गदा व दो में फूल हैं. इस मूर्ति का वजन 4.756 किलो ग्राम है और ऊंचाई 35 सेंटीमीटर है."
एसटीएफ ने बताया, "प्रवीण के पास से एक बेशकीमती कलाकृति बरामद की गई, यह कलाकृति घुड़सवार की है. इसकी लंबाई 38.2 और चौड़ाई 31.1 सेंटीमीटर है. इस पेंटिंग के पीछे लिखी इबारत में तारीख 1 मई, 1931 दर्ज है." एसटीएफ ने आशंका जताई है, "यह मूर्तियां और कलाकृति किसी स्थान से चुराई गई हैं, और पकड़े गए दोनों आरोपी इन्हें अंतरराष्ट्रीय तस्करों को बेचने की फिराक में थे. इनका अन्य मूर्ति चोर गिरोह से नाता होने की आशंका है."
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सूत्रों का दावा है कि मूर्ति और कलाकृति की तस्करी के आरोप में पकड़े गए दोनों आरोपियों का भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से रिश्ता है. साथ ही एक तो भाजपा के नेता का करीबी रिश्तेदार भी है. एसटीएफ ने एक भाजपा नेता को भी पकड़ा था, मगर उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के नेताओं के दबाव में उसे भोपाल के रास्ते में ही छोड़ दिया.
( इनपुट आईएएनएस से)
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