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This Article is From Sep 04, 2021

"प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना" के नाम पर बेरोजगारों को ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़

गाजियाबाद के वसुंधरा के एक कार्यालय से रैकेट चलाया जा रहा था, लोगों को ठगने के लिए फर्जी वेबसाइट का इस्तेमाल किया गया

"प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना" के नाम पर बेरोजगारों को ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़
प्रतीकात्मक फोटो.
नई दिल्ली:

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने "प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना" के नाम पर लोगों को ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो लोगों को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया है. क्राइम ब्रांच के ज्वाइंट सीपी आलोक कुमार के मुताबिक बीते एक सितंबर को क्राइम ब्रांच की टीम को पता चला कि जालसाज ग़ाज़ियाबाद के वसुंधरा के एक कार्यालय से अपना रैकेट चला रहे हैं. यह ग्रुप लोगों को ठगने के लिए फर्जी वेबसाइट का इस्तेमाल कर रहा था.आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया और इंद्रजीत और अमित को उनके कार्यालय से गिरफ्तार किया गया. मौके से लैपटॉप, मोबाइल फोन, पासबुक, एटीएम कार्ड बरामद किए गए. 

पूछताछ के दौरान, यह पाया गया कि दोनों आरोपी व्यक्तियों को कॉल सेंटर के जरिए ग्राहकों से बात करने का अनुभव है. इसी साल आरोपी इंद्रजीत ने "प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना" के नाम पर कर्ज दिलाने के नाम पर पीड़ितों को ठगने की योजना बनाई. अपनी योजना को अंजाम देने के लिए उसने गाजियाबाद में एक किराए का कार्यालय लिया.

इंद्रजीत ने अपनी वेबसाइट 'http://mudrafinseve.in' तैयार करवाई और वेबसाइट के साथ एक पॉप अप लिंक अटैच किया गया. उसने अपना मोबाइल नंबर भी वेबसाइट से अटैच कर दिया. जब भी कोई लोन चाहने वाला उसकी वेबसाइट पर जाता है, तो पॉप अप लिंक अपने आप दिखाई देता है. आगे बढ़ने के लिए लोन लेने वाले को अपना जानकारी जैसे नाम, आवश्यक राशि, मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी भरना होता है. इस प्रक्रिया के माध्यम से इंद्रजीत ने लोन चाहने वालों की जानकारियां हासिल कीं और उससे संपर्क करना शुरू कर दिया. उसने पूर्वी और दक्षिणी राज्यों के लोगों को ज्यादा निशाना बनाया  क्योंकि उन्हें लगा कि  दूरी के कारण कोई उनके पीछे शिकायत लेकर नहीं आएगा.

इंद्रजीत ने लोगों को लुभाने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना के फर्जी स्वीकृति पत्र की व्यवस्था की. पिछले दो महीनों में दोनों ने 50-60 लोगों से 10 लाख रुपये से अधिक की ठगी की है. उन्होंने 1500 से ज्यादा लोगों को ठगने की कोशिश की है.

इंद्रजीत ने साल 2013 में यूपी से बीएससी की पढ़ाई पूरी की और उसके बाद दिल्ली आ गया. वह लक्ष्मी नगर स्थित एक कॉल सेंटर में काम करता था. उसने 2020 में अपना खुद का कॉल सेंटर भी चलाया और कई लोगों को ठगा. अमित कुमार ने बीए, प्रथम वर्ष तक की पढ़ाई की और 2014 में कॉलेज छोड़ दिया. वह 2016 में इंद्रजीत से मिला, जब दोनों लक्ष्मी नगर, दिल्ली में एक कॉल सेंटर में काम कर रहे थे.

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