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दो महीने बंधक बनाया, 7 करोड़ ठगे... हैदराबाद में 'डिजिटल अरेस्‍ट' कर 81 साल के बुजुर्ग की जीवन भर की कमाई लूटी

साइबर अपराधियों ने हैदराबाद के सोमाजीगुडा के रहने वाले 81 साल के एक पूर्व व्यवसायी को 'डिजिटल अरेस्‍ट' कर करीब सात करोड़ रुपये ठग लिए. ठगी के दो महीने आरोपियों ने जब बुजुर्ग से फिर से संपर्क किया और 1.2 करोड़ रुपये मांगे, तब जाकर उन्‍हें संदेह हुआ.

दो महीने बंधक बनाया, 7 करोड़ ठगे... हैदराबाद में 'डिजिटल अरेस्‍ट' कर 81 साल के बुजुर्ग की जीवन भर की कमाई लूटी
  • हैदराबाद के 81 साल के पूर्व व्यवसायी को साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट कर करीब सात करोड़ रुपये ठग लिए.
  • आरोपियों ने मादक पदार्थ तस्करी और आतंकवाद से जुड़े गंभीर आरोप लगाकर पीड़ित को वीडियो निगरानी में रखा.
  • पीड़ित को फाइनेंशियल वेरिफिकेशन के नाम पर 19.80 लाख रुपये और फिर म्यूचुअल फंड तथा एफडी निकालने को मजबूर किया.
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साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए किसी भी स्‍तर तक जा सकते हैं. ऐसे ही साइबर अपराधियों की क्रूरता और शातिर सोच का एक भयावह उदाहरण सामने आया है. साइबर अपराधियों ने हैदराबाद के सोमाजीगुडा के रहने वाले 81 साल के एक पूर्व व्यवसायी को हाल ही में एक सुनियोजित 'डिजिटल अरेस्‍ट' मामले में करीब सात करोड़ रुपये लूट लिए. दो महीने से अधिक समय तक चले इस मामले से पता चलता है कि अपराधी वरिष्ठ नागरिकों को अलग-थलग करने और उनका शोषण करने के लिए किस तरह के अत्यधिक मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल करते हैं.

यह मामला पिछले साल 27 अक्‍टूबर को उस वक्‍त शुरू हुआ जब पीड़ित को एक कूरियर कंपनी के प्रतिनिधि होने का दावा करने वाले व्यक्ति का व्हाट्सएप कॉल आया. कॉलर ने आरोप लगाया कि पीड़ित के नाम पर मुंबई से बैंकॉक के लिए बुक किया गया पार्सल पकड़ा गया है और उसमें नशीले पदार्थ, पासपोर्ट और एक लैपटॉप मिला है.

गंभीर आरोप लगाए, फिर किया 'डिजिटल अरेस्‍ट'

बुजुर्ग व्यक्ति ने इस मामले में किसी भी तरह से शामिल होने से इनकार किया लेकिन तो आरोपियों ने उन्‍हें फंसाने के लिए कई चालें चलीं. उन्हें अपने एक अन्‍य साथी से बात कराई गई, जिसे उन्‍होंने मुंबई पुलिस का आला अधिकारी बताया. इस दूसरे आरोपी ने उन पर मादक पदार्थों की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों सहित कई गंभीर आरोप लगाए.

बुजुर्ग शख्‍स को डराने के लिए अपराधियों ने 'डिजिटल अरेस्‍ट' का झांसा दिया. 'डिजिटल अरेस्‍ट' में पीड़ितों को बताया जाता है कि उन्‍हें गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार वीडियो निगरानी में रहना होगा.

बुजुर्ग से 7.12 करोड़ रुपये की रकम ट्रांसफर करवाई 

आरोपियों ने फाइनेंशियल वेरिफ‍िकेशन प्रक्रिया की आड़ में पीड़ित शख्‍स की जीवन भर की बचत को हड़प लिया. उन्‍हें आरोपियों ने पहले अपने लेन-देन को सत्यापित करने के लिए कहा और फिर 19.80 लाख रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया.

29 अक्टूबर को आरोपियों ने उन्‍हें सिग्नल ऐप डाउनलोड करने के लिए राजी किया, जिसका इस्तेमाल उन्होंने उन पर लगातार दबाव बनाए रखने और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया.

कई दिनों तक ऐप का इस्तेमाल और डरा-धमकाने के बाद आरोपियों ने उन्‍हें अपने म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट निकालने के लिए मजबूर किया और इसके कारण 7.12 करोड़ रुपये की भारी रकम ट्रांसफर की गई.

साथ ही पीड़ित को आश्वासन दिया गया कि जांच पूरी होने के बाद पूरी रकम वापस कर दी जाएगी.

दो महीने बाद फिर मांगे पैसे तो बुजुर्ग शख्‍स को हुआ संदेह

हालांकि आरोपी यहीं नहीं रुके. उन्‍होंने शुरुआती घटना के दो महीने के बाद बुजुर्ग शख्‍स से दो महीने बाद 29 दिसंबर को फिर से संपर्क किया और "मामला बंद करने" के लिए अतिरिक्‍त 1.2 करोड़ रुपये की मांग की.

इस आखिरी मांग ने ही उनके संदेह को जन्म दिया, जिसके चलते उन्‍होंने अखबारों में छपी इसी तरह की "डिजिटल अरेस्‍ट" धोखाधड़ी की खबरों का पता लगाया.

2024 में 20,574 से 2025 में घटकर 15,105 हुए मामले

यह मामला बेहद चिंताजनक है. हालांकि हैदराबाद, साइबराबाद और रचाकोंडा कमिश्‍नरेट में साइबर अपराध के कुल मामले 2024 में 20,574 से घटकर 2025 में 15,105 रह गए, लेकिन लोगों ने इसमें अपने करोड़ों रुपये गंवा दिए. अकेले 2024 में तेलंगाना में साइबर अपराध के शिकार लोगों ने कुल 1,866 करोड़ रुपये गंवा दिए.

हैदराबाद में एक अलग दुखद घटना में 76 साल की सेवानिवृत्त डॉक्टर की इसी तरह के धोखेबाजों द्वारा 6.5 लाख रुपये की उगाही के बाद दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई.

डिजिटल अरेस्‍ट जैसी कोई चीज नहीं होती है: पुलिस

डीएसपी केवीएम प्रसाद और तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो ने साफ किया है कि "डिजिटल अरेस्‍ट" जैसी कोई चीज नहीं है. भारत में किसी भी कानूनी या कानून प्रवर्तन एजेंसी के पास वीडियो कॉल के माध्यम से किसी को गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है.

उन्होंने बताया कि वास्तविक एजेंसियां ​​किसी आपराधिक मामले को "सुलझाने" के लिए कभी भी आपकी धनराशि के ट्रांसफर , सुरक्षा जमा या यूपीआई भुगतान की मांग नहीं करेंगी.

यदि आपको किसी घोटाले का संदेह है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर जाएं.

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