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अभिषेक की नाकामी का बढ़ता वजन, इस साल इस प्रदर्शन पर उठे सवाल, जानें क्यों बढ़ गई समस्या

जिंबाब्वे जैसी टीम सामने है लेकिन उसके बावजूद अभिषेक शर्मा की नाकामी और परेशान करने वाली है. और परेशान करने वाली बात इस साल अभी तक के सफर में उनका प्रदर्शन भी है

अभिषेक की नाकामी का बढ़ता वजन, इस साल इस प्रदर्शन पर उठे सवाल, जानें क्यों बढ़ गई समस्या
अभिषेक शर्मा शुरुआती दोनों ही मैचों में नाकाम रहे
Source: Social media

Zim vs Ind 2nd T20I:  यह सही है कि टीम इंडिया के लेफ्टी और मिस्टर सुनामी अभिषेक शर्मा अपनी अलग ही शैली से टीम को एक अलग ही अंदाज और फ्लो देते हैं. यह भी सही है कि वह इस फॉर्मेट में फिलहाल  दुनिया के नंबर-2 बल्लेबाज हैं, लेकिन इन तमाम बातों का मतलब तभी तक है, जब बल्ले से नियमित अंतराल पर रन बरसते रहें और फैंस सवाल न खड़े करें, लेकिन निरंतरता वह बात है, जिसमें और अभिषेक के बीच खासा गैप चलता रहा है. वह एक अर्द्धशतक बनाते हैं और अगली 5-6 पारियों में उनका बल्ला खामोश हो जाता है. अब जब दौरे में जिंबाब्वे जैसी टीम सामने है, तो फिर से इस पहलू की झलक मिली है. जहां एक दिन पहले पहले मुकाबले में अभिषेक सिर्फ 1 ही रन बना सके थे, तो दूसरे मुकाबले में अभिषेक दो अच्छे चौके जड़ने के बाद 8 रन बनाकर आउट हो गए. 

जानें क्या गलत जा रहा अभिषेक के साथ?

दरअसल अभिषेक शर्मा स्लैश हार्ड करके खेलते हैं. उनकी शैली टाइमिंग पर कम ताकत पर ज्यादा आधारित है. वह फुल फॉलो-थ्रो और पूरी बांहें खोलते हैं. यह अच्छी बात है लेकिन जहां पिचों पर गेंद रुक कर और ठहरकर आती है, तो वहां फिर बल्लेबाज विशेष को समायोजन करना ही होगा. और यह वह पहलू है, जिसमें अभिषेक दुविधा में दिख रहे हैं, डबल माइंड दिख रहे हैं. दूसरे मैच में गेंद टप्पा पड़ने के बाद धीमी आई, तो उन्होंने बैकवर्ड प्वाइंट की ओर इरादतन शॉट खेलते हुए सीधा फील्डर बर्ल के हाथों में गेंद थमा दी. 

इस साल का प्रदर्शन अभी तक निराशाजनक

साल विशेष में लगभग आधे सफर यानी 6-7 महीने में 22 मैचों की संख्या कोई छोटा आंकड़ा नहीं है. इस साल अभिषेक ने अभी तक 22 मैच खेले है,लेकिन उन्होंने 24.38 के औसत से 512 रन ही बनाए हैं. निश्चित तौर पर यह औसत न उनके लिए अच्छा है और न ही टीम इंडिया के लिहाज से. इन मैचों में अभिषेक ने सिर्फ 5 ही अर्द्धशतक जड़े है. पचासों की संख्या भी प्रदर्शन में नियमितता बताने के लिए काफी है. मतलब करीब हर 4.5 मैच बाद उनके बल्ले से एक अर्द्धशतक निकला है और यहां से अगर अभिषेक ने प्रदर्शन में निरंतरता पर काम नहीं किया, तो दिक्कत एक नहीं कई पहलुओं से है

यशस्वी जायसवाल एक बड़ सवाल हैं

जायसवाल के हक को लेकर पंडित पिछले लंबे समय से बातें कर रहे हैं. वह एक ऑल फॉर्मेट खिलाड़ी हैं. साल 2024 में वह टी20 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य थे, लेकिन उनका बाहर होना बड़ी संख्या में न ही फैंस को पसंद आया, न ही पूर्व क्रिकेटरों को पसंद आया. और अभिषेक की नाकामी प्रशंसकों का ध्यान स्वाभाविक रूप से जायवाल की ओर ले कर चला जाता है. 

अभिषेक को अब प्रतिस्पर्धा समझनी होगी

अभिषेक को समझना होगा कि चयन समिति ने एक छोर पर वैभव सूर्यवंशी में निवेश कर दिया है. और वह ठीक-ठाक कर भी रहे हैं. सूर्यवंशी ने जिंबाब्वे के खिलाफ पहले ही मैच में अर्द्धशतक भी जड़ा था. ऐसे में साफ है कि यहां से दूसरे छोर पर उनका मुकाबला अब बाहर चल रहे किसी और बल्लेबाज से हो चला है. यशस्वी जायसवाल से? बहरहाल यह कोई भी हो, लेकिन अब अभिषेक के प्रदर्शन में निरंतरता न होना पूर्व क्रिकेटरों और प्रशंसकों को चुभने लगा है. 

अभिषेक "संतुलन" के बारे में भी जानते हैं!

यह वही संतुलन है, जो इस साल टी20 विश्व कप के लिए घोषित भारतीय टीम के ऐलान के वक्त पैदा हुआ था. इस संतुलन को हासिल करने के लिए एक साल से टीम का हिस्सा रहे जितेश शर्मा की छुट्टी हो गई थी. संतुलन बोलें, तो तब सूर्यकुमार यादव ने कहा था कि हम विकेटकीपर को ओपनर चाहते हैं. यह सही है कि वैभव के लिए संजू सैमसन 'बलि का बकरा' बने हों, लेकिन न तो वह पूरी तरह से प्लानिंग से ही बाहर हुए हैं, तो पंजाब के उनके दोस्त प्रभसिमरन सिंह भी सिर पर सवार हैं. इसे अभिषेक अपना भाग्य ही मानें कि यह दौरा जिंबाब्वे जैसी टीम के खिलाफ है. कल्पना कीजिए कि अगर यही सिर पर विश्व कप या बड़ा टूर्नामेंट सवार होता, तो फिर से 'संतुलन' लौट आता या आएगा. मसलन इस सूरत में एक छोर पर सैमसन या प्रभसिमरन ही दिखाई पड़ेंगे.जाहिर है कि अभिषेक को प्रदर्शन में निरंतरता लानी ही होगी. 

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Abhishek Sharma, India, Zimbabwe, Zimbabwe Vs India 07/25/2026 Zmin07252026270412, Cricket
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